राजस्थान में प्राइवेट बस संचालक हड़ताल पर हैं, करीब 7 हजार स्लीपर बसें खड़ी हो गई हैं। जिसका असर मध्यप्रदेश में भी दिख रहा है। भोपाल-इंदौर से राजस्थान के जयपुर, बीकानेर, उदयपुर समेत अन्य शहरों के चलने वाली बसें भी बंद हैं। भोपाल के आईएसबीटी पर राजस्थ
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जिन यात्रियों को इसकी जानकारी है उन्होंने यात्रा स्थगित कर दी है, लेकिन जिन्हें जानकारी नहीं है, वो बस स्टैंड पर परेशान हो रहे हैं। बता दें कि भोपाल, इंदौर उज्जैन से करीब 150 से ज्यादा बसें राजस्थान जाती हैं और इतनी ही बसें वहां से एमपी में आती है। इन बसों से रोजाना 10 हजार से ज्यादा यात्री सफर करते हैं। बस ऑपरेटर्स का कहना है कि बसें कब तक बंद रहेंगी फिलहाल ये बताया नहीं जा सकता।
राजस्थान जाने वाले बस स्टैंड पर भटक रहे भोपाल के आईएसबीटी पर अपनी पत्नी के साथ बीकानेर मजदूरी करने जा रहे भरतलाल की बेबसी इसका जीता-जागता उदाहरण है। उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि राजस्थान जाने वाली बसें बंद हैं। भरतलाल ने कहा, ‘काम करने बीकानेर जाना था, लेकिन कोई गाड़ी ही नहीं मिल रही। किसी ने बताया तो लालघाटी गए, वहां भी बस नहीं मिली।
अब यहां बस स्टैंड आए हैं, तो पता चला कि बसें तो चल ही नहीं रहीं। कुछ प्राइवेट टैक्सी वाले जोधपुर तक छोड़ने का एक व्यक्ति का 2200 रुपए मांग रहे हैं। हमारे पास इतने पैसे कहां से आएंगे? अब तो वापस घर लौटने के अलावा कोई चारा नहीं है। भरतलाल अकेले नहीं हैं। उनके जैसे हजारों यात्री हैं जो या तो अपने घर लौट रहे हैं या फिर कई गुना ज्यादा किराया देकर यात्रा करने को मजबूर हैं।
हड़ताल की जानकारी न होने के कारण कई लोग बस स्टैंड पहुंचकर परेशान हो रहे हैं। बस ऑपरेटर्स ने तीन दिन पहले ही ऑनलाइन बुकिंग बंद कर दी थी, लेकिन इसका संदेश सभी तक नहीं पहुंच पाया।

राजस्थान जाने वाली बसें पिछले तीन दिनों से खड़ी हैं।
बसों के पहिए थमे तो ट्रेनों में बढ़ी भीड़
सड़क मार्ग बंद होने के बाद यात्रियों का एकमात्र सहारा भारतीय रेल बची है, लेकिन यहां भी स्थिति चिंताजनक है। अचानक बढ़े दबाव के कारण ट्रेनों में पैर रखने की जगह नहीं है। भोपाल से जयपुर, बीकानेर, उदयपुर और जोधपुर जाने वाली लगभग सभी ट्रेनों में 4 और 5 नवंबर तक लंबी वेटिंग लिस्ट है। स्लीपर क्लास तो दूर, एसी कोच में भी कन्फर्म टिकट मिलना मुश्किल हो गया है।
इंदौर से जोधपुर जाने वाली ट्रेन में कुछ सीटें उपलब्ध हो सकती हैं, लेकिन जयपुर रूट पर स्थिति बेहद खराब है। घर जाने की उम्मीद लगाए बैठे लोगों के लिए यह दोहरी मार है। एक तरफ बसें बंद हैं, तो दूसरी तरफ ट्रेनों में जगह नहीं है।

यात्री ही नहीं, ड्राइवर-कंडक्टर भी बेबस और लाचार बसों के बंद होने से यात्री ही नहीं बल्कि ड्राइवर और कंडक्टर भी परेशान हैं। वे पिछले तीन दिनों से यहीं फंस गए हैं। भोपाल से जयपुर के बीच चलने वाले बस ड्राइवर दिलीप बिराला ने बताया कि हमारी दो बसें रोज भोपाल से जयपुर जाती थीं, लेकिन तीन दिन से यहीं भोपाल में खड़ी हैं। इंदौर वाली बस तो 15 दिनों से बंद है।
हम यहीं बस में सो रहे हैं, यहीं खाना बना रहे हैं। सेठ (मालिक) ने रुकने को बोला है, तो रुके हैं। यहां से निकलें और रास्ते में आरटीओ वालों ने पकड़ लिया तो आधी रात को कहां जाएंगे? होटल भी नहीं मिलेगा। सवारियां भी परेशान हैं, बार-बार फोन करके पूछ रही हैं कि बस कब चलेगी?

