जयपुर अब देश का उभरता हुआ शिक्षा हब बन गया है। हजारों छात्र यहां आ रहे हैं। दिल्ली-मुंबई जैसे महानगरों को छोड़कर जयपुर को चुनने की वजह साफ है सुरक्षित, शांत और कम तनाव वाला माहौल। पेरेंट्स को भरोसा है कि यहां उनके बच्चे अच्छे वातावरण में पढ़ सकेंगे और बेहतर करियर बना सकेंगे। आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट पीआर सोढानी ने बताया कि ने जयपुर को हेल्थकेयर शिक्षा का नया केंद्र बनाने में अहम भूमिका निभाई है। यूनिवर्सिटी ने अमेरिका की विश्व प्रसिद्ध जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के साथ MOU साइन कर ग्लोबल MPH प्रोग्राम जयपुर में ही शुरू किया। इससे छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की पढ़ाई मिल रही है। AI के बढ़ते महत्व को देखते हुए स्कूल ऑफ डिजिटल हेल्थ की स्थापना की गई। भारत में पहली बार एमबीए इन हेल्थ केयर एनालिटिक्स लॉन्च किया गया, जिसमें AI, मशीन लर्निंग, बिग डाटा और प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स सिखाए जाते हैं। अन्य प्रमुख कोर्सेस में एमबीए हॉस्पिटल और हेल्थ मैनेजमेंट, फार्मास्युटिकल मैनेजमेंट, डेवलपमेंट मैनेजमेंट और मास्टर्स ऑफ पब्लिक हेल्थ शामिल हैं। ये कोर्स छात्रों को मैनेजरियल भूमिकाओं के लिए तैयार करते हैं। स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए अलग IIHMR फाउंडेशन बनाया गया, जो ट्रेनिंग, इनक्यूबेशन और एंटरप्रेन्योरशिप सपोर्ट देता है। AI को कोर्सेस में पूरी तरह शामिल किया गया है ताकि हेल्थकेयर सेक्टर के भविष्य के लिए छात्र तैयार हों। जॉन्स हॉपकिंस जैसे ग्लोबल सहयोग और सरकारी समर्थन से यूनिवर्सिटी छात्रों को न सिर्फ डिग्री बल्कि रियल-वर्ल्ड स्किल्स दे रही है। पीआर सोढानी का मानना है कि टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर और बेहतर कनेक्टिविटी बढ़ाने से जयपुर जल्द ही नॉलेज कैपिटल बनेगा। आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी AI, स्टार्टअप्स और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए जयपुर को हेल्थकेयर शिक्षा का वैश्विक हब बना रही है और लाखों छात्रों का उज्ज्वल भविष्य तैयार कर रही है।
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