रेवाड़ी के धारूहेड़ा ब्लॉक के बीडीपीओ गांवों में कचरा निस्तारण पर सख्त हो गए है। उन्होंने कचरा निस्तारण के लिए ग्राम सचिवों की जिम्मेदारी फिक्स की है। लापरवाही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की चेतावनी दी है। ग्राम सचिवों पत्र लिखकर इस बारे में तीन दिन में विस्तृत रिपोर्ट जमा करने के निर्देश दिए हैं। एजेंसी का काम संतोषजनक नहीं पाए जाने पर भुगतान रोकने के निर्देश दिए हैं। बीडीपीओ ने आदेशों के कॉपी डीसी और जिला परिषद के सीईओ को भी भेजी है। बीडीपीओ के आदेश से ग्राम सचिवों के साथ सरपंचों में भी खलबली मच गई है। कचरा निस्तारण में लापरवाही पर एनजीटी भी जुर्माना लगा चुकी है। संग्रहण व सेग्रीग्रेशन पर सख्ती धारूहेड़ा के खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी सुरजीत सिंह ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि ग्राम पंचायतों में डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण और कचरे के पृथक्करण (सेग्रीगेशन) को लेकर सख्ती दिखाई है। उन्होंने कहा कि सरकार की स्वच्छ भारत मिशन योजना के अनुसार नियमित रूप से यह कार्य सुनिश्चित किया जाए। किसी भी स्थिति में कचरा अनधिकृत स्थान पर न डाला जाए। मिलीभगत की आशंका अपने पत्र में कहा कि NGT द्वारा पंचायतों पर लगाए गए जुर्माने से यह स्पष्ट होता है कि इसके लिए पंचायतों द्वारा नियमानुसार भुगतान नहीं किया जा सकता। जिसमें ग्राम सचिवों की मिलीभगत से भी इंकार नहीं किया जा सकता। निदेशालय द्वारा समय-समय पर हिदायतें जारी करने के बाद भी स्वच्छ भारत मिशन के तहत खर्च होने वाली राशि का दुरुपयोग गंभीर विषय है। आदेश में यह भी संकेत दिया गया है कि कुछ मामलों में ग्राम सचिव और सरपंच की मिलीभगत से नियमों के विपरीत भुगतान किए जा रहे हैं, जिससे सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है। इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए प्रशासन ने कड़ी चेतावनी दी है। इन बिंदुओं पर देनी होगी रिपोर्ट बीडीपीओ ने चार मई को सभी ग्राम सचिवों को पत्र जारी किया। जिसमें ग्राम सचिवों से इन बिंदुओं पर तीन दिन में विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। नियमानुसार काम नहीं पाए जाने पर ग्राम सचिवों को नियमानुसार कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। अपने अपने क्षेत्र में काम करने वाली एजेंसियों का विरण। किन-किन गांवों में टेंडर से डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन व सेग्रीग्रेशन का कार्य किए एजेंसी को दिया गया है।
यह कार्य ग्राम पंचायतें स्वयं कर रही हैं या खंड स्तर पर यह कार्य किया जा रहा है। जो कंपनी नियमानुसार काम नहीं कर रही अर्थात कार्य संतोषजकन नहीं है, उसको भुगतान नहीं किया जाए। ऐसा नहीं करने पर निर्धारित अवधि में इसकी रिपोर्ट खंड पटवारी को प्रस्तुत की जाए। ऐसा नहीं करने वाले ग्राम सचिवों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
Source link
