बिहार के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों और छात्र-छात्राओं के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। राज्य के सरकारी स्कूलों में शनिवार को एक बार फिर से पुराने नियम के तहत ‘हाफ डे’ (आधे दिन की पढ़ाई) की व्यवस्था लागू होने जा रही है। शिक्षा विभाग आगामी 31 मई तक इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर सकता है। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी जल्द ही इसकी औपचारिक घोषणा कर सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों के साथ हुई कल की उच्च स्तरीय बैठक में स्कूल टाइमिंग और साप्ताहिक शेड्यूल की विस्तृत समीक्षा की गई। इस समीक्षा के बाद शनिवार को हाफ डे के प्रस्ताव पर सैद्धांतिक सहमति बन गई है। विभाग अब इसके क्रियान्वयन और नए टाइम टेबल के ड्राफ्ट को अंतिम रूप देने में जुटा है।
शिक्षकों और छात्रों को मिलेगी बड़ी राहत बिहार के करीब पौने 6 लाख सरकारी शिक्षकों और करोड़ों छात्र-छात्राओं के लिए यह फैसला बेहद सुकून देने वाला साबित होगा। दरअसल, पिछले कुछ समय से लागू की गई कड़क व्यवस्था और लंबे वर्किंग आवर्स के कारण शिक्षकों पर मानसिक और शारीरिक दबाव काफी बढ़ गया था। राज्यभर के शिक्षक संगठन लंबे समय से शनिवार को हाफ डे की व्यवस्था बहाल करने की मांग उठा रहे थे। क्यों उठ रही थी हाफ डे की मांग? साप्ताहिक समीक्षा का वक्त: शनिवार को हाफ डे होने से शिक्षकों को साप्ताहिक मूल्यांकन, कॉपियों की जांच और अगले हफ्ते की पाठ योजना (Lesson Plan) तैयार करने का अतिरिक्त समय मिलेगा। बच्चों का मानसिक विकास: 6 दिन लगातार पूरे समय स्कूल चलने से छोटे बच्चों में थकान और तनाव देखा जा रहा था। शनिवार को आधे दिन की छुट्टी से उन्हें सह-शैक्षणिक गतिविधियों और आराम के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा। शिक्षकों की सहूलियत: दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में तैनात शिक्षकों को अपने घर लौटने और जरूरी प्रशासनिक या निजी कार्यों को निपटाने में आसानी होगी।
31 मई तक आधिकारिक मुहर की उम्मीद शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नए सत्र और वर्तमान मौसम की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इस व्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाया जा रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि 31 मई तक इस फैसले पर आधिकारिक मुहर लग जाएगी और जून महीने से राज्य के सभी प्राथमिक, मध्य और माध्यमिक विद्यालयों में शनिवार को आधे दिन की पढ़ाई का नया शेड्यूल पूरी तरह प्रभावी हो जाएगा।
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