मास्टर प्लान में विरासत से समझौता नहीं करेगा चंडीगढ़ प्रशासन।
चंडीगढ़ प्रशासन ने साफ कर दिया है कि शहर के मास्टर प्लान में किसी भी तरह के विकास कार्य के लिए उसकी ऐतिहासिक और वास्तु विरासत से समझौता नहीं किया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि चंडीगढ़ मास्टर प्लान-2031 (CMP-2031) में प्रस्तावित बदलावों के दौरान हेरिटे
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यूटी प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार सुप्रीम कोर्ट द्वारा संरक्षित चंडीगढ़ के हेरिटेज सेक्टरों की मूल पहचान को किसी भी हालत में नहीं बदला जाएगा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि फेज-1 के सेक्टरों में लो-राइज और प्लॉट आधारित विकास की मौजूदा व्यवस्था जारी रहेगी। यहां किसी भी परिस्थिति में अतिरिक्त ऊंचाई की अनुमति नहीं दी जाएगी।
प्रशासन का कहना है कि शहर के मूल आर्किटेक्चरल कंट्रोल और जोनिंग नियमों का पूरी तरह पालन किया जाएगा, जैसा कि चंडीगढ़ के शुरुआती योजनाकारों ने तय किया था।
फेज-3 के विकास पर रहेगा फोकस
प्रस्तावित संशोधन मुख्य रूप से फेज-3 के उन क्षेत्रों पर केंद्रित हैं, जहां अभी विकास होना बाकी है। अधिकारियों के मुताबिक शहर के कोर एरिया और हेरिटेज सेक्टरों को पूरी तरह सुरक्षित रखते हुए भविष्य की जरूरतों के अनुसार नई योजना तैयार की जा रही है।
प्रशासन का कहना है कि ये बदलाव चंडीगढ़ के तीन चरणों वाले विकास मॉडल को ध्यान में रखकर किए जा रहे हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होने के बाद ही मिलेगा विस्तार
यूटी प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि टाउन प्लानिंग विंग ने प्रस्तावित संशोधनों में सख्त हेरिटेज सुरक्षा नियम और “इंफ्रास्ट्रक्चर-फर्स्ट” शर्तें शामिल की हैं। यानी किसी भी नए विकास या विस्तार से पहले जरूरी बुनियादी सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी।
हेरिटेज पहचान बनाए रखने पर जोर
चंडीगढ़ को देश का पहला योजनाबद्ध शहर माना जाता है और इसकी वास्तुकला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली हुई है। ऐसे में प्रशासन शहर की मूल पहचान और सौंदर्य को बरकरार रखने पर विशेष जोर दे रहा है।
