18 दिसंबर 2025, रात करीब 9 बजे का वक्त था। बांग्लादेश के मैमनसिंह जिले में भीड़ ने गारमेंट फैक्ट्री में काम करने वाले दीपू दास को पकड़ लिया। ईशनिंदा का इल्जाम लगाकर भीड़ ने उसे पीट-पीटकर मार डाला। इसके बाद दीपू के शव को फैक्ट्री से कुछ दूर ले गए और
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बांग्लादेश में दीपू की हत्या का असर पश्चिम बंगाल में दिख रहा है। घटना के विरोध में यहां जगह-जगह बंगाली हिंदुओं ने प्रदर्शन किया। सिर्फ कोलकाता में ही करीब 10 हजार लोग सड़कों पर उतरे। लोगों का कहना है कि वो दिन दूर नहीं, जब पश्चिम बंगाल में भी बांग्लादेश जैसे हालात होंगे।
23 दिसंबर को हुए प्रदर्शन में शामिल 74 साल के नकुल भट्टाचार्जी कहते हैं, ‘बांग्लादेश में दीपू दास को जैसे जिंदा जलाया गया, उससे खराब भला क्या हो सकता है। ये सब मेरे बेटे के साथ भी हो सकता है। ममता बनर्जी के राज में भी यही हो रहा है। बांग्लादेश में जैसे हिंदुओं को टॉर्चर किया जा रहा है, यहां हालात उससे अलग नहीं हैं। पश्चिम बंगाल, बांग्लादेश का डुप्लीकेट बन गया है।‘
वहीं 29 साल की संगीता आरोप लगाती हैं कि ममता दीदी बांग्लादेशियों और जिहादियों को पश्चिम बंगाल लेकर आ रही हैं। इससे यहां का माहौल भी खराब हो रहा। इस पर रोक लगनी चाहिए।
23 दिसंबर को कोलकाता में हुए विरोध प्रदर्शन की फोटो, जिसमें बांग्लादेश में हुई दीपू दास की हत्या के विरोध में लोगों ने प्रदर्शन किया।
पश्चिम बंगाल में इसी साल मार्च-अप्रैल में विधानसभा चुनाव होने हैं। बांग्लादेश में हुई हिंसा और हिंदुओं को टारगेट किए जाने का चुनाव में क्या असर होगा, ये समझने के लिए दैनिक भास्कर की टीम कोलकाता पहुंची।
पहले प्रदर्शन के दौरान अरेस्ट लोगों की बात… ‘परमिशन लेकर प्रदर्शन, फिर भी रोका, पुलिस वाले जिहादी हुए’ कोलकाता में हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल रहीं नीति भट्टाचार्जी कहती हैं, ‘दीपू दास को बहुत बुरी तरह मारा गया। वो हिंदू था, हम भी हिंदू हैं। हमें उसकी मौत का अफसोस है, इसलिए प्रदर्शन कर रहे हैं। कोलकाता पुलिस हमें ये भी नहीं करने दे रही। पुलिसवाले हमें पकड़कर मारने लगे। हमारे एक साथी की नाक तोड़ दी।‘
‘महिलाओं के बाल खींचे और उन्हें पकड़कर जेल में डाला गया, जबकि हम शांति से विरोध कर रहे थे। हम बांग्लादेश हाई कमिशनर को वापस भेजना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने बैरिकेड लगाकर हमें रोक दिया। हमने फिर कोशिश की, तो लाठीचार्ज कर 19 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस वाले जिहादी हो गए हैं।‘
परमिशन के बारे में पूछने पर नीति कहती हैं, ‘हिंदू जागरण मंच ने प्रदर्शन के लिए प्रशासन को मेल करके परमिशन मांगी थी। फिर भी हमें रोका गया। दोपहर 3 बजे ही हमें हिरासत में ले लिया गया। गिरफ्तार 19 लोगों में 7 महिलाएं थीं। हम पूछते रहे कि अब आगे क्या कार्रवाई होगी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अचानक रात 2 बजे हमें मेडिकल के लिए ले जाने लगे। हम डर की वजह से नहीं गए।‘
‘इसके बाद पुलिस वाले हमारे फोन का पासवर्ड मांगने लगे। हमने मना किया तो शर्त रखी कि जो पासवर्ड बताएगा, घर पर सिर्फ उसी की बात कराएंगे। हममें से 3 महिलाओं ने बच्चों से बात करने के लिए पासवर्ड बता दिया। इसके बाद भी उन्हें फोन नहीं दिया गया। पुलिस ने थाने में लगे लैंडलाइन से उनकी घर पर बात कराई। अब भी हमारा फोन पुलिस के पास है।‘

