आजमगढ़ के महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय में हुई कार्यशाला।
आजमगढ़ जिले के महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय में राजधर्म से सुशासन तक प्राचीन भारतीय विचार और आधुनिक शासन विषय पर एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह संगोष्ठी विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग और भारतीय राजनीति विज्ञान परिषद के संयुक्त
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कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर संजीव कुमार ने कहा कि धर्म और राजनीति एक दूसरे के पूरक हैं। राजधर्म में पारदर्शिता होनी चाहिए। कुलपति ने बताया कि सही मायने में राजधर्म तभी पूरा होता है जिसमें जनसहभागिता हो। राजा को अपने हर एक निर्णय से,एक आदर्श और मर्यादा को स्थापित करना पड़ता है। क्योंकि जैसा राजा होता है। प्रजा भी अपने राजा को देखकर,उसका आचरण करती है। एक राजा की मूल शक्ति,दंड नहीं है , बल्कि न्याय है।
न्याय जो पक्षपात से रहित हो।कार्यक्रम के आयोजक राजनीति विज्ञान विभाग के सूर्य प्रकाश अग्रहरि ने आए हुये सभी अतिथियों का स्वागत किया और संगोष्ठी के सह-आयोजक शुभम राय ने संगोष्ठी के बारे में बताते हुये कहा कि धर्म और शासन के समन्वय के माध्यम से, एक शासक से अपेक्षा की जाती है कि वह निःस्वार्थ भाव से प्रजा की सेवा और सुरक्षा करे।
लोगों के कल्याण के लिए कार्य करें राज्य
विशेष अतिथि प्रो.राज शरण शाही जो कि बाबासाहेब भीम राव अंबेडकर विश्वविद्यालय, शिक्षा संस्थान के डीन है ने अपने उद्बोधन मे कि राज्य लोगों के कल्याण के लिए कार्य करे और शासक के निरंकुश व्यवहार को समाप्त करने के लिए, भारतीय चिंतन में, राजनीति कभी भी धर्म से रहित नहीं रही और इसे सामान्य कल्याण का साधन माना गया। पंडित दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय, के प्रो. रजनीकान्त पांडेय को विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा राजनीति विज्ञान एक्सलेन्स अवार्ड 2025 प्रदान किया गया है।
इस संगोष्ठी में भारतीय राजनीति विज्ञान परिषद एवं महाराजा सुहेल देव विश्वविद्यालय के मध्य अनुबंध पत्र पर हस्ताक्षर भी किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा “विधिना” नाम का एक ई-जर्नल भी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.संजीव कुमार ने लांच किया। कार्यक्रम का संचालन विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग की छात्रा सुषमा पाण्डेय तथा धन्यवाद ज्ञापन त्रिशिका श्रीवास्तव ने किया। संगोष्ठी के सह-आयोजक डॉ. दीक्षा उपाध्याय सहित विश्वविद्यालय के डॉ. हिमांशु शेखर, डॉ. धीरज, नितेश सिंह, डॉ. निधि सिंह ,डॉ. प्रियंका सिंह शाहिद बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय के प्रोफेसर छात्र-छात्राएं उपस्थित रही।
