यूपी के बरेली जनपद का बिशारतगंज इलाका इस समय सुर्खियों में है। गांव के सभी हिंदू परिवार पलायन को मजबूर है। ग्रामीणों ने अपने घरों के बाहर चौक से लिख दिया है कि ये मकान बिकाऊ है। हिंदू समुदाय के लोगों का कहना है कि मुस्लिम समुदाय के लोग उन्हें परेशान करते हैं और घरों में इकट्ठे होकर सामूहिक नमाज अदा करते हैं। इतना ही नहीं हिंदुओं के साथ में गाली गलौज करते हैं और उन पर गंदा पानी भी डालते हैं। हिंदुओं ने फायरिंग का भी आरोप लगाया है। दर्जनों घरों की दीवारों पर चौक से लिखा ‘मकान बिकाऊ है’ करीब 1200 वोटरों वाले इस गांव में, जहाँ 65% हिंदू और 35% मुस्लिम आबादी रहती है, अचानक आई इस दरार ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। हिंदू समुदाय का आरोप है कि उन्हें अपने ही घर में बेगाना महसूस कराया जा रहा है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे इबादत के अधिकार से जोड़कर देख रहा है। हिंदुओं के कहना है कि हर जुमा को लोग इक्कठे होकर नमाज अदा करते है। जबकि पुलिस प्रशासन की ओर से नमाज के लिए मना किया गया है। एक महीने से सुलग रही तनाव की चिंगारी मोहम्मदगंज गांव में विवाद की शुरुआत तब हुई जब हिंदू पक्ष ने आरोप लगाया कि मुस्लिम समुदाय के लोग घरों में बड़ी संख्या में एकत्र होकर ‘सामूहिक नमाज’ पढ़ते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में न तो कोई मस्जिद है और न ही मंदिर, ऐसे में घरों को इबादतगाह में बदलना एक नई परंपरा की शुरुआत है जिसका वे विरोध कर रहे हैं। एक महीने पहले 16 जनवरी को जब घर में सामूहिक रूप से3 नमाज अदा करने का वीडियो वायरल हुआ था तब पुलिस ने मामला शांत करवा दिया था। और जिन लोगों ने नमाज अदा की थी उनका चालान कर दिया था। अब पिछले शुक्रवार को फिर से सामूहिक नमाज पढ़ी गई, जा पर हिंदू समुदाय में जबरदस्त आक्रोश है। गांव की महिलाओं ने बताया, “बात सिर्फ नमाज की नहीं है। नमाज के बहाने भीड़ जुटती है और फिर हमारे साथ गाली-गलौज की जाती है। हमें डराया जाता है कि अभी तो कुछ नहीं, हमारी सरकार आने दो, फिर तुम सबको यहाँ से खदेड़ देंगे।” हिंदुओं का आरोप यह भी है कि विरोध करने पर मुस्लिम पक्ष की ओर से फायरिंग भी की गई, जिससे पूरे गांव में दहशत फैल गई। तनाव इतना बढ़ा कि हिंदू परिवारों ने एकजुट होकर अपने घरों के बाहर ‘मकान बिकाऊ है’ लिख दिया है। देखते ही देखते पूरा गांव ‘पलायन’ की सुर्खियों में आ गया। सूचना मिलते ही हिंदू संगठनों के पदाधिकारी भी गांव पहुँच गए, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया। बजरंग दल के लोगों का कहना है कि ई तरह से सामूहिक नमाज अदा करना गलत है। हालांकि, पुलिस ने स्थिति को बिगड़ने से पहले ही संभालने की कोशिश की। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस ने सुबह गांव पहुँचकर मकान बिकाऊ है को हटवा दिया। मुस्लिम पक्ष का तर्क: ‘इबादत करें तो कहाँ करें?’ दूसरी ओर, मुस्लिम समुदाय के लोगों का तर्क बिल्कुल अलग है। उनका कहना है कि गांव में इबादत के लिए कोई सार्वजनिक स्थान या मस्जिद नहीं है। ऐसे में अपने निजी घरों में खुदा की इबादत करना कोई अपराध नहीं है। मुस्लिम पक्ष के अनुसार, हिंदू समुदाय बेवजह छोटी बातों को तूल दे रहा है और माहौल खराब करने की कोशिश कर रहा है। फायरिंग के आरोपों को उन्होंने पूरी तरह निराधार और साजिश बताया है। गांव म पुलिस तैनात वर्तमान में गांव पुलिस तैनात हैं। बिशारतगंज थाना प्रभारी (SO) सतीश कुमार ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा, “गांव में सामूहिक नमाज को लेकर विवाद हुआ था। जिन लोगों ने बिना अनुमति सामूहिक नमाज पढ़ी थी, उन्हें सख्त हिदायत देकर समझा दिया गया है। फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और शांति व्यवस्था कायम करने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है। किसी को भी कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी।” पलायन का डर या प्रेशर पॉलिटिक्स? मोहम्मदगंज की इस ग्राउंड रिपोर्ट में एक बात साफ है कि दोनों समुदायों के बीच विश्वास की कमी गहरी हो चुकी है। 1200 की आबादी वाले इस गांव में जहाँ कल तक लोग मिल-जुलकर रहते थे, आज वहां पर तनाव है। ‘मकान बिकाऊ है’ लिखना क्या वाकई मजबूरी है या प्रशासन पर दबाव बनाने की रणनीति, यह जांच का विषय है, लेकिन बरेली के इस गांव की शांति फिलहाल खाकी के पहरे में है।
Source link