‘हम अपराधी नहीं, फिर हत्या की कोशिश का केस क्यों’ कोलकाता की रहने वाली प्रयोनीती पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहती हैं, ‘पुलिस ने हम पर ऐसे लाठियां बरसाईं, जैसे हम अपराधी हैं। हम पर BNS की धारा 109 के तहत FIR दर्ज कर अटेम्प्ट टू मर्डर का केस लगा दिया। गैरकानूनी हथियार रखने के भी चार्ज लगाए, जबकि मेरी जेब में सिर्फ एक पेन था।‘
नकुल भी यही आरोप लगाते हैं। वे कहते हैं, ‘हम सिर्फ प्रदर्शन करने गए थे, लेकिन हमें जेल में डाल दिया। 3 से 4 दिन जेल में ही रखा। बहुत टॉर्चर किया। मेरे सामने ही एक लड़की को पुलिस वालों ने इतना पीटा कि उसे देखकर मैं डर गया। हमने तो कोई चोरी-मर्डर भी नहीं किया। फिर हमें ऐसा टॉर्चर क्यों किया गया।’
प्रदर्शन का हिस्सा रहे मोहम्मद सरफराज बताते हैं, ‘लाल बाजार हेडक्वार्टर के कुछ पुलिसवाले हमसे हमदर्दी रखते थे। उन्होंने कहा कि आप लोगों पर कई गलत इल्जाम लगे हैं। हम मजबूर हैं, हम पर ऊपर से दबाव है। कुल 8 धाराओं में केस हुआ, लेकिन सिर्फ सरकारी काम में बाधा डालने के अलावा सब धाराएं गलत लगाई गई हैं।‘
DCP बोले- प्रदर्शन में पुलिसवाले जख्मी हुए, इसलिए 8 धाराएं लगाईं इस मामले पर कोलकाता पुलिस के साउथ ईस्ट डिवीजन के DCP डॉ. भोलानाथ पांडे ने बताया, ‘प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मुकदमा चल रहा है। प्रदर्शन के दौरान कुछ पुलिसवाले जख्मी भी हुए हैं। उसी के आधार पर धाराएं लगाई गई हैं। प्रदर्शन के आयोजकों ने बयान दे दिया है और इन्वेस्टिगेशन भी जारी है। उसी के आधार पर चार्जशीट तैयार की जाएगी। मामले में BNS के तहत कुल 8 धाराएं लगाई गई हैं।’

अब जानिए पॉलिटिकल पार्टियां क्या कह रहीं… TMC: बांग्लादेश की वजह से नहीं, SIR के कारण हिंदू खतरे में बांग्लादेश में हिंसा के बाद पश्चिम बंगाल में बने माहौल को लेकर हमने TMC प्रवक्ता प्रदीप्त मुखर्जी से बात की। वे कहते हैं, ‘BJP चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल में ऐसा नैरेटिव तैयार करना चाहती है कि TMC सरकार यहां रोहिंग्याओं और बांग्लादेशियों को बसा रही है। वे TMC के लिए वोट करते हैं और बदले में उन्हें प्रोटेक्शन मिलता है। ऐसा बिल्कुल भी नहीं है।’
’ये इंटरनेशनल डिप्लोमैटिक मुद्दा है, इसे लेकर TMC सरकार हमेशा से केंद्र के साथ है। देश की इंटीग्रिटी और यूनिटी को लेकर जो काम किया जाएगा, हम उसमें साथ देंगे। पार्टी के जनरल सेक्रेटरी अभिषेक बनर्जी पहले भी कह चुके हैं कि हम देश की अखंडता के लिए काम करेंगे।’
’BJP लीडर शुभेंदु अधिकारी जानबूझकर गलत नैरेटिव तैयार करना चाहते हैं कि बंगाल में हिंदू खतरे में है। वे गलत खबर फैलाते हैं, जैसे एक फिल्म में मिथुन चक्रवर्ती का डायलॉग है- आमी खबर देखी ना, खबर सुनी ना, आमी खुद ही खबर तैयारी करी। हम ये नैरेटिव तोड़ेंगे और विधानसभा चुनाव में 215 से ज्यादा सीटें जीतेंगे।’
वे आगे कहते हैं, ‘पश्चिम बंगाल में हिंदू खतरे में है, लेकिन वो बांग्लादेशियों की वजह से नहीं बल्कि SIR की वजह से। पश्चिम बंगाल में SIR के नाम पर 58 लाख मतुआ लोगों का नाम वोटर लिस्ट से बाहर हो चुका है। इसमें कोई भी रोहिंग्या या बांग्लादेशी नहीं मिला है।’

