एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में 3 बड़े अपडेट हैं… आरोपी समर्थ ने ट्विशा के आखिरी दिन की क्या कहानी बताई, इस कहानी में क्या-क्या झोल हैं और दूसरे पोस्टमार्टम के बाद अब आगे क्या; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: पति समर्थ ने ट्विशा की मौत की क्या कहानी बताई? जवाब: ट्विशा शर्मा के पति और वकील समर्थ सिंह ने ट्विशा की मौत के 10 दिन बाद, यानी 22 मई को जबलपुर कोर्ट में सरेंडर किया। रात करीब 2 बजे भोपाल पुलिस समर्थ को भोपाल लेकर आई। 23 मई को भोपाल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने समर्थ को 7 दिन की पुलिस रिमांड में भेज दिया। पुलिस को ट्विशा से अपने रिश्ते और ट्विशा की मौत के दिन की पूरी कहानी बताई… ‘प्रेग्नेंसी के बाद ट्विशा का व्यवहार बदल गया’- आरोपी पति समर्थ समर्थ के मुताबिक… ‘मौत से पहले साथ हमने साथ खाना खाया’- आरोपी पति समर्थ समर्थ के मुताबिक… हालांकि, ट्विशा की मौत को सुसाइड बताने वाली समर्थ की इस कहानी पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस का भी मानना है कि आरोपी खुद को बचाने के लिए झूठे बयान दे रहा है। सवाल-2: समर्थ की बताई इस कहानी पर क्या सवाल हैं? जवाब: 7 बड़े सवाल उठ रहे हैं… 1. शरीर पर मौत से पहले की कई चोटें 2. जिस बेल्ट से फंदा लगा, वो पोस्टमोर्टम के समय मौजूद नहीं थी 3. FIR और CCTV फुटेज के मुताबिक, मौत के समय में 3 घंटे का फर्क 4. अस्पताल ले जाने से पहले पुलिस को खबर नहीं दी गई 5. FIR में ट्विशा की उम्र दो जगह अलग-अलग 6. सास गिरिबाला सिंह ने सैलून के CCTV फुटेज मांगे 7. ट्विशा ने मां को वॉट्सएप पर लिखा – ‘समर्थ को मेरी प्रेग्नेंसी पर शक’ सवाल-3: दोबारा पोस्टमार्टम से क्या पता चल सकता है? जवाब: 24 मई को करीब 3 घंटे में ट्विशा की बॉडी का दोबारा पोस्टमार्टम हुआ। फोरेंसिक साइंस की रिसर्च के मुताबिक, दोबारा पोस्टमार्टम में कई दिक्कतें आती हैं, जैसे- पहले पोस्टमार्टम से शरीर में कुछ बदलाव आ जाते हैं। शव पुराना होने से डिकम्पोज होने लगता है। FIR में दावा किया गया था कि ट्विशा का शव परिवार को सौंप दिया गया था। जबकि उनके परिवार का कहना था कि उन्होंने शव स्वीकार नहीं किया। करीब 8 दिन शव AIIMS के मुर्दाघर में -4 डिग्री सेल्सियस पर ही रखा रहा, क्योंकि परिवार ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई न होने तक अंतिम संस्कार से इनकार कर दिया था। ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, AIIMS के ऑफिसर्स ने कहा था कि शव को सड़ने से बचाने के लिए -80 डिग्री सेल्सियस टेम्पेरचर पर रखने की जरूरत होती है। जबकि भोपाल में कहीं ऐसी फैसिलिटी नहीं है। हालांकि शव का विसरा, खून, नाखूनों के सैम्पल आदि फोरेंसिक और DNA जांच के लिए प्रिजर्व कर लिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता कहते हैं, ‘अगर दूसरे पोस्टमार्टम में चोटों या बाकी चीजों के आधार पर ये साबित हुआ कि मामला आत्महत्या नहीं, बल्कि हत्या का है तो फिर BNS की धारा 103 के तहत नए सिरे से मामला दर्ज होगा। सबूतों को मिटाने के लिए भी धारा 238 और 241 के तहत मामला दर्ज हो सकता है। मामले में सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान लेने के बाद आरोपियों को निचली कोर्ट से जमानत मिलने में दिक्कतें बढ़ सकती हैं।’ सवाल-4: सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का खुद संज्ञान क्यों लिया है? जवाब: सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने 23 मई को CJI सूर्यकांत को एक नोट भेजकर मामले का स्वतः संज्ञान लेने का सुझाव दिया था। नोट में कहा गया कि ट्विशा की मौत के बाद मीडिया कवरेज से ये सोच बन रही है कि ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह के असर के चलते जांच प्रभावित हुई है। नोट में मानसिक प्रताड़ना, दहेज की मांग के आरोपों का भी जिक्र है। ट्विशा के परिवार ने भी सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में मामले की जांच कराने की मांग की थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, CJI सूर्यकांत ने कहा है, ‘अगर किसी मामले में कोर्ट की भूमिका पर सवाल उठते हैं, तो ये महज एक केस का मुद्दा नहीं रह जाता, बल्कि पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है।’ विराग गुप्ता कहते हैं, ‘ट्विशा की मौत का आरोपी समर्थ वकील है और उनकी मां रिटायर्ड जज। पीड़ित पक्ष के मुताबिक, इन वजहों से पुलिस सही जांच नहीं कर रही और लोकल कोर्ट से न्याय नहीं मिल रहा। कॉकरोच वाले बयान पर विवाद के बाद न्यायिक व्यवस्था, जज और वकील भी सवालों के घेरे में है। ऐसे में इस चर्चित मामले पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से लोगों का न्यायपालिका पर भरोसा बढ़ेगा।’ सवाल-5: इस मामले में आगे क्या हो सकता है? जवाब: ट्विशा के परिवार की 6 प्रमुख मांगे थीं- विराग गुप्ता बताते हैं, ‘इनमें से ज्यादातर बातों पर पीड़ित पक्ष को राहत मिल गई थी। 24 मई को दोबारा पोस्टमार्टम हुआ और 22 मई को ही मध्य प्रदेश सरकार ने केस की जांच CBI को सौंप दी। अब CBI जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल करेगी। ‘चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच 25 मई को इस मामले पर सुनवाई कर सकती है। बेंच में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली भी शामिल होंगे। सुप्रीम कोर्ट मुकदमे की सुनवाई भोपाल या मध्य प्रदेश से बाहर कराने का आदेश दे सकती है, ताकि निष्पक्ष सुनवाई हो सके।’ सबूतों के आधार पर अगर हत्या का आरोप साबित हुआ, तो आरोपियों को आजीवन कारावास से लेकर फांसी तक की सजा हो सकती है।
***** रिसर्च सहयोग – प्रथमेश व्यास
———————————————————– ये खबर भी पढ़ें… ट्विशा के गले पर दो निशान ने उलझाई गुत्थी:गले की हड्डी भी नहीं टूटी, दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से मिलेंगे 5 सवालों के जवाब फिल्म अभिनेत्री ट्विशा की मौत की जांच में नया मोड़ आया है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में गले पर मिले दो निशानों के बाद आत्महत्या की थ्योरी पर सवाल उठ रहे हैं। परिजन का दावा है कि दोनों निशान ओवरलैप कर रहे हैं। इसे सामान्य फांसी के मामलों से अलग माना जा रहा है। परिजन ने सवाल उठाया कि कथित फंदे को न तुरंत जब्त किया गया और न डॉक्टर्स को सौंपा गया। पढ़ें पूरी खबर…
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