खंडवा में भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के जिलाध्यक्ष पद को लेकर गुटीय राजनीति चरम पर पहुंच गई है। अध्यक्ष पद के मुख्य दावेदार सागर आरतानी के खिलाफ ब्राह्मण समाज की महिला विंग ने मोर्चा खोल दिया है। महिलाओं ने भाजपा जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह तोमर को ज्ञापन सौंपकर सागर आरतानी को यह जिम्मेदारी न देने की मांग की है। ब्राह्मण समाज का आरोप है कि सागर आरतानी के पिता अनिल आरतानी ने पूर्व में समाज की महिलाओं (विशेषकर शर्मा सरनेम वाली) पर अभद्र और अश्लील टिप्पणी की थी। इस मामले में अनिल आरतानी के खिलाफ मोघट रोड थाने में पुलिस प्रकरण भी दर्ज किया गया था। ज्ञापन में स्पष्ट कहा गया है कि महिलाओं की गरिमा पर आघात करने वाले किसी भी व्यक्ति या उसके परिवार से जुड़े लोगों को सार्वजनिक और राजनीतिक जिम्मेदारियों से दूर रखा जाना चाहिए। समाज की चेतावनी- ‘जिम्मेदारी मिली तो करेंगे पुरजोर विरोध’
ब्राह्मण समाज ने भाजपा से मांग की है कि सागर आरतानी को भविष्य में पार्टी में कोई भी संगठनात्मक या राजनीतिक पद न दिया जाए, ताकि समाज में सकारात्मक संदेश जाए। महिला विंग ने चेतावनी दी है कि यदि आरतानी परिवार को कोई जिम्मेदारी मिलती है, तो ब्राह्मण समाज भाजपा का कड़ा विरोध करेगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी पार्टी जिलाध्यक्ष की होगी। गुटीय राजनीति का प्रभाव: विरोधी गुट की नेत्री भी रहीं मौजूद
इस पूरे घटनाक्रम में गुटीय राजनीति साफ नजर आई। जिलाध्यक्ष को ज्ञापन सौंपने पहुंची महिला विंग में भाजपा की मंडल अध्यक्ष स्नेहा पाराशर भी शामिल थीं। गौरतलब है कि स्नेहा पाराशर और सागर आरतानी भाजपा के दो अलग-अलग धड़ों का प्रतिनिधित्व करते हैं। हालांकि, स्नेहा पाराशर वहां राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से उपस्थित थीं। क्या कहते हैं राजनीतिक जानकार?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पिता पर लगे आरोपों की सजा बेटे को नहीं दी जा सकती है। हाल ही में ओंकारेश्वर ट्रस्ट से जुड़े एक मामले में कोर्ट ने भी यह अहम टिप्पणी की थी कि ‘रक्त कलंकित नहीं हो सकता’। यानी, यदि कोई गुनाह पिता ने किया है, तो उसका खामियाजा बेटा क्यों भुगते। इसे पूरी तरह से पार्टी की अंदरूनी खींचतान और पॉलिटिक्स का हिस्सा माना जा रहा है।
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