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28 साल पुराने मामले में अकाउंटेंट समेत 4 बरी: फाइबर ग्लास बोट खरीद में 2.96 लाख राजस्व नुकसान का आरोप लगा था – Kota News

28 साल पुराने मामले में अकाउंटेंट समेत 4 बरी:  फाइबर ग्लास बोट खरीद में 2.96 लाख राजस्व नुकसान का आरोप लगा था – Kota News

कोटा में एसीबी कोर्ट में राजस्व हानि करने और धोखाधड़ी के 28 साल पुराने मामले में फैसला सुनाया है। कोर्ट ने नगर निगम के तत्कालीन सहायक लेखाधिकारी प्रकाश चंद, मैंसर्स मयूर ट्रेड लिंकर्स कोटा के प्रोपराइटर ललित, मैंसर्स थोनेट सेंटर प्रोपराइटर ललित की पत्नी मधु व मैंसर्स क्राफ्ट वे इंजिनियर्स लिमिटेड मुंबई के मैनेजिंग डायरेक्टर हरविंदर सिंह को संदेह का लाभ देते हुए बरी किया है। सुनवाई के दौरान एसीबी शिकायतकर्ता का परिवाद कोर्ट में पेश नहीं कर सकी। मामला नगर निगम में फाइबर ग्लास बोट से खरीद से जुडा था। आरोप था की फाइबर ग्लास पेसेंजर बोट खरीद में अधिकारियों ने फर्म से मिलीभगत कर सरकार को 2,96,658 रूपए का राजस्व नुकसान पहुंचा। इस मामले अज्ञात शिकायतकर्ता के परिवाद पर जून 1998 में जयपुर एसीबी मुख्यालय ने मामला दर्ज किया था। फाइबर ग्लास बोट टेंडर में मिलीभगत का आरोप प्रकाश चंद व मैसर्स क्राफ्ट वे इंजीनियर्स लिमिटेड की ओर से वकील दीपक मित्तल ने बताया कि अज्ञात शिकायतकर्ता के परिवाद में आरोप था कि नगर निगम की ओर से फाइबर ग्लास बोट टेंडर जारी किया गया था। टेंडर में तीन फर्म शामिल हुईं। अधिकारियों ने फर्म से मिलीभगत करके नियम विरुद्ध 4 लाख कीमत की फाइबर ग्लास पैसेंजर बोट 7 लाख रुपए में खरीदी। मामले की जांच कोटा एसीबी द्वारा की गई। कई अधिकारियों पर लगे आरोप, कुछ बने गवाह मामले में तत्कालीन आयुक्त लोकनाथ सोनी, तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी मीठा राम, लेखा अधिकारी कपिल देव शर्मा, सहायक लेखा अधिकारी प्रकाश चंद जैन, उद्यान अधीक्षक कृष्ण मोहन प्रधान, स्टोर कीपर कन्हैयालाल व टेंडर में शामिल तीन फर्मों पर मिलीभगत करने के आरोप लगे। साल 2008 में कोर्ट ने प्रसंज्ञान लिया। तत्कालीन आयुक्त लोकनाथ सोनी एसीबी के गवाह बन गए, तत्कालीन कार्यकारी अधिकारी मीठाराम पर कार्रवाई के लिए सरकार ने अभियोजन स्वीकृति जारी नहीं की। कृष्ण मोहन व कन्हैया लाल पर कार्रवाई के लिए तत्कालीन निगम में मेयर ने अभियोजन स्वीकृति जारी नहीं की। कोर्ट ने सभी आरोपियों को किया दोषमुक्त
एसीबी ने निगम के तत्कालीन अधिकारी प्रकाश चंद, कपिल देव के साथ साथ मैसर्स मयूर ट्रेड लिंकर्स कोटा के प्रोपराइटर ललित, मैसर्स थोनेट सेंटर प्रोपराइटर ललित की पत्नी मधु व मैसर्स क्राफ्ट वे इंजीनियर्स लिमिटेड मुंबई के मैनेजिंग डायरेक्टर हरविंदर सिंह के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया। कपिल देव शर्मा ने हाई कोर्ट की शरण ली, जिसके बाद कोर्ट ने कपिल के खिलाफ कार्रवाई ड्रॉप कर दी। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष टेंडर में मिलीभगत व राजस्व हानि साबित नहीं कर पाया। एसीबी भी शिकायतकर्ता का परिवाद कोर्ट में पेश नहीं कर सकी। कोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए तत्कालीन सहायक लेखा अधिकारी प्रकाश चंद, फर्म के प्रोपराइटर ललित, मधु व हरविंदर को दोषमुक्त कर दिया। मामले में 14 गवाह व 28 दस्तावेज पेश किए गए।



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