जयपुर में राजसेस कॉलेजों में संविदा पर होने वाली नियुक्तियों के खिलाफ शिक्षकों का गुस्सा फूट पड़ा है। अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM) ने आज कालाडेरा के राजकीय सहरिया पीजी कॉलेज में प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने काली पट्टी बांधकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और भर्ती प्रक्रिया को तुरंत रोकने की मांग की। ABRSM का कहना है कि सरकार राजसेस कॉलेजों को बर्बाद करने पर तुली है। इन कॉलेजों में न तो पर्याप्त संसाधन हैं और न ही स्थायी शिक्षक। संविदा पर भर्ती करके सरकार शिक्षा की गुणवत्ता से खिलवाड़ कर रही है। शिक्षकों ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर भर्ती प्रक्रिया नहीं रोकी गई तो वे आंदोलन करेंगे। उन्होंने सोडाणी समिति की सिफारिशों को भी तुरंत लागू करने की मांग की है। राजसेस कॉलेजों की स्थिति पर महासंघ की चिंता
महासंघ ने अवगत कराया कि सत्र 2020-21 से 2022-23 के मध्य राजसेस योजना के अंतर्गत 303 नवीन महाविद्यालय खोले गए तथा वर्तमान सरकार के कार्यकाल में सत्र 2023-24 एवं 2024-25 में 71 अतिरिक्त राजसेस महाविद्यालय खोले जा चुके हैं, जिससे इनकी कुल संख्या 374 हो गई है। इनमें से लगभग 260 राजसेस महाविद्यालयों में आज भी एक भी स्थायी संकाय सदस्य कार्यरत नहीं है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। सोडाणी समिति की सिफारिशें और ज्ञापन प्रदर्शन के उपरांत संगठन के प्रतिनिधिमंडल द्वारा उपखंड अधिकारी चौमू के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन प्रस्तुत कर शीघ्र समाधान की माँग की गई। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि विधानसभा चुनाव-2023 के पश्चात गठित राज्य सरकार द्वारा राजसेस महाविद्यालयों एवं विषयों के संचालन के संबंध में गठित सोडाणी समिति की सिफारिशें अब तक न तो सार्वजनिक की गई हैं और न ही लागू की गई हैं। संविदा नियुक्तियों पर आपत्ति और चेतावनी
महासंघ ने यह भी गंभीर आपत्ति दर्ज कराई कि भर्ती परीक्षा कैलेंडर-2026 के माध्यम से राजसेस नियम-2023 में परिवर्तन कर पाँच वर्षों के लिए 28500 रुपये के नियत वेतन पर संविदा टीचिंग एसोसिएट एवं अशैक्षणिक पदों की चयन प्रक्रिया प्रारंभ करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसके लिए अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड को अभ्यर्थना भेजी जा चुकी है। महासंघ के अनुसार यह व्यवस्था अस्थायी, असुरक्षित एवं नीति-विरोधी है तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के सर्वथा विपरीत है। महासंघ ने राज्य सरकार से माXग की कि राजसेस महाविद्यालयों के संबंध में गठित सोडाणी समिति की सिफारिशों को अविलंब लागू किया जाए, राज्य में संचालित सभी राजसेस महाविद्यालयों को सामान्य राजकीय महाविद्यालयों के रूप में संचालित करने के स्पष्ट आदेश जारी किए जाएँ तथा संविदा नियुक्तियों की प्रस्तावित चयन प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोका जाए। महासंघ ने स्पष्ट किया कि यदि समय रहते इस दिशा में ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो संगठन को लोकतांत्रिक एवं आंदोलनात्मक मार्ग अपनाने के लिए विवश होना पड़ेगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। सरकार राजसेस कॉलेजों के साथ अन्याय कर रही
अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के सचिव डॉ. शक्तिसिंह शेखावत ने कहा कि सरकार राजसेस कॉलेजों के साथ अन्याय कर रही है। उन्होंने कहा कि संविदा भर्ती से कॉलेजों में अस्थिरता आएगी और छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा। उन्होंने सरकार से तुरंत इस फैसले को वापस लेने की मांग की है।
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