जमुई में नीमारंग निवासी गौनरी देवी ने अपनी जमीन की मापी न होने और कथित लापरवाही व रिश्वतखोरी के खिलाफ जिलाधिकारी से शिकायत की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि अंचलाधिकारी (सीओ) उनसे जमीन की मापी के लिए 1 लाख रुपए की मांग कर रहे हैं।
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गौनरी देवी के अनुसार, उन्होंने खाता संख्या 25, खसरा संख्या 1135, रकबा 0.86 डेसीमल जमीन की मापी के लिए दो बार ऑनलाइन शुल्क जमा किया है। इसके बावजूद उनकी जमीन की मापी नहीं की गई। रसीदें उपलब्ध होने के बाद भी अधिकारी इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
1 लाख रुपए की रिश्वत मांगते हैं अंचलाधिकारी
पीड़िता ने बताया कि उनके आवेदन पर दो बार अमीन मौके पर पहुंचे, लेकिन हर बार बगलगीर के सादे कागज पर कुछ लिखवाकर बिना कोई कारण बताए लौट गए। गौनरी देवी का आरोप है कि जब वे अंचल कार्यालय में मापी न होने की शिकायत करती हैं, तो अंचलाधिकारी उनसे 1 लाख रुपए की रिश्वत मांगते हैं।
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारी उन्हें धमकी देते हैं कि वे जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, अपर समाहर्ता या उप समाहर्ता, किसी से भी शिकायत करें, कोई कुछ नहीं कर सकता।
आवेदन लेकर डीएम कार्यालय पहुंचे पति-पत्नी।
रास्ता बनाने के लिए खरीदी थी जमीन
गौनरी देवी के पति कैलाश रविदास ने बताया कि उन्होंने रास्ता बनाने के लिए एक डिसमिल जमीन खरीदी है, जिसका मोटेशन भी हो चुका है। इसके बावजूद मापी नहीं की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि घर के बगल में रहने वाले दबंग लोग सीओ को पैसे देते हैं, जिसके कारण जानबूझकर मापी रोकी जा रही है। कैलाश रविदास ने यह भी कहा कि शिकायत करने पर सीओ के गार्ड ने उन्हें धक्का देकर भगा दिया।
इस मामले में जमुई की अंचलाधिकारी ललिता रंजन से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन कॉल रिसीव नहीं किया। गौनरी देवी ने जिलाधिकारी से अनुरोध किया है कि उनकी भूमि की विधिवत मापी कराने का निर्देश संबंधित विभाग को दिया जाए, ताकि उन्हें न्याय मिल सके।