बसों के ड्राइवर और कंडक्टर भी तीन दिनों से परेशान हैं।
ऑपरेटर बोले- सरकार हमें सुधार का मौका दें बसों के बंद होने के केंद्र में जैसलमेर और मनोहरपुर में हुए बस हादसे हैं, जिसके बाद राजस्थान परिवहन विभाग ने प्राइवेट बसों, खासतौर पर स्लीपर बसों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू कर दी। बसों की बॉडी डिजाइन, इमरजेंसी गेट और अन्य सुरक्षा खामियों को लेकर भारी-भरकम चालान काटे जा रहे हैं और कई बसों को सीज भी किया गया है।
इसी कार्रवाई के विरोध में अखिल राजस्थान कांटेक्ट कैरिज बस एसोसिएशन ने बसों को न चलाने का ऐलान किया है। एक निजी ट्रेवल्स के मालिक बुद्धा राम ने कहा कि हम परिवहन विभाग की मनमानी और एकतरफा कार्रवाई से तंग आ चुके हैं। जैसलमेर हादसे के बाद अधिकारियों ने इसे लूट का बहाना बना लिया है।
रोज 50 हजार से एक लाख रुपए तक के चालान काटे जा रहे हैं, जिससे एक बस ऑपरेटर को रोजाना 30,000 रुपए का सीधा नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा, हमारी बसों में साइड और पीछे, दोनों तरफ इमरजेंसी गेट हैं, फायर सिस्टम लगा है, और इन बसों की फिटनेस और रजिस्ट्री खुद विभाग ने ही की है। इसके बावजूद हम पर कार्रवाई हो रही है।

सरकार से मांग वर्कशॉप खोलें और हमें 6 महीने का समय दें बस ऑपरेटरों की एक बड़ी समस्या यह भी है कि वे चाहकर भी अपनी बसों में सुधार नहीं करवा पा रहे हैं। बुद्धा राम के अनुसार, परिवहन विभाग ने राजस्थान में कई बस बॉडी वर्कशॉप को सीज कर दिया है। जो वर्कशॉप खुले हैं, वे भी कार्रवाई के डर से काम नहीं कर रहे हैं। ऐसे में हम अपनी बसों में सुधार कैसे करवाएं?
ऑपरेटरों ने सरकार के सामने दो प्रमुख मांगें रखी हैं- पहली उन्हें अपनी बसों को नियमों के अनुसार सुधारने के लिए कम से कम 6 महीने का समय दिया जाए। दूसरी ये कि सरकार तत्काल सीज किए गए बॉडी बिल्डर वर्कशॉप को फिर से चालू करवाए, ताकि बसों की मरम्मत और सुधार का काम हो सके और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
ऑपरेटरों का कहना है कि वे नियमों का पालन करने को तैयार हैं, लेकिन विभाग को उन्हें इसका अवसर और समय देना होगा। इस बीच कुछ ऑपरेटरों ने अपनी बसों में सुधार करवाना भी शुरू कर दिया है। इमरजेंसी गेट के सामने की एक स्लीपर सीट हटाई जा रही है और नए फायर एक्सटिंगिवीशर लगाए जा रहे हैं।

अजमेर के जयपुर रोड पर खड़ी प्राइवेट बसें।
हड़ताल के बीच मनमानी वसूली, दूसरे रूटों पर राहत जहां एक ओर हजारों बसें खड़ी हैं, वहीं कुछ बस ऑपरेटर इस स्थिति का फायदा उठाकर यात्रियों से मनमाना किराया वसूल रहे हैं। जो कुछ बसें चोरी-छिपे चल रही हैं, वे सामान्य से तीन से चार गुना अधिक किराया ले रही हैं। हालांकि, भोपाल और इंदौर से राजस्थान के अलावा अन्य रूटों, जैसे पुणे, अहमदाबाद, सूरत और मुंबई के लिए बसें नियमित रूप से चल रही हैं। इन रूटों पर जांच तो हो रही है, लेकिन वैसी सख्ती नहीं है जैसी राजस्थान रूट पर है।
