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यूरिया कालाबाजारी में दो मुख्य आरोपी फरार: कई गोदाम अब भी सील, 1575 कट्टे यूरिया पकड़े जाने के बाद खुला था खेल – Bulandshahar News

यूरिया कालाबाजारी में दो मुख्य आरोपी फरार:  कई गोदाम अब भी सील, 1575 कट्टे यूरिया पकड़े जाने के बाद खुला था खेल – Bulandshahar News


पुनीत कुमार शर्मा | बुलंदशहर3 मिनट पहले

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बुलंदशहर के अनूपशहर क्षेत्र में यूरिया की कालाबाजारी के मामले में दो मुख्य आरोपी अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। मामले में अब तक दो अधिकारियों की गिरफ्तारी हुई है, लेकिन जांच की रफ्तार और पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

करीब दो सप्ताह पहले अनूपशहर क्षेत्र में कालाबाजारी के लिए ले जाई जा रही 1575 कट्टे यूरिया खाद पकड़ी गई थी। जांच में सामने आया था कि खाद को निर्धारित गोदाम तक पहुंचाने के बजाय रास्ते में ही दूसरे वाहनों में भरकर अन्य जिलों में भेजा जा रहा था।

आठ लोगों पर दर्ज हुआ था मुकदमा

इस मामले में जिला प्रबंधक, गोदाम प्रभारी और अकाउंटेंट समेत आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने अब तक दो अधिकारियों को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू की है। हालांकि जालखेड़ा गोदाम प्रभारी हरेंद्र पाल सिंह और सहायक लेखाकार यश राघव अभी भी फरार हैं। सूत्रों के मुताबिक दोनों आरोपी लगातार अपने ठिकाने बदल रहे हैं, जिससे पुलिस उन्हें पकड़ नहीं पा रही है।

गिरफ्तारी में ढिलाई के आरोप

सूत्रों के अनुसार सोमवार को हाईकोर्ट में दायर स्टे याचिका पर सुनवाई प्रस्तावित है। इसी वजह से पुलिस गिरफ्तारी को लेकर नरम रुख अपनाए हुए है। मामले में पुलिस पर जानबूझकर कार्रवाई धीमी करने के आरोप भी लग रहे हैं। वहीं कई सील किए गए गोदाम अब तक नहीं खोले गए हैं, जिससे जांच अधूरी मानी जा रही है।

बड़े अधिकारी की भूमिका पर भी चर्चा

सूत्रों का दावा है कि जांच के दौरान एक बड़े अधिकारी की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई थी। उनके निलंबन की फाइल तैयार होने की चर्चा रही, लेकिन अंतिम समय में कथित राजनीतिक हस्तक्षेप के चलते कार्रवाई रुक गई। मामले में एक प्रदेश स्तरीय भाजपा नेता के संरक्षण की चर्चाएं भी क्षेत्र में तेज हैं। हालांकि आधिकारिक स्तर पर इसकी पुष्टि नहीं की गई है।

किसानों ने निष्पक्ष जांच की मांग की

उधर किसानों और सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि खाद की कालाबाजारी से किसानों को सीधा नुकसान पहुंच रहा है, इसलिए पूरे नेटवर्क का खुलासा होना जरूरी है।



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