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चंडीगढ़ तेंदुए की खाल तस्करी केस दिल्ली CBI को ट्रांसफर: दर्ज की गई की FIR, राजस्थान के दो तस्कर अरेस्ट, अंतरराज्यीय गिरोह के खुलासे की उम्मीद – Chandigarh News

चंडीगढ़ तेंदुए की खाल तस्करी केस दिल्ली CBI को ट्रांसफर:  दर्ज की गई की FIR, राजस्थान के दो तस्कर अरेस्ट, अंतरराज्यीय गिरोह के खुलासे की उम्मीद – Chandigarh News


चंडीगढ़ में तेंदुए की खाल तस्करी केस वन विभाग की मांग पर दिल्ली CBI को ट्रांसफर कर दिया गया।

चंडीगढ़ के सेक्टर-22 में तेंदुए की खाल तस्करी के बड़े मामले की जांच अब दिल्ली सीबीआई करेगी। चंडीगढ़ वन विभाग की मांग पर केस को सीबीआई की दिल्ली टीम को ट्रांसफर किया गया है।

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दिल्ली सीबीआई ने इस मामले में आरोपी विक्रम सिंह बघेल और अवधेश चौधरी के खिलाफ वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट की धारा 39, 40, 48, 49बी, 50, 51 और 57 के तहत एफआईआर दर्ज कर ली है। मामला चंडीगढ़ से जुड़ा होने के कारण इसकी चार्जशीट भी चंडीगढ़ स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में दाखिल की जाएगी।

सूद धर्मशाला से पकड़े गए थे दोनों तस्कर

पिछले साल, सितंबर 2025 में डायरेक्टोरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) को तेंदुए की खाल की तस्करी की सूचना मिली थी। डीआरआई की चंडीगढ़ यूनिट ने मुंबई कस्टम के साथ मिलकर सेक्टर-22 स्थित सूद धर्मशाला में कार्रवाई की। टीम ने ग्राहक बनकर आरोपियों से संपर्क किया और फिर छापा मारकर दोनों को तेंदुए की खाल के साथ गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपी राजस्थान के रहने वाले बताए गए हैं।

अब केस की जांच दिल्ली सीबीआई करेगी।

हिमाचल से लाई जाती थी तेंदुए की खाल

जांच में सामने आया है कि आरोपी तेंदुए की खाल हिमाचल प्रदेश से लाते थे और फिर देश के अलग-अलग हिस्सों में इसकी सप्लाई करते थे। तस्करी के बदले उन्हें मोटी रकम मिलती थी। एजेंसियों के मुताबिक आरोपी लंबे समय से संरक्षित वन्यजीव प्रजातियों की अवैध तस्करी में शामिल रहे हैं।

डीआरआई ने गिरफ्तारी के बाद केस आगे की कार्रवाई के लिए चंडीगढ़ वाइल्ड लाइफ डिपार्टमेंट को सौंप दिया था। इसके बाद गहन और व्यापक जांच के लिए मामला सीबीआई को दिया गया।

अब सीबीआई यह पता लगाने में जुटी है कि इस अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं, हिमाचल के किन इलाकों से खाल लाई जाती थी और इसे किन बाजारों में सप्लाई किया जाना था।

जानिए क्या कहता है कानून

वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट–1972 के तहत तेंदुआ शेड्यूल-1 में शामिल है, जिसे कानून में सर्वोच्च संरक्षण प्राप्त है। इस श्रेणी में आने वाले किसी भी वन्यजीव का शिकार करना, पकड़ना या उसके शरीर के किसी भी हिस्से का व्यापार करना गंभीर अपराध माना जाता है।

कानून की धारा-9 के अनुसार, तेंदुए के शिकार पर सख्त पाबंदी है। वहीं, धारा-51 के तहत यदि कोई व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसे 3 से 7 साल तक की सजा और जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।



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