तिरुवनंतपुरम2 मिनट पहले
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कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भारत-अमेरिका में टैरिफ को लेकर बढ़ते विवाद के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जवाब की सराहना की। थरूर ने केरल के तिरुवनंतपुरम में न्यूज एजेंसी ANI से कहा- मैं इस नए लहजे का एहतियात के साथ स्वागत करता हूं।
थरूर ने कहा- प्रधानमंत्री मोदी ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी बुनियादी संबंधों के महत्व पर जोर दिया, जो एक व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी है। दोनों ने जो मैसेज दिया, हमारे लिए वह बहुत जरूरी है। मैं इस नए लहजे का स्वागत करता हूं।
कांग्रेस सांसद ने आगे कहा- मुझे नहीं लगता कि हम 50% टैरिफ या राष्ट्रपति और उनके स्टाफ ने जो अपमान किया है, उसे पूरी तरह से भूल सकते हैं। ट्रम्प का स्वभाव काफी चंचल है, और उन्होंने जो कुछ कहा है, उससे हमारे देश को चोट पहुंचा है। देश का अपमान हुआ है।
ट्रम्प भारत के खिलाफ बयान देकर पलटे, मोदी ने जवाब दिया अमेरिकी राष्ट्रपति ने 5 सितंबर को सुबह करीब 6 बजे अपने सोशल मीडिया ट्रुथ पर लिखा था, ‘ऐसा लगता है कि हमने भारत और रूस को चीन के हाथों खो दिया है। उम्मीद है उनका भविष्य अच्छा होगा।’
इसके बाद, वे करीब 12 घंटों के अंदर ही बैकफुट पर चले गए। उन्होंने शाम 6-7 बजे के बीच व्हाइट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक सवाल पर कहा- ‘मैं हमेशा मोदी का दोस्त रहूंगा। भारत के साथ संबंधों को रीसेट करने के लिए हमेशा तैयार हूं।’
अगले दिन, 6 सितंबर को सुबह 9:45 बजे PM मोदी ने ट्रम्प को X पर जवाब दिया। उन्होंने ट्रम्प के बयान को शेयर करते हुए लिखा- राष्ट्रपति ट्रम्प की भावनाओं और हमारे संबंधों को लेकर उनके विचारों की तहे दिल से सराहना करता हूं और उनका पूर्ण समर्थन करता हूं। भारत-अमेरिका के बीच एक पॉजिटिव और दूरदर्शी रणनीतिक साझेदारी है।
पूर्व अमेरिकी NSA बोले थे- ट्रम्प-मोदी की दोस्ती खत्म

ट्रम्प की टिप्पणी से पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने 4 सितंबर को कहा था कि ट्रम्प और PM नरेंद्र मोदी के बीच पहले की खास दोस्ती अब खत्म हो चुकी है। बोल्टन ने कहा- ‘इसे अब ठीक नहीं किया जा सकता, क्योंकि स्थिति बहुत खराब हो चुकी है।’
ब्रिटिश मीडिया LBC को दिए इंटरव्यू में बोल्टन ने ट्रम्प की नीति की आलोचना करते हुए कहा था, ‘व्हाइट हाउस ने अमेरिका-भारत संबंधों को दशकों पीछे धकेल दिया, जिससे मोदी रूस और चीन के करीब आ गए। चीन ने खुद को अमेरिका और ट्रम्प के विकल्प के रूप में पेश किया है।’
