कोडरमा जिले के जयनगर प्रखंड के घूरमुंडा गांव में दर्जनों हाथियों ने खेतों में घुसकर किसानों की तैयार धान की फसल को बर्बाद कर दिया। ग्रामीणों के अनुसार, यह झुंड श्मशान घाट के रास्ते तरिया के खेतों तक पहुंचा और थोड़ी ही देर में पूरी फसल रौंद दी।
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इससे पहले मोंथा चक्रवात से हुई भारी बारिश ने धान की खेती को नुकसान पहुंचाया था, जिससे किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ी है। किसान बम-पटाखे और मशाल जलाकर हाथियों को भगाने की कोशिश करते रहे, लेकिन तब तक उनकी महीनों की मेहनत पर पानी फिर चुका था।
पके हुए धान के खेत में मौजूद हाथी।
लगातार बढ़ रही हाथियों की गतिविधियां
ग्रामीणों ने बताया कि यह झुंड पिछले कई दिनों से इलाके में आतंक मचा रहा है। शनिवार देर रात भी हाथियों ने गड़गी रेलवे फाटक को तोड़कर क्षतिग्रस्त कर दिया था। इसके पहले भी यही झुंड आसपास के गांवों में धान की फसलों को रौंद चुका है।
घूरमुंडा गांव की तरिया की जमीन उपजाऊ मानी जाती है, जहां किसान कटाई की तैयारी में जुटे थे। हाथियों के इस हमले ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। बार-बार हो रहे हमलों से ग्रामीणों में भय का माहौल है। कई किसान अब रात में अपने खेतों की रखवाली करने को मजबूर हैं।
वन विभाग की टीम मौके पर एक्टिव
घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम घूरमुंडा गांव पहुंची। वन प्रक्षेत्र पदाधिकारी रविन्द्र कुमार ने बताया कि हाथियों के झुंड पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। फिलहाल उन्हें बराकर नदी के पार खदेड़ दिया गया है। उन्होंने बताया कि ये हाथी भ्रमणशील हैं।
संभावना है कि वे दोबारा कोडरमा इलाके में प्रवेश कर सकते हैं। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि किसी भी हाथी या झुंड को देखने पर तुरंत वन विभाग को सूचना दें और उनसे दूरी बनाकर रखें। विभाग की ओर से इलाके में गश्ती बढ़ा दी गई है ताकि दोबारा नुकसान से बचा जा सके।

वन विभाग ने कहा है कि फसलों के नुकसान की भरपाई की जाएगी।
नुकसान की भरपाई करेगा वन विभाग
इधर रेंजर रविन्द्र कुमार ने कहा कि जिन किसानों की फसल हाथियों द्वारा नष्ट की गई है, उन्हें नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रभावित किसान वन विभाग को आवेदन दें, जिसके बाद संबंधित अंचल कार्यालय के माध्यम से नुकसान का आकलन किया जाएगा। रिपोर्ट आने के बाद किसानों को मुआवजा देकर उनकी भरपाई की जाएगी।