BJP: ममता बनर्जी गाजा के लिए बोलती हैं, हिंदुओं के लिए नहीं BJP प्रवक्ता ज्योति चटर्जी का कहना है, ‘बांग्लादेश में बंगाली हिंदुओं की संख्या बहुत कम हो गई है। आने वाले समय में बंगाली हिंदू खत्म हो जाएंगे। दीपू दास की तरह बंगाल के मुर्शिदाबाद में बाप-बेटे को मार दिया। बांग्लादेश और बंगाल दोनों जगह बंगाली हिंदुओं की भाषा और कल्चर खत्म किया जा रहा है।‘
‘मुख्यमंत्री ममता बनर्जी गाजा के लिए बोलती हैं, लेकिन हिंदुओं के लिए आवाज नहीं उठातीं। आने वाले वक्त में हम सब दीपू दास बन जाएंगे। हमारी संख्या घट रही है। जहां संख्या घटी, वहां हम पीड़ित हुए। हिंदू जाग रहा है और ये चुनाव का सवाल नहीं है। ये बंगाली हिंदुओं के अस्तित्व का सवाल है।‘
पश्चिम बंगाल में बांग्लादेशी मुस्लिम आ रहे हैं। डेमोग्राफी बदल रही है। यहां बांग्लादेशी मुस्लिमों के लिए अचानक गुलशन कॉलोनी बन गई। मुस्लिमों का फर्टिलिटी रेट ज्यादा है। वो पर्सेंटेज में बढ़ रहे है और बंगाली हिंदू की संख्या घट रही है।

‘बांग्लादेश में बंटवारे के वक्त वहां 22% और भारत में 79.2% बंगाली हिंदू थे। अब बांग्लादेश में 6% और 2011 की जनगणना के अनुसार बंगाल में 70.5% हैं। राज्य में बंगाली हिंदू मेजॉरिटी में हैं, लेकिन जिन जगहों पर माइनॉरिटी में हैं, वहां प्रताड़ित किए जा रहे हैं। मुर्शिदाबाद में बंगाली हिंदू पुलिस को कॉल करते हैं, तो पुलिस टाइम पर आती ही नहीं है।’
’अगर यहां ममता बनर्जी फिर चुनकर आईं तो बंगाली हिंदू नहीं बचेंगे। पूरे बंगाल में मुर्शिदाबाद जैसे हालत हो जाएंगे। यहां चिकन नेक है और ये बॉर्डर स्टेट भी है। ऐसे में देश की सिक्योरिटी के लिए पश्चिम बंगाल में BJP का आना जरूरी है। अगर ये गलत हाथों में गया तो देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है।’

एक्सपर्ट बोले- टारगेट पर अल्पसंख्यक, हिंदू वोटर एकजुट हो रहा पॉलिटिकल एक्सपर्ट मैनाक पुटाटुंडा कहते हैं, ‘पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव मार्च 2026 के आसपास हो सकते हैं। इसे लेकर यहां सियासी हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। TMC लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है। BJP भी सत्ता पाने के लिए जोर लगा रही है। बांग्लादेश में हो रही हिंसा और घटनाओं का असर भी पश्चिम बंगाल की राजनीति पर पड़ रहा है।‘
‘बांग्लादेश में दीपू दास की हत्या दुर्भाग्यपूर्ण है। बांग्लादेश में कुछ राजनीतिक पार्टियां अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ हमलों को सीधे तौर पर न सही, लेकिन बढ़ावा देती दिख रही हैं। इन सबके नतीजे पश्चिम बंगाल में भी दिखेंगे। यहां धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण होना तय है। बांग्लादेश में हो रही घटनाओं की वजह से पश्चिम बंगाल में हिंदू वोटर एकजुट हो सकते हैं।‘
यदि पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनावों के वोटिंग के आंकड़ों का एनालिसिस करें, तो साफ होता है कि पश्चिम बंगाल में दो प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच वोट पर्सेंट का अंतर बहुत ज्यादा नहीं है। ऐसी स्थिति में अगर BJP के कोर वोट बैंक में महज 5 से 7% का भी इजाफा होता है, तो सत्ता संतुलन प्रभावित हो सकता है।

