बिहार में जमीनी स्तर पर खेल गतिविधियों को मजबूत करने और ग्रामीण प्रतिभाओं को निखारने के लिए खेल विभाग ने एक अहम फैसला लिया है। अब राज्य भर की ग्राम पंचायतों और नगर पंचायतों के खेल क्लबों के साथ-साथ मैदानों को सीधे सरकारी शारीरिक शिक्षकों (फिजिकल टीचर्स) से जोड़ा जाएगा। खेल विभाग के सचिव महेंद्र कुमार ने विभागीय कार्यों को लेकर अधिकारियों को इस टैगिंग व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ लागू करने का निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की ओर से बनाए गए खेल मैदानों, स्टेडियमों और विभागीय योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब प्रशिक्षित मानव संसाधन सीधे स्थानीय खिलाड़ियों और खेल क्लबों से जुड़कर नियमित अभ्यास संचालित करें। इस नई व्यवस्था के तहत ग्राम पंचायत और नगर पंचायत स्तर पर निर्वाचित खेल क्लबों, जिला खेल भवनों, पंचायत स्तरीय खेल मैदानों और प्रखंड स्तरीय आउटडोर स्टेडियमों को निकटतम सरकारी शारीरिक शिक्षा प्रशिक्षकों के साथ व्यवस्थित रूप से जोड़ा जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्थानीय स्तर पर खिलाड़ियों को नियमित मार्गदर्शन, वैज्ञानिक प्रशिक्षण और सही निगरानी उपलब्ध हो सके।
निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर निर्णय इसके अलावा जिला स्तर पर खेल सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ को सक्रिय करने की भी गहन समीक्षा की गई। सभी जिला खेल पदाधिकारियों (DSO) की ओर से भेजी गई निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर 4 से 5 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को तत्काल प्रभाव से शुरू करने का निर्णय लिया गया है। इन केंद्रों में खिलाड़ियों के लिए निशुल्क आवास और उच्च स्तरीय प्रशिक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। प्रत्येक केंद्र को किसी एक विशिष्ट खेल विधा (Sports Discipline) के लिए विशेष रूप से विकसित किया जाएगा। हर साल दो हाफ-मैराथन का आयोजन होगा समीक्षा में यह भी तय किया गया कि सरकार की ओर से संचालित ‘एकलव्य केंद्रों’ की तर्ज पर काम कर रहे निजी खेल संस्थानों को भी अब राज्य सरकार द्वारा प्रोत्साहित किया जाएगा। गुणवत्तापूर्ण खेल प्रशिक्षण व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए खेल विभाग जल्द ही ऐसे निजी संस्थानों के प्रत्यायन (Accreditation) के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश तैयार करेगा। वहीं, आम जनमानस में खेल संस्कृति को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने हर साल दो हाफ-मैराथन आयोजित करने का भी निर्णय लिया है। ये आयोजन प्रत्येक वर्ष मार्च और नवंबर महीने में राजगीर और वाल्मीकिनगर में किए जाएंगे। इस शृंखला की पहली हाफ-मैराथन इसी साल नवंबर माह में आयोजित की जाएगी। खेलों को एक नई दिशा मिलेगी सचिव महेंद्र कुमार ने विश्वास जताया कि खेल संसाधनों के बेहतर उपयोग और प्रशिक्षकों की इस प्रभावी टैगिंग से राज्य में खेलों को एक नई दिशा मिलेगी और भविष्य के चैंपियन तैयार करने में काफी मदद मिलेगी।
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