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जम्मू यूनिवर्सिटी में जिन्ना से जुड़े टॉपिक्स हटाने की सिफारिश: अल्पसंख्यकों का नेता बताया; नए सिलेबस में जिन्ना, सर सैयद और इकबाल को जोड़ा था

जम्मू यूनिवर्सिटी में जिन्ना से जुड़े टॉपिक्स हटाने की सिफारिश:  अल्पसंख्यकों का नेता बताया; नए सिलेबस में जिन्ना, सर सैयद और इकबाल को जोड़ा था


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जम्मू8 घंटे पहलेलेखक: रउफ डार

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जम्मू यूनिवर्सिटी में एमए पॉलिटिकल साइंस के सिलेबस से मोहम्मद अली जिन्ना, सर सैयद अहमद खान और मोहम्मद इकबाल से जुड़े टॉपिक्स हटाने की सिफारिश की गई है।

यह सिफारिश विभागीय मामलों की समिति (DAC) ने की है। अब इस पर अंतिम फैसला 24 मार्च को बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक में होगा। उधर, कांग्रेस का कहना है कि सिलेबस को लेकर विवाद जानबूझकर खड़ा किया जा रहा है।

ABVP के छात्रों ने शनिवार को जिन्ना की तस्वीर और पोस्टर लेकर विरोध प्रदर्शन किया था।

ABVP के छात्रों ने शनिवार को जिन्ना की तस्वीर और पोस्टर लेकर विरोध प्रदर्शन किया था।

सिलेबस में जिन्ना को जोड़ने के बाद हुआ विवाद

पॉलिटिकल साइंस के सिलेबस में ‘माइनॉरिटीज एंड द नेशन’ पेपर के तहत जिन्ना के राजनीतिक विचार शामिल किए गए थे, जिसके बाद विवाद शुरू हुआ।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने शनिवार को यूनिवर्सिटी में प्रदर्शन कर इन टॉपिक्स को हटाने की मांग की थी। संगठन ने कहा कि अकादमिक स्वतंत्रता के नाम पर राष्ट्रीय भावनाओं और ऐतिहासिक तथ्यों की अनदेखी नहीं हो सकती।

ABVP के जम्मू-कश्मीर राज्य सचिव सन्नक श्रीवत्स ने बताया कि पहले जिन्ना का जिक्र ‘टू-नेशन थ्योरी’ के संदर्भ में होता था, जहां उन्हें विभाजन की सोच से जोड़ा जाता था। अब संशोधित सिलेबस में उन्हें ‘माइनॉरिटीज एंड द नेशन’ के तहत अल्पसंख्यकों के नेता के रूप में पेश किया गया है, जिस पर आपत्ति जताई जा रही है।

HOD बोले- अकादमिक दृष्टि से शामिल किए गए टॉपिक्स

पॉलिटिकल साइंस विभाग के अध्यक्ष बलजीत सिंह मान ने कहा कि जिन्ना समेत अन्य विचारकों को अकादमिक दृष्टि से शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे पाठ्यक्रम और UGC मानकों के अनुरूप है। इसका मकसद छात्रों के सामने अलग-अलग विचार रखना है।

हालांकि विवाद के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन ने मामले की जांच के लिए एक कमेटी बनाई थी।

अब यह प्रस्ताव बोर्ड ऑफ स्टडीज को भेजा गया है। जिसकी बैठक 24 मार्च को ऑनलाइन होगी।

अब यह प्रस्ताव बोर्ड ऑफ स्टडीज को भेजा गया है। जिसकी बैठक 24 मार्च को ऑनलाइन होगी।

कांग्रेस नेता बोलीं- विवाद जानबूझकर खड़ा किया जा रहा

कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और JKPCC महासचिव नम्रता शर्मा ने कहा कि सिलेबस को लेकर विवाद जानबूझकर खड़ा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिन्ना, सावरकर और गोलवलकर से जुड़ा यह हिस्सा 2025 में तैयार किए गए ड्राफ्ट सिलेबस में शामिल था, लेकिन 11-12 महीने तक इस पर कोई सवाल नहीं उठा। अब अचानक इसे मुद्दा बनाया जा रहा है।

यह पहला मौका नहीं है जब यूनिवर्सिटी का पॉलिटिकल साइंस विभाग विवाद में आया हो। 2018 में एक प्रोफेसर के वीडियो को लेकर विवाद हुआ था, जिसमें भगत सिंह को आतंकी बताया गया था।

फरवरी 2026 में भी NCERT बुक में विवादित चैप्टर पर विवाद हुआ था

NCERT ने 24 फरवरी को क्लास 8 के स्टूडेंट्स के लिए सोशल साइंस की नई टेक्‍स्‍टबुक जारी की थी। ये किताब एकेडमिक सेशन 2026-27 से स्‍कूलों में पढ़ाई जानी थी। इसका पहला पार्ट जुलाई 2025 में रिलीज किया गया था।

किताब का नाम ‘एक्सप्लोरिंग सोसायटी: इंडिया एंड बियॉन्ड पार्ट 2’ है। इसमें ‘द रोल ऑफ द ज्यूडीशियरी इन अवर सोसायटी’ चैप्टर के अंदर ‘करप्‍शन इन द ज्यूडिशियरी’ का टॉपिक जोड़ा गया था। इसमें कोर्ट की हायरार्की और न्याय तक पहुंच को समझाने से ज्यादा ज्यूडिशियल सिस्टम के सामने आने वाली चुनौतियों जैसे करप्शन और केस बैकलॉग को बताया गया था। विवाद के बाद किताब पर बैन लगा। वहीं CJI ने भी आपत्ति जताई थी। पूरी खबर पढ़ें…

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