मुजफ्फरपुर में बिहार पुलिस मुख्यालय की सख्ती के बावजूद भ्रष्टाचार का एक नया मामला सामने आया है। पीयर थाना के अपर थानेदार अभिनंदन कुमार का कथित तौर पर घूस लेते हुए एक वीडियो वायरल हुआ है। इस मामले में एसएसपी ने जांच के आदेश दिए हैं। जानकारी के अनुसार, नूनफारा गांव के एक मामले में सीताराम नाम के व्यक्ति को जेल भेजा गया था। इसी केस में मदद करने के नाम पर शत्रुघ्न राम से रिश्वत की मांग की गई थी। आरोप है कि 2019 बैच के सब इंस्पेक्टर अभिनंदन कुमार ने अपने दलाल राम कुमार राय के माध्यम से 5000 रुपये लिए। पीड़ित ने कहा- पैसे के लिए लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था पीड़ित शत्रुघ्न राम ने बताया कि थाने का दलाल लगातार पैसों के लिए उसे प्रताड़ित कर रहा था। दबाव में आकर पीड़ित ने कर्ज लेकर पैसे जुटाए। उसने भ्रष्टाचार को उजागर करने का फैसला किया और जब वह अधिकारी के आवास पर पैसे देने पहुंचा, तो उसके साथ मौजूद एक अन्य व्यक्ति ने चुपके से पूरी घटना का वीडियो बना लिया। वीडियो में दलाल के माध्यम से लेनदेन स्पष्ट दिख रहा है। पीड़ित का यह भी आरोप है कि उसे झूठे केस में फंसाया गया था। मामला सामने आने के बाद मुजफ्फरपुर के एसएसपी राकेश कुमार ने तत्काल संज्ञान लिया है। उन्होंने जांच के आदेश देते हुए कहा कि भ्रष्टाचार में शामिल किसी भी पुलिसकर्मी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि पीयर थाना पिछले कुछ समय से लगातार विवादों में रहा है। हाल ही में एक सरपंच की पिटाई के मामले में यहां के थानेदार को निलंबित किया जा चुका है। अपर थानेदार का घूस लेते वीडियो वायरल होने से पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह थाना अब दलालों का अड्डा बन गया है, जहां बिना ‘सुविधा शुल्क’ के कोई काम नहीं होता। एसएसपी ने कहा- पुलिस की छवि खराब करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा मामले की गंभीरता को देखते हुए मुजफ्फरपुर के एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि पुलिस की छवि खराब करने वाले किसी भी कर्मी को बख्शा नहीं जाएगा। एसएसपी ने कहा, “वायरल वीडियो की पूरी सत्यता की जांच की जा रही है। जांच के बाद दोषी पाए जाने पर कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।” फिलहाल, एसएसपी ने ग्रामीण एसपी राजेश सिंह प्रभाकर को निर्देशित किया है कि वे स्थानीय डीएसपी के साथ मिलकर खुद इस मामले की जांच करें और जल्द से जल्द रिपोर्ट सौंपें। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि खाकी की आड़ में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, जिसे उखाड़ने के लिए वरीय अधिकारियों को और अधिक कड़े कदम उठाने होंगे।
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