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बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष अभिषेक जौरिहार के विरूद्ध सचिव, सहयोग विलेज, खूंटी के द्वारा दिए गए शिकायत पत्र की जांच के बाद आरोपों को सही पाते हुए उनकी नियुक्ति को रद्द कर दिया गया है। उनपर आरोप थे कि उन्होंने नाबालिग माँ की पहचान प्रेस के माध्यम से लगातार उजागर किया। लीगली फ्री बच्चे से संबंधित मामले को लम्बित रखा।
उनपर महिला कर्मियों के साथ दुर्व्यवहार करने एवं उपलब्ध कराए गये फंड के संबंध में अनावश्यक रूप से सवाल-जवाब करते रहे। शिकायतों की जांच उप विकास आयुक्त, सिमडेगा की अध्यक्षता में गठित जांच समिति के द्वारा करायी गई। जांच में उक्त आरोपों को सही पाया गया। जांच समिति द्वारा यह भी अंकित किया गया है कि अभिषेक जौरिहार बिना सूचना प्रायः रात्रि में बालिका गृह का निरीक्षण करते थे। वे अपने कार्य दायित्व के प्रति पूर्णतः लापरवाह एवं स्वेच्छाचारी थे, जिससे बाल हित प्रभावित हो रहा था। उपायुक्त ने अपना मंतव्य अंकित करते हुए अभिषेक जौरिहार को पदमुक्त करने की अनुशंसा की है। बताया गया कि जांच समिति से प्राप्त प्रतिवेदन अभिषेक जौरिहार को प्रेषित करते हुए उनसे उनका पक्ष प्राप्त किया गया। विभाग द्वारा उनसे प्राप्त पक्ष की सम्यक समीक्षा की गई। जिससे उनके द्वारा पद का दुरूपयोग एवं स्वेच्छाचारिता का आरोप प्रमाणित हुआ। इसके बाद उनकी नियुक्ति तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी गई।
