धर्मशाला स्मार्ट सिटी योजना अपने चयन के नौ साल बाद भी शहरवासियों को प्रस्तावित बुनियादी सुविधाएं प्रदान करने में विफल रही है। 2016 में इसको लेकर काम शुरू हुआ, लेकिन दूसरी समय सीमा बीतने के बाद भी अधिकांश परियोजनाएं अधूरी हैं। जबकि इन्हें पूरा करने की
.
नौ साल बाद भी स्मार्ट सिटी की धीमी प्रगति ने धर्मशाला स्मार्ट सिटी लिमिटेड की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।हाल यह है कि पहले ही 2019 करोड़ का प्रस्ताव 542 करोड़ में सिमटा, 9 सालों में 80 में से 20 परियोजनाएं ही पूरी हुईं। 10 जो चल रही हैं, नहीं लगता है कि वह अगले साल तक भी पूरी हो पाएंगी
शहरवासियों को उम्मीद थी कि स्मार्ट सिटी योजना से यातायात, पार्किंग, बिजली, पेयजल और पर्यटन सुविधाओं में बड़ा सुधार होगा, लेकिन हकीकत में यह योजना अब भी अधूरी तस्वीर बनकर रह गई है।
अधूरी पड़ी पार्किंग
अधूरी पड़ी पार्किंग तीन साल में नहीं बनी सात मंजिला पार्किंग- भूस्खलन भी बना बाधा
- योजना के तहत कोतवाली बाजार में आईएसबीटी बस स्टैंड के पास 23 करोड़ 98 लाख की लागत से बहुमंजिला पार्किंग बननी है। इसका कार्य 2022 में एएनएस कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को सौंपा गया था। यह कार्य अभी तक अधूरा है। इसका कारण लगातार भूस्खलन माना जा रहा है।
- यह पार्किंग आईएसबीटी, रोप-वे और कोतवाली बाजार के निकट स्थित है। रोप-वे के कारण मैक्लोडगंज की दूरी कम होने से इस क्षेत्र में रोजाना हजारों वाहनों की आवाजाही रहती है। शहर में बड़ी पार्किंग की कमी को देखते हुए इससे काफी उम्मीदें थीं।
- सात मंजिला पार्किंग में 302 कारों और 125 दोपहिया वाहनों को खड़ा करने की क्षमता होगी। बेसमेंट, छह फ्लोर और टैरेस पार्किंग शामिल है। इसमें फायर फाइटिंग सिस्टम, दो लिफ्ट, ऑटोमेटेड सेंसर, शौचालय, सर्कुलर रैंप, डीजी सेट और आरसीसी सड़क जैसी आधुनिक सुविधाएं भी प्रस्तावित हैं।

एचआरटीसी बस अड्डा
एचआरटीसी बस अड्डा एचआरटीसी बस डिपो और वर्कशाप भी अधूरी
एचआरटीसी बस डिपो और वर्कशाप के लिए स्मार्ट सिटी मिशन के तहत करीब 13 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं, जिसमें ग्राउंड फ्लोर में डीजल बसों की मेंटेनेंस की सुविधा का प्रबंध किया जा रहा है और पहले फ्लोर पर इलेक्ट्रिक बसों के लिए चार्जिंग स्टेशन की व्यवस्था होगी। लेकिन यह कार्य भी पूरा नहीं हुआ है।
2109 करोड़ से सिमटकर 542 करोड़ रह गई योजना, फिर भी अधूरी
80 में से 20 परियोजनाओं ही पूरी: धर्मशाला स्मार्ट सिटी परियोजना के अंतर्गत कुल 80 परियोजनाएं प्रस्तावित की गई थीं। इनमें से अब तक लगभग 20 ही पूरी हो पाई हैं। शहर में चल रही 10 प्रमुख परियोजनाओं की प्रगति भी काफी धीमी है और कई योजनाएं आधी भी पूरी नहीं हो सकी हैं। इससे शेष करोड़ों रुपए की परियोजनाओं का हाल बुरा है।
