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नई दिल्ली4 मिनट पहले
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तस्वीर AI जनरेटेड है।
भारत सरकार ने इस साल पहली बार पारंपरिक सुपरकम्प्यूटर मॉडल की जगह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित मौसम मॉडल का इस्तेमाल किया। इन मॉडल्स के जरिए 38 लाख किसानों को मानसून से जुड़ी जानकारी दी गई।
AI मॉडल्स ने न सिर्फ 30 दिन पहले मानसूनी बारिश के आगमन का सही समय बताया, बल्कि बीच में 20 दिन बारिश रुकने की चेतावनी भी दी, जो पारंपरिक मॉडल नहीं पकड़ सके। किसानों ने बताया कि इन पूर्वानुमानों के आधार पर उन्होंने बुवाई और फसल चयन के फैसले लिए।
एआई मॉडल्स पुराने मौसम डेटा के पैटर्न पहचानकर अनुमान लगाते हैं। इससे वे कम संसाधनों और समय में सटीक भविष्यवाणी कर पाते हैं। इस बार भारत में दो प्रमुख मॉडल्स- ECMWF और गूगल का NeuralGCM- का संयुक्त रूप से उपयोग हुआ।
पारंपरिक नेचुरल वेदर प्रोसेसिंग और एआई का संतुलन बनाकर बेहतर परिणाम मिले। इस परियोजना का संचालन ह्यूमन-सेंटर्ड वेदर फोरकास्ट्स इनिशिएटिव (HCIF) ने किया। इसे गेट्स फाउंडेशन और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से फंडिंग मिली।
HCIF इसे अफ्रीका, बांग्लादेश, चिली, इथियोपिया और केन्या जैसे देशों में भी लागू कर रहा है। इसकी खूबी ये है कि इन्हें सुपरकम्प्यूटर की जरूरत नहीं होती। ये साधारण लैपटॉप पर भी चल सकते हैं। इससे गरीब देशों को भी सटीक और समय पर मौसम जानकारी मिल सकती है।

महज दो सेकेंड में तूफान व बारिश का हफ्तेभर का सटीक डेटा देता है
- एआई मॉडल पारंपरिक मॉडल्स से कैसे अलग है? पारंपरिक मॉडल तापमान, दबाव और हवा की गति जैसे डेटा का गणितीय आकलन करते हैं। इसमें सुपरकंप्यूटर की जरूरत होती है। वहीं, एआई मॉडल पुराने मौसम डेटा के पैटर्न पहचानते हैं और अनुमान लगाते हैं कि पहले ऐसे हालात में क्या हुआ था। इससे वे कम संसाधनों और समय में सटीक अनुमान लगाते हैं।
- एआई आधारित मौसम मॉडल्स कैसे विकसित हुए? 2022 में अमेरिकी कंपनी एनवीडिया ने FourCastNet नामक एआई मौसम मॉडल लॉन्च किया। यह दशकों के मौसम डेटा पर प्रशिक्षित था और महज दो सेकंड के अंदर तूफान व बारिश की हफ्तेभर पहले तक की सटीक भविष्यवाणी कर सकता था।
- क्या एआई मॉडल पर पूरी तरह भरोसा कर सकते हैं? नहीं, इनमें कुछ सीमाएं हैं। ये मॉडल भौतिकी के नियमों पर आधारित नहीं होते, इसलिए कभी-कभी अवास्तविक परिणाम दे सकते हैं। ये दुर्लभ या चरम मौसम घटनाओं की भविष्यवाणी में कमजोर हैं, क्योंकि इनके पास ऐसे डेटा की कमी होती है।
- भारत ने इस साल कैसे इतने सटीक अनुमान लिए? भारत ने ECMWF और गूगल के NeuralGCM दोनों को पारंपरिक सॉफ्टवेयर के साथ मिलाकर अच्छे नतीजे निकाले।
- कम संसाधन वाले देशों के लिए ये कैसे उपयोगी हैं? इसकी खासियत है कि इन्हें एक बार प्रशिक्षित करने के बाद हाई-एंड लैपटॉप पर भी चलाया जा सकता है।
- परियोजना में एचसीएफआई की क्या भूमिका रही? एचसीएफआई परियोजना का समन्वय करती है। ये सरकारों को एआई आधारित मौसम मॉडल अपनाने को प्रेरित करती है।
- डेटा असिमिलेशन क्या है, इसमें क्या प्रगति हुई है? पहले यह काम सिर्फ अमीर देशों की एजेंसियां कर पाती थीं। अब ECMWF ने नवीनतम डेटा मुफ्त देने की घोषणा की है।


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