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शेखावत बोले- मैंने कभी नहीं कहा वसुंधराजी से नहीं बनती: नाराजगी होती तो मुख्यमंत्री क्यों जाते उनसे मिलने, राजनीति में व्यक्तिगत द्वेष का स्थान नहीं – Rajasthan News

शेखावत बोले- मैंने कभी नहीं कहा वसुंधराजी से नहीं बनती:  नाराजगी होती तो मुख्यमंत्री क्यों जाते उनसे मिलने, राजनीति में व्यक्तिगत द्वेष का स्थान नहीं – Rajasthan News


केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने उदयपुर में हुई पर्यटन बैठक के दौरान वसुंधरा राजे से नाराजगी की अटकलों, राष्ट्रीय स्वयं सेवक (RSS) पर बैन की मांग, बंगाल मिशन और राजस्थान में बीजेपी की अंदरूनी रणनीति पर खुलकर बात की।

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अगर नाराजगी होती तो मुख्यमंत्री पूर्व मुख्यमंत्री राजे से मिलने क्यों जाते?

शेखावत बोले- मैंने कभी नहीं कहा वसुंधराजी से नहीं बनती:  नाराजगी होती तो मुख्यमंत्री क्यों जाते उनसे मिलने, राजनीति में व्यक्तिगत द्वेष का स्थान नहीं – Rajasthan News

शेखावत बोले- मैंने कभी नहीं कहा वसुंधराजी से नहीं बनती:  नाराजगी होती तो मुख्यमंत्री क्यों जाते उनसे मिलने, राजनीति में व्यक्तिगत द्वेष का स्थान नहीं – Rajasthan News

किसी की हैसियत नहीं कि आरएएस पर टिप्प्णी करे।

शेखावत बोले- मैंने कभी नहीं कहा वसुंधराजी से नहीं बनती:  नाराजगी होती तो मुख्यमंत्री क्यों जाते उनसे मिलने, राजनीति में व्यक्तिगत द्वेष का स्थान नहीं – Rajasthan News

ये कहना है केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का। भास्कर से विशेष बातचीत में शेखावत ने वसुंधरा राजे से नाराजगी की अटकलों, राष्ट्रीय स्वयं सेवक (RSS) पर बैन की मांग, बंगाल मिशन और राजस्थान में बीजेपी की अंदरूनी रणनीति पर खुलकर बात की।

पढ़िए पूरा इंटरव्यू…

भास्कर: आपने कुछ समय पहले एक बयान में कहा था कि वसुंधरा राजे से संबंध अच्छे नहीं थे। अब स्थिति बदली है कि नहीं? शेखावत : मैं ऐसा कभी नहीं कहूंगा। राजनीति में व्यक्तिगत द्वेष का कोई स्थान नहीं है। हम एक परिवार के सदस्य हैं। परिवार में मतभेद हो सकते हैं, मनभेद नहीं। मनभेद की स्थिति पहले भी नहीं थी और न आगे होगी। मैं तो यह भी कहता हूं कि विचारधारा में भिन्नता होने पर भी राजनीति में मनभेद की गुंजाइश नहीं है। जो मन में रखते हैं, वे खुद अपनी उन्नति के मार्ग में बाधा बनते हैं।

भास्कर : लेकिन नाराजगी तो है? शेखावत : मुझे तो नहीं लगता। न कभी थी, न कभी होगी।

भास्कर: मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष दोनों हाल ही में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से मिलने गए। कहा जा रहा है उप चुनाव को लेकर चर्चा हुई? शेखावत : अगर नाराजगी होती, तो क्या मुख्यमंत्री उनके पास जाते? संबंधों की सहजता जहां होती है, वहां प्रोटोकॉल नहीं होते। जिस परिवार में प्रोटोकॉल पैदा हो जाते हैं, वह परिवार टूट जाता है। भारतीय जनता पार्टी में न पहले प्रोटोकॉल की व्यवस्था थी, न है, न कभी होगी।

भास्कर: हाल ही में पश्चिम बंगाल में महिला सुरक्षा को लेकर आपने वहां की सरकार को घेरा है? टीएमसी पर कई आरोप लगाए हैं। शेखावत: यह केवल महिलाओं की सुरक्षा की बात नहीं है। वहां आम जन सुरक्षित नहीं। महिलाओं की आबरू सुरक्षित नहीं। जनप्रतिनिधियों की प्रतिष्ठा सुरक्षित नहीं। मैं हर चुनाव में बंगाल जाता हूं। वहां की स्थिति की राजस्थान में बैठकर कल्पना भी नहीं की जा सकती। राज्य के संरक्षण में अपराधी खुलेआम घटनाएं कर रहे हैं। मैंने खुद प्रत्यक्ष रूप से देखा है कि पुलिस किस तरह राजनीतिक दबाव में ऐसे लोगों के आगे झुकती है। बंगाल को लेकर जो मैंने कहा, वह अकल्पनीय स्थिति का सटीक बयान है।

