प्रदेश में बच्चों के खिलाफ होने वाले यौन अपराधों और बलात्कार के मामलों की जल्द सुनवाई और पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाने के लिए राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। विधि एवं विधायी कार्य विभाग ने प्रदेश में संचालित होने वाली विशेष अदालतों को नए सिरे से अधिसूचित कर दिया है। इसके तहत पूरे राज्य में कुल 27 विशेष अदालतें होंगी, जिन्हें राशि की व्यवस्था के आधार पर राज्य पोषित और केंद्र पोषित दो श्रेणियों में बांटा गया है। इस संबंध में अधिसूचना जारी की गई है। विधि एवं विधायी कार्य विभाग की प्रमुख सचिव सुषमा सावंत द्वारा इसे लेकर अलग-अलग सूचनाएं जारी कर दी गई हैं। अब पॉक्सो और दुष्कर्म से संबधित मामलों की सुनवाई करने वाली अदालतों को दो हिस्सों में बांटा गया है। राज्य पोषित 12 अदालतों में पूरी तरह से केवल बच्चों के यौन अपराध यानी पॉक्सो एक्ट से जुड़े मामलों की सुनवाई होगी, इनमें बालोद, बलौदाबाजार, भाटापारा, बस्तर (जगदलपुर), धमतरी, कवर्धा (कबीरधाम), कोंडागांव, कोरबा, बेमेतरा, मुंगेली, सारंगढ़ (रायगढ़) और सराईपाली (महासमुंद) शामिल हैं। इसके अलावा केंद्र पोषित 15 अदालतों में से 11 केवल बच्चों के शोषण के मामलों और 4 विशेष अदालतें दुष्कर्म और बच्चों के शोषण दोनों तरह के मामलों की सुनवाई करेंगी। रायपुर में 4, बिलासपुर में 2 विशेष अदालतें
राजधानी रायपुर में मामलों की संख्या को देखते हुए सबसे ज्यादा 4 केंद्र पोषित विशेष अदालतें बनाई गई हैं, ये केवल बच्चों के शोषण से जुड़े मामलों की सुनवाई करेंगी। वहीं, न्यायधानी बिलासपुर में भी ऐसी 2 विशेष अदालतें संचालित होंगी। जल्द ट्रांसफर किए जाएंगे केस
इसके अलावा मामलों को जल्द ट्रांसफर करने के निर्देश दिए गए हैं। हाई कोर्ट प्रशासन की ओर से जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को इस पर तुरंत काम करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। कोरबा के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश को निर्देश दिया गया है कि वे जिले के दुष्कर्म से जुड़े मामलों को कटघोरा की विशेष अदालत में भेजें। वहीं रायगढ़ के जिला न्यायाधीश को कहा है कि वे दुष्कर्म के मामलों को रायगढ़ और घरघोड़ा की विशेष अदालत में भेजें।
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