साइबर फ्रॉड के आरोपी फाइल (फोटो)
साइबर फ्रॉड केस में गिरफ्तार आरोपी दीपेश मकवाना द्वारा चंडीगढ़ कोर्ट में लगाई गई जमानत याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया। इसमें आरोपी की ओर से कहा गया था कि उसकी 5 नवंबर को शादी है, लेकिन कोर्ट ने कहा कि ऐसे तर्क नहीं माने जाते और यह कहते हुए याचिका क
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वकील बोला झूठा फंसाया
मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष के वकील नरेंद्र कुमार राणा ने दलील दी कि आरोपी को झूठा फंसाया गया है और पुलिस को कोई आपत्तिजनक सबूत नहीं मिला। वकील ने बताया कि आरोपी 14 अक्टूबर 2025 से हिरासत में है और उसकी शादी 5 नवंबर 2025 को तय है, जो उसकी गिरफ्तारी से पहले फिक्स की गई थी। लगातार हिरासत से दोनों परिवारों को नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि आरोपी जांच में सहयोग करेगा और सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करेगा।
ऑनलाइन साइबर फ्रॉड।
खाता खोलने पर 10% देता था
वहीं, सरकारी वकील कृष्ण जसपाल ने जमानत का विरोध किया और लिखित जवाब दाखिल किया। इसमें बताया गया कि जांच के दौरान सह-आरोपी राज कुमार पांडे ने खुलासा किया कि उसने अपने दोस्त दीपेश माजुवाना से मुलाकात की थी। दीपेश ने बताया कि उसका परिचित विपुल मुलाणी, जो अहमदाबाद (गुजरात) का रहने वाला है, लोगों को ऑनलाइन धोखा देकर उनसे ठगी करता है। उसने कहा कि अगर कोई चालू खाता उपलब्ध कराए तो वह उसमें फर्जी तरीके से पैसे ट्रांसफर करेगा और खाते के मालिक को 10% कमीशन देगा।
दीपेश मकवाना ने अपने दोस्त आर्यन की मदद से बंधन बैंक में खाता खुलवाया और उसका चेकबुक, एटीएम व मोबाइल नंबर दे दिया। बाद में उसने मोबाइल नंबर वापस ले लिया। दोनों को 10% कमीशन यानी ₹1,20,000 मिले, जिसमें राज कुमार पांडे को ₹85,000 और दीपेश मकवाना को ₹35,000 मिले। इसके बाद राज कुमार पांडे की निशानदेही पर दीपेश मकवाना को गिरफ्तार किया गया।
सरकारी पक्ष ने कहा कि आरोपी चालाक और संसाधनयुक्त है, वह जांच को प्रभावित कर सकता है, गवाहों को फुसला सकता है और बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी में रुकावट डाल सकता है। साथ ही, उसके फरार होने की संभावना भी है।

जिला अदालत चंडीगढ़।
जानिए कैसे हुई करोड़ों की ठगी…
- ट्रेडिंग के जरिए ठगीः पुलिस को मिली शिकायत में चंडीगढ़ की रहने वाली हजीरन कौर ने बताया कि कुछ लोगों ने उन्हें फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म TotalSecurities.net / INX Account के जरिए लगभग ₹2.87 करोड़ की ठगी कर ली।
- खुद को बताया सेबी रजिस्टर्डः आरोपी खुद को प्रोफेसर क्लाइंट मैनेजर और ग्रुप असिस्टेंट बताकर निवेश के नाम पर भरोसा जीतते थे। वे SEBI, RBI और अन्य सरकारी संस्थाओं से रजिस्टर्ड होने के नाम पर निवेशकों को ‘UCI/IPO स्कीम’ में पैसा लगाने के लिए प्रेरित करते थे।
- मध्य प्रदेश से चलाते थे गिरोहः पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी मध्य प्रदेश के इंदौर से गिरोह चलाते थे और देशभर के विभिन्न बैंक खातों के जरिए ठगे हुए पैसे इकट्ठा करते थे। वॉट्सऐप चैट्स, बैंक ट्रांजैक्शन और तकनीकी साक्ष्यों से यह साबित हुआ कि ठगी का पूरा नेटवर्क इंदौर से ऑपरेट हो रहा था।
- आरोपियों से बरामद सामान: उज्जैन जिले के नागझिरी इलाके में छापा मारकर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आरोपियों से दो मोबाइल बरामद किए हैं। राजकुमार पांडे के पास से सैमसंग गैलेक्सी S22 (ब्लू) मोबाइल मिला है, जो बंधन बैंक खाते से जुड़ा हुआ था। मोबाइल की जांच में पता चला है कि इस खाते में ठगी के करीब ₹20 लाख रुपए जमा हुए थे।