भास्कर: राजस्थान में उपचुनाव है। भाजपा की स्थिति को कैसे देखते हैं? शेखावत : भारतीय जनता पार्टी प्रचंड बहुमत से जीतेगी। पहले भी जब पांच उपचुनाव हुए थे। तब कहा था- हम ‘एक से अनेक’ होंगे। पांच में से चार सीट हमने जीतीं। अंता के चुनाव में भी भाजपा प्रचंड बहुमत से जीतेगी, आप लिखकर रख लीजिए।

भास्कर: कर्नाटक में आरएसएस पर बैन की मांग सामने आई है। शेखावत : जिन लोगों ने ऐसा बयान दिया, उनकी यह हैसियत ही नहीं है कि वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर टिप्पणी करें। आजादी के बाद से जब-जब किसी ने आरएसएस पर हमला किया, संघ और निखरकर सामने आया है। हमारा कोई व्यक्तिगत लक्ष्य नहीं है। करोड़ों स्वयंसेवक राष्ट्र के उत्थान, संस्कारित समाज और विश्वकल्याण के लिए सेवा करते हैं। जहां भी काम करेंगे, किसी भी भूमिका में करेंगे, उद्देश्य राष्ट्र निर्माण ही रहेगा।

हाल ही में उदयपुर में हुए राष्ट्रीय पर्यटन कॉन्फ्रेंस में विभिन्न राज्यों से आए पर्यटन मंत्रियों से मिलते केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत।

हाल ही में उदयपुर में हुए राष्ट्रीय पर्यटन कॉन्फ्रेंस में विभिन्न राज्यों से आए पर्यटन मंत्रियों से मिलते केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत।

भास्कर: देशभर के पर्यटन मंत्री, राज्यपाल और कई लोग इस सम्मेलन में उपस्थित हैं। इससे पूरे देश में उदयपुर और राजस्थान का नाम एक बड़े स्तर पर चमक रहा है। शेखावत : दैनिक भास्कर का बहुत धन्यवाद। देशभर के पर्यटन मंत्री आए हैं। पर्यटन के मानचित्र पर उदयपुर अब किसी पहचान का मोहताज नहीं है। फिर भी, इतना बड़ा सम्मेलन और इतने सारे लोग एक विषय पर चर्चा के लिए यहां जुटे हैं तो निश्चित रूप से उदयपुर को नई पहचान मिलेगी।

सभी लोग मेरे आग्रह और मंत्रालय के आयोजन में आए हैं। मैं इस परिवार का मुखिया होने के नाते और इस धरती का बाशिंदा होने के नाते उन सबका बहुत-बहुत स्वागत करता हूं। इन्हीं शब्दों के साथ- ‘पधारो म्हारे देश।’

भास्कर: जीडीपी में पर्यटन का योगदान लगातार बढ़ रहा है। आगे की संभावनाओं और चुनौतियों को कैसे देखते हैं? शेखावत : वैश्विक परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो दुनिया की ग्लोबल जीडीपी में पर्यटन का योगदान 10% से ज्यादा है। भारत की जीडीपी में भी पर्यटन की बड़ी भूमिका है। 5 से 6% योगदान टूरिज्म सेक्टर का है। भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट तेजी से हुआ है। ग्लोबल स्टैंडर्ड के एक्सप्रेस वे, हाईवे, हाई-स्पीड रेलवे कॉरिडोर बने हैं। एयरपोर्ट की संख्या भी बढ़ी है। इसका लाभ निश्चित रूप से पर्यटन को मिला है।

सरकार की लोक कल्याणकारी योजनाओं से लगभग 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर उठकर मध्यम वर्ग में आए हैं। उनके पास खर्च करने की क्षमता आई है। इससे घरेलू पर्यटन में बड़ा उछाल आया है। वैश्विक स्तर पर भारत की छवि बदली है। भारत सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। इसी वजह से पूरी दुनिया का आकर्षण भारत की ओर है। हमने लक्ष्य तय किया है कि आने वाले 5 साल में भारत का पर्यटन जीडीपी में वैश्विक बेंचमार्क 10% तक पहुंचे।

सम्मेलन में शामिल केंद्रीय मंत्री गजेंद्र शेखावत, राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी, चंडीगढ़ के एडमिनिस्ट्रेटर गुलाबचंद कटारिया।

सम्मेलन में शामिल केंद्रीय मंत्री गजेंद्र शेखावत, राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी, चंडीगढ़ के एडमिनिस्ट्रेटर गुलाबचंद कटारिया।

