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छत्तीसगढ़ के धमतरी में एक अनोखा विवाह संपन्न हुआ। शहर के जालमपुर वार्ड में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के छठे दिन रुक्मिणी विवाह प्रसंग के दौरान एक युवक-युवती ने पारंपरिक रीति-रिवाजों से शादी की। इस विवाह में वार्डवासी साक्षी बने और नवदंपति को आशीर्वाद दिया। जालमपुर वार्ड में वार्डवासियों द्वारा श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह का आयोजन किया जा रहा है। इसमें धमतरी निवासी कथा वाचिका देवी भूमिका श्रोताओं को कथा सुना रही हैं। कथा के छठे दिन रुक्मिणी विवाह की कथा सुनाई गई, जिसे सनातन धर्म में दाम्पत्य जीवन के लिए शुभ माना जाता है। विधि-विधान से मंत्रोच्चार के साथ हुई शादी इस विशेष अवसर पर वार्डवासियों ने कथा स्थल को विवाह मंडप की तरह सजाया। छत्तीसगढ़ी परंपरा के अनुसार मड़वा, चुलमाटी, तेल हल्दी और मायन जैसी रस्में निभाई गईं। बारात भी निकाली गई, जिसके मंडप पहुंचने पर श्रोता भजनों और विवाह गीतों पर खूब थिरके। कथा में भगवान कृष्ण और रुक्मिणी का स्वरूप धारण किए हुए पात्रों की पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद रुक्मिणी विवाह प्रसंग के दिन ग्राम बेलर के प्रतीक देवांगन और ग्राम अछोटा की माधुरी देवांगन का विवाह संपन्न हुआ। पंडित ने विधि-विधान से मंत्रोच्चार के साथ फेरे करवाए और मांग भरने की रस्म पूरी की गई। वार्डवासियों ने बारी-बारी से नवदंपति को आशीर्वाद प्रदान किया। जालमपुर वार्ड के वार्ड वासी भागवत देवांगन ने कहा विवाह तीन दिनों का होता है, लेकिन जालमपुर वार्ड में चल रहे भागवत कथा के दौरान रुख मणि विवाह प्रसंग के दिन एक ही दिन में पूरा विधि विधान के साथ दूल्हा दुल्हन का रस्म निभाया गया है। उन्होंने यह भी बताया की भागवत कथा के छठवें दिन उद्धव प्रसंग के साथ-साथ रखमणि विवाह का भी आयोजन किया गया था। और दाम्पत्य जीवन में बंधे दोनों दूल्हा दुल्हन को आशीर्वाद देने के लिए वार्ड वासी सामने आये है। उन्होंने यह भी बताया कि अभी के समय में लोग खूब खर्च कर विवाह करते हैं यही वजह है कि दोनों दांपत्य जीवन जालमपुर वार्ड में चल रहे भागवत कथा के छठवें दिन रुख मणि विवाह प्रसंग के दौरान ने विवाह रचाई है।और ऐसा ही विवाह सभी को करनी चाहिए।
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