अंबाला के धूलकोट में पिछले माह एयर फोर्स के कैमरे में एक वन्य जीव की तस्वीर कैद हुई थी, जिसके बाद से तेंदुए की खबर सुर्खियों में आ गई।
अंबाला में पिछले एक महीने से लगातार तेंदुए के देखे जाने की खबरें सुर्खियों में बनी हुई हैं। कभी अंबाला छावनी तो कभी धूलकोट या पंजोखरा साहिब क्षेत्र हर बार सोशल मीडिया पर एक नई तस्वीर या वीडियो वायरल होकर लोगों में दहशत फैला देता है। लेकिन अब वन विभाग
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अंबाला के पंजोखरा साहिब क्षेत्र में तेंदुए देखे जाने को लेकर यह फोटो वायरल किया गया था। जिसको वन विभाग ने फेक बताया है।
कब-कब और कहाँ-कहाँ आई तेंदुए की खबरें
अंबाला में तेंदुए के देखे जाने की अफवाहों की शुरुआत पिछले महीने धूलकोट गांव से हुई थी। ग्रामीणों ने झाड़ियों में किसी जंगली जानवर जैसी आकृति देखने की बात कही थी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची थी, लेकिन तलाशी के बाद किसी तेंदुए का कोई सबूत नहीं मिला। जांच में यह बात सामने आई कि वह संभवतः एक जंगली बिल्ली या किसी अन्य छोटे वन्यजीव की झलक थी, जिसे गलती से तेंदुआ समझ लिया गया।
इसके बाद कुछ सप्ताह पहले अंबाला शहर के बाहरी इलाके में भी तेंदुए जैसी आकृति का वीडियो वायरल हुआ। वहां भी वन विभाग ने सर्च अभियान चलाया, लेकिन कोई निशान नहीं मिला। टीम ने बताया कि कई बार रात के अंधेरे में कुत्तों या अन्य जंगली जानवरों की हरकतें लोगों को भ्रमित कर देती हैं।
हाल ही में, शुक्रवार शाम पंजोखरा साहिब क्षेत्र में एक बार फिर तेंदुए के देखे जाने की सूचना आई। सोशल मीडिया पर एक तस्वीर वायरल हुई, जिसमें लोगों ने तेंदुए होने का दावा किया। हालांकि, वन विभाग ने उस तस्वीर को अवैध और भ्रामक बताया है। विभाग ने कहा है कि तस्वीर एआई से बनाई गई है। इस मामले में फोटो साझा करने वालों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

वन विभाग लगातार सर्च अभियान चला रहा है।
जिले में नहीं कोई तेंदुआ- वन विभाग
वन विभाग के निरीक्षक राकेश कुमार ने स्पष्ट कहा है कि अंबाला जिले में तेंदुए की मौजूदगी का अब तक कोई प्रमाण नहीं मिला है। वन क्षेत्र अधिकारी ने बताया, “हमारी टीम हर बार सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचती है, पूरे इलाके की तलाशी ली जाती है, लेकिन कभी भी तेंदुए के पगमार्क, मल-मूत्र या अन्य जैविक सबूत नहीं मिले हैं। ऐसे में यह कहना कि तेंदुआ मौजूद है, पूरी तरह से अफवाह है।”
उन्होंने जनता से अपील की है कि अफवाहें फैलाने से बचें, क्योंकि इससे न केवल लोगों में भय फैलता है बल्कि अनावश्यक रूप से वन विभाग और पुलिस का संसाधन भी बर्बाद होता है।
गलत सूचनाओं से दहशत का माहौल
बार-बार वायरल हो रही तस्वीरों और संदेशों के कारण ग्रामीणों और शहरी इलाकों में दहशत का माहौल बना हुआ है। कई लोग रात में घरों से बाहर निकलने से परहेज़ कर रहे हैं। स्कूलों के आसपास भी बच्चों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे लगातार सोशल मीडिया पर इस तरह की खबरें देख रहे हैं, जिससे डर का माहौल पैदा हो गया है।

वन विभाग लगातार सर्च अभियान चला रहा है।
अफवाह फैलाने वालों पर होगी कानूनी कार्रवाई
राकेश कुमार ने कहा है कि जो भी व्यक्ति बिना सत्यापन के तेंदुए से जुड़ी गलत जानकारी या तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करेगा, उसके खिलाफ आईटी एक्ट और वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर ऐसे खातों की पहचान शुरू कर दी है जो झूठी सूचनाएं फैला रहे हैं।
वन विभाग ने साथ ही यह भी कहा है कि अगर किसी क्षेत्र में वास्तव में तेंदुए जैसी कोई गतिविधि दिखती है, तो तुरंत वन नियंत्रण कक्ष या स्थानीय पुलिस को सूचना दें, सोशल मीडिया पर अफवाह न फैलाएं।
जिले में सतर्कता
विभाग ने आश्वासन दिया है कि पूरे जिले में गश्त और निगरानी बढ़ा दी गई है। कैमरा ट्रैप और सर्वे टीमों को सक्रिय किया गया है ताकि किसी भी संभावित जंगली जानवर की सही जानकारी समय पर मिल सके।
अंबाला प्रशासन और वन विभाग दोनों ने नागरिकों से संयम बरतने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। फिलहाल, विभाग के मुताबिक अंबाला में “तेंदुए का डर” सिर्फ एक अफवाह है, हकीकत नहीं।
