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नेपाल की Gen-Z ने गेमिंग-ऐप के जरिए चुना प्रधानमंत्री: डिस्कॉर्ड पर ‘यूथ अगेंस्ट करप्शन’ चैनल शुरू किया; 10 हजार लोगों ने वोट दिया

नेपाल की Gen-Z ने गेमिंग-ऐप के जरिए चुना प्रधानमंत्री:  डिस्कॉर्ड पर ‘यूथ अगेंस्ट करप्शन’ चैनल शुरू किया; 10 हजार लोगों ने वोट दिया


काठमांडू5 मिनट पहले

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नेपाल में भ्रष्टाचार, नेपोटिज्म और सोशल मीडिया बैन के खिलाफ Gen-Z आंदोलन के बाद, हजारों युवाओं ने अमेरिकी मैसेजिंग ऐप डिस्कॉर्ड पर वर्चुअल पोल पर वोटिंग के जरिए देश का नया PM चुना। यह पहली बार है जब किसी लोकतांत्रिक देश में इस तरह से नेता चुना गया हो।

नेपाल में हुई इस क्रांति को युवा-नेतृत्व वाले डिजिटल लोकतंत्र की ओर पहला कदम माना जा रहा है। इस ऑनलाइन हडल का आयोजन नेपाल की युवा संगठन ‘हामी नेपाल’ ने किया था। यह एक Gen-Z ग्रुप हैं, जिसमें 160,000 से अधिक सदस्य हैं।

हामी नेपाल ने डिस्कॉर्ड पर ‘यूथ अगेंस्ट करप्शन’ चैनल शुरू किया, जिसमें 10 हजार से ज्यादा लोग शामिल हुए। विदेशों में रहने वाले नेपाली भी इस बहस में शामिल हुए। जब ऐप के सर्वर में लोड बढ़ने के कारण जगह कम पड़ी, तो यूट्यूब पर लाइव स्ट्रीमिंग शुरू की गई, जिसमें 6 हजार और लोग जुड़े।

डिस्कॉर्ड पर हामी नेपाल के 'यूथ अगेंस्ट करप्शन' चैनल पर 10 हजार से ज्यादा लोगों ने वोट दिया।

डिस्कॉर्ड पर हामी नेपाल के ‘यूथ अगेंस्ट करप्शन’ चैनल पर 10 हजार से ज्यादा लोगों ने वोट दिया।

डिस्कॉर्ड पर वोटिंग के जरिए पांच नाम फाइनल किए

युवाओं ने डिस्कॉर्ड पर वोटिंग के जरिए पांच नामों को चुना, जिनमें सामाजिक कार्यकर्ता हर्का संपंग, महाबीर पुन, सागर ढकाल, रास्त्र बिमोचन तिमल्सिना और सुशीला कार्की शामिल थे।

काठमांडू के मेयर और रैपर बालेन शाह का नाम भी चर्चा में था, लेकिन वह उपलब्ध नहीं हुए। बाद में उन्होंने सोशल मीडिया पर कार्की का समर्थन किया।

वोटिंग में शामिल Gen-Z बोले- मिलकर हल निकाला

25 साल की लॉ ग्रेजुएट रेजिना बेसनेट, जो उस समय डिस्कॉर्ड बहस में शामिल हुई थीं, ने कहा, ‘लोग आगे बढ़ते हुए सीख रहे थे। हममें से कई लोग नहीं जानते थे कि संसद भंग करने या अंतरिम सरकार बनाने का क्या मतलब होता है। लेकिन हम सवाल पूछ रहे थे, विशेषज्ञों से जवाब ले रहे थे और मिलकर इसका हल निकालने की कोशिश कर रहे थे।’

26 साल के प्रदर्शनकारी विशाल सपकोटा ने एबीसी ऑस्ट्रेलिया को बताया, ‘यह विरोध प्रदर्शन था – कोई संगठित आंदोलन नहीं।’ उन्होंने आगे कहा, ‘सच कहूx तो, प्रदर्शनकारियों को उम्मीद नहीं थी कि सरकार सिर्फ दो दिनों में गिर जाएगी, इसलिए वे इस तेज सफलता के लिए कुछ हद तक तैयार नहीं थे।’

पत्रकार प्रणय राणा ने कहा कि डिस्कॉर्ड जैसे प्लेटफॉर्म ने युवाओं को खुलकर बोलने का मौका दिया, लेकिन फर्जी खातों और गलत सूचनाओं का खतरा भी रहा। प्रदर्शनकारी लीजर ने ‘फैक्ट चेक’ सब-रूम बनाकर फर्जी खबरों को रोकने की कोशिश की। कुछ लोगों ने राजशाही की वापसी की मांग भी उठाई, लेकिन यह अल्पमत में रही।

सर्वर पर आम सहमति से सुशीला को Gen-Z ने चुना

10 सितंबर तक, सर्वर पर आम सहमति बनी। नेपाल की पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की को अगला नेता चुना गया। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, कार्की के 50% मतों तक पहुंचने से पहले 7,713 वोट पड़े।

इसके बाद सुशीला का नाम PM पद के लिए फाइनल किया गया। इन्हें 12 सितंबर को राष्ट्रपति ने शपथ दिलाई थी। वे 220 सालों के इतिहास में देश की पहली महिला पीएम बनी हैं।

नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने शुक्रवार को सुशीला कार्की को शपथ दिलाई थी।

नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने शुक्रवार को सुशीला कार्की को शपथ दिलाई थी।

चीफ जस्टिस रह चुकी सुशीला

इससे पहले सुशीला नेपाल सुप्रीम कोर्ट की चीफ जस्टिस रह चुकी हैं। वे भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रवैए के लिए जानी जाती हैं। 2017 में जब इन्हें हटाने के लिए प्रचंड सरकार महाभियोग लेकर आई, तो सुशीला के समर्थन में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए थे।

मजबूरन सरकार को अपना फैसला वापस लेना पड़ा था। सुशीला के पति ने 52 साल पहले एक प्लेन हाईजैक किया था जिसकी चर्चा भारत में खूब हुई थी।

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