चंडीगढ़ नगर निगम में फर्जी एफडी मामले के बाद अब हाईमास्ट लाइट लगाने में नया घोटाला सामने आया है। सेक्टर-34, सेक्टर-35 स्लो कैरिज-वे, सेक्टर-48 नाइट फूड स्ट्रीट और ओपन एयर थिएटर में लगाए गए हाईमास्ट लाइट और बिजली के पोलों में बड़े स्तर पर गड़बड़ी मिलने का दावा किया गया है। यह खुलासा नगर निगम के इलेक्ट्रिक विभाग के जूनियर इंजीनियर (JE) सनी ठाकुर की रिपोर्ट में हुआ है। उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट में कई तकनीकी खामियां बताते हुए संबंधित एजेंसी का बिल रोकने की सिफारिश की है। साइट पर लगा सामान घटिया निकला जेई ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि 20 अप्रैल को एजेंसी के गोदाम में डीडब्ल्यूसी पाइप का निरीक्षण किया गया था। वहीं से थर्ड पार्टी जांच के लिए सैंपल भी लिए गए थे। लेकिन बाद में जब साइट पर जाकर जांच की गई तो वहां लगाए गए पाइप गोदाम में दिखाए गए पाइपों से काफी घटिया गुणवत्ता के मिले। इसके बाद जेई ने मांग की कि जांच के लिए सैंपल सीधे साइट से लिए जाएं ताकि सही जांच हो सके। डेढ़ महीने बाद दी निरीक्षण की जानकारी रिपोर्ट में कहा गया कि 14 मार्च 2026 को फैक्ट्री में हाईमास्ट और केबल का निरीक्षण किया गया था, लेकिन इसकी जानकारी करीब डेढ़ महीने बाद दी गई। जेई का कहना है कि जब उन्होंने खुद थर्ड पार्टी जांच की मांग उठाई, उसके बाद ही उन्हें निरीक्षण की जानकारी दी गई। जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि हाईमास्ट, डबल ड्रम विंच और मोटर के सीरियल नंबर या मॉडल नंबर तक दर्ज नहीं किए गए। ऐसे में यह साबित करना मुश्किल हो गया कि साइट पर लगाए गए उपकरण वही हैं या नहीं, जिनका फैक्ट्री में निरीक्षण किया गया था। लाइटों में जंग और खराब वेल्डिंग मिली सेक्टर-48 में लगाए गए हाईमास्ट लाइटों में कई तकनीकी कमियां मिली हैं। रिपोर्ट के अनुसार कई केबल तय मानकों के अनुसार नहीं थीं और कुछ केबल पतली गुणवत्ता की पाई गईं। हाईमास्ट पर गैल्वनाइजेशन खराब मिला और एक महीने के भीतर ही कई हिस्सों में जंग दिखाई देने लगी। वेल्डिंग की गुणवत्ता भी खराब पाई गई। जांच में क्रैक, गैप और कटिंग जैसी खामियां सामने आईं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि जहां टेंडर में छह पोल मोटर लगाने की शर्त थी, वहां चार पोल मोटर लगा दी गई। इसके अलावा कई जरूरी उपकरण जैसे मैकेनिकल टार्क लिमिटर, रबर बफर, पीवीसी सुरक्षा व्यवस्था और मल्टी-पिन प्लग-सॉकेट भी साइट पर नहीं मिले। हाईमास्ट और मोटर पर पहचान तक नहीं जेई ने आरोप लगाया कि हाईमास्ट, विंच और मोटर पर कोई पहचान चिह्न या मार्किंग नहीं थी। इसके अलावा जरूरी टेस्ट रिपोर्ट भी उपलब्ध नहीं करवाई गईं। इनमें डबल ड्रम विंच की टेस्टिंग, हाईमास्ट की स्ट्रक्चरल टेस्टिंग और वेल्डिंग टेस्ट शामिल हैं। जेई ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि पूरे मामले की संयुक्त साइट जांच करवाई जानी चाहिए। इसके लिए वरिष्ठ अधिकारियों और कंपनी प्रतिनिधियों की मौजूदगी जरूरी है। उन्होंने साफ कहा कि जब तक पूरी स्थिति स्पष्ट नहीं होती, वह एजेंसी का बिल पास नहीं कर सकते। सबसे अहम बात यह है कि इस कंपनी को काम देने से पहले नगर निगम इंजीनियरिंग विभाग के वरिष्ठ अधिकारी पश्चिम बंगाल के हुगली स्थित कंपनी प्लांट का दौरा कर चुके हैं। अधिकारियों ने वहां निरीक्षण के बाद संतुष्टि जताते हुए अपनी रिपोर्ट भी दी थी, जिसके बाद कंपनी को काम मिला। भाजपा उपाध्यक्ष ने उठाए सवाल भाजपा उपाध्यक्ष देवेंद्र सिंह बबला ने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है। दिखाया कुछ गया और लगाया कुछ और जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके इलाके में भी लाइटें बार-बार खराब हो रही हैं और मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। बबला ने कहा कि जेई की शिकायत को गंभीरता से लेने की बजाय उस पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की एक पार्षद और नेता इस भ्रष्टाचार में शामिल हैं।
Source link
