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अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुआ हादसा: खुशखेड़ा हादसे में घायल मजदूर ने बताई हादसे की भयावहता, श्रमिक जानते थे खतरा, पर काम करते रहे – Bhiwadi News

अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुआ हादसा:  खुशखेड़ा हादसे में घायल मजदूर ने बताई हादसे की भयावहता, श्रमिक जानते थे खतरा, पर काम करते रहे – Bhiwadi News

अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए इस हादसे में प्रशासन की लापरवाही व अनदेखी सामने आई। हादसे में घायल श्रमिक नितेश ने बताया कि एक कमरे में मशीन चलती थी। दूसरे में 40-50 कैरेट कच्चा माल (बारूद) रखा था। सोमवार सुबह इसी में अचानक तेज धमाका हुआ। तब नितेश पैकिंग एरिया में था। बाहर निकलने से बच गया। नितेश के अनुसार मोतिहारी निवासी एक व्यक्ति ही बिहार से लेबर लाता था। फैक्ट्री में काम के वक्त अंदर-बाहर से ताला लगाकर काम होता था। अंदर 8 से 10 टेबल पर बारूद भरा जाता था। हादसे के समय हर टेबल पर 5 से 10 किलो बारूद का मिश्रण रखा था। पास में 40 से अधिक कट्टे व 10-15 कार्टन तैयार माल रखा था, जो आग में जलकर राख हो गया। एक और संदिग्ध गोदाम की भी जानकारी सामने आई
हादसे के बाद फैक्ट्री से धुएं का गुबार निकलता रहा। घटनास्थल से करीब एक किमी दूरी पर एक और संदिग्ध गोदाम मिलने की जानकारी सामने आ रही है। जिसमें पटाखा जैसा सामान और अवशेष मिले हैं। बताया गया है कि यह गोदाम करीब 15 दिन पहले खाली हो गया था। दो वक्त की रोटी कमाने आए थे, 7 घरों के चिराग बुझ गए, परिजन सदमे में भिवाड़ी| अवैध पटाखा फैक्ट्री के धमाके ने उन 7 परिवारों के सपनों को खाक कर डाला, जो अच्छी जिंदगी के लिए करीब 1000 किलोमीटर दूर उद्योग नगरी में मजदूरी करने आए थे। धमाके के बाद बिहार के मोतीहारी व चंपारन के इन परिवारों को अपनों के शव तक नहीं मिले। जो मिले वो कोयला- कंकाल बन गए। मृतक मिंटू के भाई राजकिशोर ने बताया कि मिंटू पहले ही कहता था कि फैक्ट्री में गलत काम हो रहा है। बारूद के बीच काम कराते हैं। वह यहां काम नहीं करेगा। मिंटू अगले महीने से काम छोड़ने की बात कह रहा था। 10 माह पहले मिंटू से हुई थी मुस्कान की शादी, उसकी हंसी ही छिन गई मृतक मिंटू की शादी 10 महीने पहले अप्रैल में बिहार के मोतिहारी की मुस्कान से हुई थी। शादी के बाद पत्नी मुस्कान को मिंटू उसे भिवाड़ी ले आया। मिंटू की सास कंचन ने बताया कि 2 महीने पहले ही वह यहां काम पर लगा था। मृतक सुजान उर्फ सुजंत 3 साल से परिवार के साथ इंडस्ट्री एरिया में रह रहा था। बुआ भी यहीं रहती है। सुजान ने घर फोन कर बताया था कि 20 फरवरी को होली की छुट्टी पर घर आएगा। उनके एक-दो साथी श्रमिक फैक्ट्री के दूसरे हिस्से में दाल व चावल बना रहे थे। वो खाना बच गया, खाने वाले चल बसे।



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