भास्कर : क्या कमी है जिसकी वजह से राजस्थान अभी भी पर्यटन में नंबर वन नहीं है? शेखावत : मैं ऐसा नहीं मानता कि राजस्थान नंबर वन नहीं आया। इस पर मैं टिप्पणी नहीं करूंगा। देश में पर्यटन की संभावनाएं अपार हैं। उनका दोहन कैसे हो, इस पर सबको विचार करना होगा। प्राथमिक रूप से पर्यटन राज्य सरकारों का विषय है। मुझे मंत्रालय में अभी डेढ़ साल हुआ है, लेकिन टूरिज्म से मेरा जुड़ाव पुराना है।

मैं जिम्मेदारी से कह सकता हूं कि आज सभी राज्यों में टूरिज्म को लेकर जैसा उत्साह और प्रतियोगिता है, वैसा पहले कभी नहीं था। अकल्पनीय ग्रोथ हो रही है। अर्थव्यवस्था बढ़ रही है। कनेक्टिविटी बढ़ रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सेक्टर 20% CAGR से बढ़ेगा। अब समय है कि टूरिस्ट के ‘एंड टू एंड एक्सपीरियंस’ को अपलिफ्ट किया जाए।

स्पिरिचुअल डेस्टिनेशन के विकास पर काम हो रहा है। नए टूरिस्ट प्लेस तैयार किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने नीति आयोग की बैठक में निर्देश दिया था और बजट में घोषणा की थी कि देश में 50 ग्लोबल आइकॉनिक डेस्टिनेशन विकसित किए जाएंगे।

राज्यों को गाइडलाइन दी गई है कि वे अपने राज्य में कोई पुराना या नया डेस्टिनेशन चुनें और उसे ग्लोबल स्तर का बनाएं। लगभग सभी राज्यों (बिहार और पश्चिम बंगाल को छोड़कर, चुनाव के कारण) ने अपने प्रेजेंटेशन दिए हैं। हमने सबके काम देखे हैं। अगले चरण में सभी राज्य सुधार कर के नए प्रस्ताव लाएंगे। मुझे विश्वास है कि यह डेस्टिनेशन देसी और विदेशी दोनों पर्यटकों की संख्या बढ़ाएंगे।

भास्कर : यह दो दिन की पर्यटन बैठक है। इससे राजस्थान के लोगों को क्या फायदा मिलेगा? शेखावत : पूरे देश में जब 50 ग्लोबल डेस्टिनेशन बनाने की बात हो रही है तो इसका सिलेक्शन परफॉर्मेंस बेस्ड होगा। मुझे विश्वास है कि राजस्थान बेहतर प्रदर्शन करेगा और एक से अधिक प्रोजेक्ट निश्चित रूप से राज्य को मिलेंगे।

नागालैंड के पर्यटन मंत्री तेमजेन इम्ना अलॉन्ग से मिलते केंद्रीय मंत्री शेखावत।

नागालैंड के पर्यटन मंत्री तेमजेन इम्ना अलॉन्ग से मिलते केंद्रीय मंत्री शेखावत।

भास्कर: डेस्टिनेशन वेडिंग जैसे नए सेक्टर को लेकर क्या योजना है? शेखावत: डेस्टिनेशन वेडिंग को प्रमोट करने में प्रधानमंत्री की भूमिका सबसे बड़ी रही है। उनके प्रयासों से ही उदयपुर और जयपुर में इस इंडस्ट्री में बूम आया है। वेडिंग टूरिज्म से लेकर वेलनेस, एडवेंचर और मेडिकल टूरिज्म तक भारत में हर वर्टिकल में अपार संभावनाएं हैं। भारत इतना विविध देश है कि दुनिया के हर पर्यटक के लिए हमारे गुलदस्ते में एक फूल रखा है।

भास्कर : स्पिरिचुअल सर्किट डवलपमेंट को लेकर क्या योजनाएं हैं? जवाब: हमारे धार्मिक क्षेत्र हमारी संस्कृति के केंद्र हैं। भारत में मंदिर केवल पूजा का नहीं, संस्कृति का केंद्र हैं। हम चाहते हैं कि इनके पुनरुद्धार से वहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों दोनों का अनुभव बेहतर हो। काशी, महाकाल, अयोध्या, जगन्नाथ धाम, केदारनाथ…हर जगह हमने नए सिरे से पुनरुद्धार किया है।

परिणाम यह है कि उज्जैन के महाकाल मंदिर में पहले एक साल में 20 लाख पर्यटक आते थे, अब एक सप्ताह में ही 15 लाख पहुंच रहे हैं। यह केवल कॉरिडोर की वजह से नहीं, बल्कि समग्र आर्थिक विकास का परिणाम है।



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