‘अल्पसंख्यकों की सुरक्षा अहम, ये सियासी मुद्दा नहीं’ पूर्व TMC लीडर और जादवपुर यूनिवर्सिटी के VC ओमप्रकाश मिश्रा कहते हैं, ‘भारत, बांग्लादेश, पाकिस्तान ही नहीं, दुनिया के कई देशों में अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न होता रहा है। बांग्लादेश में जो दीपू दास के साथ हुआ, वो बहुत शर्मनाक है। इन घटनाओं का बांग्लादेश की सिविल सोसाइटी भी खुलकर विरोध कर रही है और भारत में भी विरोध किया गया। भारत हो या बांग्लादेश, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा अहम मुद्दा है।‘
पश्चिम बंगाल में हिंदू की सुरक्षा के बारे में पूछने पर वे कहते हैं, ‘पश्चिम बंगाल में सभी मिल-जुलकर रहते हैं। यहां किसी तरह की कम्युनिटी के लिए असुरक्षा की स्थिति नहीं है। ये बात बार-बार साबित हो चुकी है। कुछ लोग इसे मुद्दा उठाकर सियासी फायदा लेने की कोशिश करते हैं।‘
‘बाकी राज्यों में ऐसी राजनीति करके भले फायदा मिल सकता है, लेकिन पश्चिम बंगाल में ये नहीं चल पाएगी। यहां धर्म के आधार पर राजनीति करने वाला व्यक्ति या पार्टी खुद ही पिछड़ जाएगी। BJP समर्थक ये दावा करते हैं कि पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी या रोहिंग्या रह रहे हैं। अगर ऐसा है तो उन्हें इसका जवाब देश के गृह मंत्री अमित शाह से मांगना चाहिए क्योंकि देश की सुरक्षा उनकी जिम्मेदारी है।’

‘बांग्लादेश में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे, इसका असर पश्चिम बंगाल में पड़ेगा’ BJP के राज्यसभा सदस्य स्वपन दासगुप्ता कहते हैं, ‘उस्मान हादी की मौत के बाद वहां के स्टूडेंट रेवोल्यूशनरी सरकार बनाना चाहते थे। वहां हिंदुओं को टारगेट किया जा रहा है। बांग्लादेश का माहौल 1971 के मुक्ति संग्राम के उलट है। अभी वहां पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लग रहे हैं। इसका असर पश्चिम बंगाल पर तो पड़ेगा ही।‘
‘बांग्लादेश में हुए हिंदुओं के कत्लेआम का बंगाल से सीधा तो नहीं, लेकिन इमोशनली कनेक्शन है। बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा के लिए कुछ करना चाहिए। BJP ये मुद्दा पहले से उठा रही है। SIR में रोहिंग्याओं और बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ पहले से माहौल बना हुआ है। इसके खिलाफ भी हम 10-15 साल से लगातार आवाज उठा रहे हैं। ये दोनों हमारे लिए भी अहम मुद्दे हैं।‘
‘पश्चिम बंगाल के हिंदुओं में इन सबको लेकर इनसिक्योरिटी है। लोग मानते हैं कि ये सब ममता बनर्जी के तुष्टीकरण के लिए हुआ है। कोई मुद्दा बनाया नहीं जा सकता, जब तक वो जनता के दिल से नहीं आता। पिछले पांच साल में हिंदुओं में इनसिक्योरिटी बढ़ी है, जिसका असर आने वाले चुनाव में दिखेगा।’ ………………….
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‘जब नीतीश कुमार ने नकाब खींचा, तो समझ नहीं आया कौन, कहां से मुझे खींच लेगा। वहां सब हंसने लगे थे। इतना कुछ पहले हो गया था, न जाने और क्या करते। मैं जल्दी-जल्दी वहां से निकली, ताकि मुझे कोई देख न ले। थोड़ी देर बाद दोबारा वहां गई अपॉइंटमेंट लेटर फाड़कर फेंकने, लेकिन तब तक सब जा चुके थे।’ नुसरत परवीन ने ये आपबीती भाई बबलू को सुनाई थी। पढ़िए पूरी खबर…
