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राजस्थान में बसा अस्थायी शहर, यहां म्यूजियम, भोजनशाला भी: संत के वस्त्रों के दर्शनों के लिए पहुंचे विदेशी श्रद्धालु, किसी मॉर्डन सिटी से ज्यादा सुविधाएं – Jaisalmer News

राजस्थान में बसा अस्थायी शहर, यहां म्यूजियम, भोजनशाला भी:  संत के वस्त्रों के दर्शनों के लिए पहुंचे विदेशी श्रद्धालु, किसी मॉर्डन सिटी से ज्यादा सुविधाएं – Jaisalmer News

राजस्थान के जैसलमेर में पहली बार 25 हजार श्रद्धालुओं के लिए अस्थाई नगर बसाया गया है। अक्षय भोजनशाला तैयार की गई है। करीब 5 बीघा में मुख्य डोम के अलावा 50-50 हजार स्क्वायर वर्ग फीट के 2 विशाल डोम सिर्फ भोजनशाला के लिए रिजर्व रखे गए हैं। 600 अनुभवी रसोइयों की टीम है, जो स्वादिष्ट भोजन तैयार कर रही है। दरअसल, जिले के डेडानसर मेला ग्राउंड पर जैन ट्रस्ट की ओर से 6 से 8 मार्च तक जैन समाज का चादर महोत्सव चल रहा है। इसमें जैन संत दादा श्री जिनदत्त सूरी महाराज के 872 साल पुराने वस्त्रों के दर्शन हो सकेंगे। दर्शनों के लिए देश- विदेश से बड़ी तादात में श्रद्धालु पहुंचे है। उन्हें किसी प्रकार की समस्या नहीं हो, इसके लिए सेवादार नियुक्त किए गए है। इडली-वड़ा और दाल- चावल तक मेनू में शामिल
रसोई घर में 600 अनुभवी रसोइयों की टीम तैनात की गई है, जो शुद्ध सात्विक भोजन तैयार कर रही है। यहां आधुनिक मशीनों और पारंपरिक चूल्हों का संतुलित उपयोग किया जा रहा है, ताकि भोजन की गुणवत्ता और स्वाद दोनों बरकरार रहें। स्वच्छता के मानकों का कड़ाई से पालन किया जा रहा है। इस दौरान चाय और कॉफी की व्यवस्था निरंतर जारी है। मैदान में बनाए कुल 5 डोम
मेला मैदान में कुल 5 विशाल डोम बनाए गए है। मुख्य डोम 1 लाख स्क्वायर फीट का है। इसमें मुख्य सभा, सामूहिक इकतीसा पाठ और संतों के प्रवचन हो रहे हैं। यहां 12 हजार श्रद्धालुओं के बैठने के लिए व्यवस्थित कुर्सियां लगाई गई हैं। इसके अलावा एक AC म्यूजियम भी संचालित है, जो ज्ञान और अध्यात्म का केंद्र बना हुआ है। विभाग बनाए, टीमों ने संभाली जिम्मेदारी
आयोजन को लेकर अलग- अलग विभाग बनाए गए हैं। आयोजन की सफलता सुनिश्चित करने के लिए जैन ट्रस्ट और बाहर से आए 500 स्वयंसेवकों की एक विशेष टीम बनाई गई है। यह टीम पूरे आयोजन की जिम्मेदारी संभाल रही है, जिससे जैन संतों के साथ देश-विदेश से श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो।
आयोजक बोले- अतिथि सत्कार की यादें भी लेकर जाएंगे श्रद्धालु
आयोजन समिति के महामंत्री पदमचंद टाटिया का कहना है- हमारा उद्देश्य है कि जैसलमेर की इस पवित्र धरा पर आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु भक्ति के साथ-साथ जैसलमेर के अतिथि सत्कार की यादें भी साथ लेकर जाए। 25 हजार लोगों के लिए भोजनशाला का संचालन किसी चुनौती से कम नहीं था, लेकिन सेवाभाव और अनुशासन से सब सुलभ हो रहा है। वित्त विभाग प्रमुख कुषराज गोलेछा (बेंगलुरु) का कहना है- बेंगलुरु और अन्य महानगरों से आए सहयोगियों के कारण वित्तीय और संसाधन प्रबंधन को मजबूती मिली है। हमने टेंट सिटी से लेकर मुख्य डोम तक हर जगह लागत और गुणवत्ता के बीच एक संतुलन बनाने का प्रयास किया है। भोजनशाला की व्यवस्था पर विशेष जोर है, क्योंकि यह सेवा का प्रत्यक्ष रूप है। पहली बार श्रद्धालुओं के लिए बसाया अस्थाई शहर
जैसलमेर जैन ट्रस्ट के अध्यक्ष महेंद्र सिंह भंसाली ने बताया- इतिहास के अनुसार, विक्रम संवत 1211 में जब अजमेर में दादा गुरुदेव का स्वर्गवास हुआ, तब उनके अंतिम संस्कार की अग्नि में उनका शरीर तो विलीन हो गया, लेकिन उनके वस्त्र पूरी तरह सुरक्षित रहे। ये वस्त्र बाद में गुजरात के पाटन पहुंचे। जब लगभग 145 साल पहले जैसलमेर में भयंकर महामारी फैली थी। तब यहां के राजा (महारावल) ने इन पवित्र वस्त्रों को पाटन से जैसलमेर मंगवाया था। माना जाता है कि इन वस्त्रों के आते ही जैसलमेर महामारी से मुक्त हो गया था। तब से ये वस्त्र जैसलमेर के ‘ज्ञान भंडार’ में सुरक्षित रखे हुए हैं। जैन समाज के इतिहास में इस तरह का ‘चादर महोत्सव’ पहली बार आयोजित किया जा रहा है। पहली बार जैसलमेर में श्रद्धालुओं के लिए अस्थाई शहर बसाया गया है। ये खबर भी पढ़िए…. भागवत बोले-हम बंटे हुए हैं, इसलिए आक्रमण हो रहे हैं:भेद और स्वार्थ को तिलांजली दें; संत ने कहा-जैनों को हिंदुओं से अलग न समझें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा- आक्रमण भी इसलिए चल रहे हैं क्योंकि हम सोए और बंटे हुए हैं। हम वास्तव में एक ही हैं, पंथ-संप्रदाय से अलग हैं। संस्कृति, देश, समाज के नाते हम एक हैं। ज्ञान नहीं है तो वह भेद मानता है। पूरी खबर पढ़ें राजस्थान- जैन संत के लिए 3 दिन पूरा शहर बुक:872 साल पुराने वस्त्रों के दर्शन होंगे, आग भी नहीं जला सकी, महामारी से बचाया जैसलमेर में होने जा रहे जैन समाज के चादर महोत्सव देश-विदेश से 25 हजार श्रद्धालु आएंगे। महोत्सव में आने वाले श्रद्धालु जैन संत दादा श्री जिनदत्त सूरी महाराज के 872 साल पुराने वस्त्रों का भी दर्शन करेंगे। पूरी खबर पढ़ें



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