निवेशक नहीं मिला तो चौथाई हुआ बजट: अगस्त 2015 में घोषणा के समय 2109 करोड़ का प्रस्ताव बना था। बाद में स्मार्ट सिटी के मूल प्रारूप में बदलाव हुआ और बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर (बीओटी) मॉडल के तहत प्रस्तावित कई योजनाओं के लिए निवेशक नहीं मिले। इससे 2109 करोड़ में मात्र 542 करोड़ के कार्यों की मंजूरी मिली। इसमें 52.89 करोड़ रुपए राज्य सरकार और 490 करोड़ रुपए केंद्र सरकार द्वारा दिए गए हैं।
डेट बढ़ाया पर काम की रफ्तार नहीं बढ़ी: स्मार्ट सिटी योजना मूल रूप से जून 2023 में समाप्त होनी थी। इसे पहले जून 2024 और फिर 31 मार्च 2025 तक बढ़ाया गया, इनमें से करीब 496 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं या निर्माणाधीन हैं। 100 करोड़ से अधिक की भूमिगत केबलिंग परियोजना अधर में है। धर्मशाला स्मार्ट सिटी की भूमिगत केबलिंग परियोजना भी विवादों में घिरी हुई है।
जानिए क्या हाल है परियोजनाओं का- कहीं विवाद तो कहीं फंड बर्बाद
- विवादों में फंसी भूमिगत केबलिंग योजना: नगर निगम क्षेत्र में बिजली की एचटी व एलटी लाइनों को भूमिगत करने के लिए 66.8 करोड़ की योजना बनाई थी। इसका अनुमानित खर्च 93.06 करोड़ रुपए तक पहुंच गया। यह परियोजना स्मार्ट सिटी प्रबंधन व हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड के बीच फंड को लेकर विवाद हो गया। बिजली बोर्ड के अधिशासी अभियंता विकास ठाकुर के अनुसार, स्मार्ट सिटी प्रबंधन से करीब 3.71 करोड़ रुपए नहीं मिले हैं। बजट की कमी से लगातार देरी हो रही है।
- वन परियोजनाओं का हाल
- वन परियोजनाएं भी अधर में: वन क्षेत्रों के सौंदर्यीकरण के लिए पांच करोड़ से अधिक का फंड वन विभाग को दिया गया। डीएफओ धर्मशाला डॉ. संजीव शर्मा के अनुसार, फेज-2 में मैक्सीमस मॉल, कैंची मोड़ और सर्किट हाउस के पास सौंदर्यीकरण किया गया है। फेज-3 में 95 लाख से शहीद स्मारक के पास वन वाटिका बनी। फेज-4 में डिपो बाजार के पास 99 लाख से पार्क बनाया गया। खनियारा के पास एक और पार्क प्रस्तावित है, लेकिन अभी तक उपयुक्त भूमि नहीं मिल पाई है।
52 लाख के बैंबू ट्री हाउस बने फंड दुरुपयोग की मिसाल

बैंबू ट्री प्रोजेक्ट के तहत किया गया निर्माण
- धर्मशाला स्मार्ट सिटी में जनता के पैसे के दुरुपयोग का सबसे बड़ा उदाहरण बैंबू ट्री हाउस परियोजना मानी जा रही है। ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वन विभाग के माध्यम से 52 लाख रुपए की लागत से तीन बैंबू ट्री हाउस और एक डाइनिंग हॉल का निर्माण किया गया। लेकिन विभाग और ठेकेदार के बीच विवाद के चलते पिछले चार सालों से इन पर ताले लटके हुए हैं।
- बांस सड़ने लगे हैं, फर्नीचर खराब हो चुका है और बिजली उपकरण जंग खा रहे हैं। कालापुल के जंगल में नाले के किनारे बनाए गए ये ट्री हाउस आज फिजूलखर्ची और अव्यवस्था की पहचान बन चुके हैं। मामला कोर्ट में विचाराधीन है, जबकि जिम्मेदार अधिकारी मूक दर्शक बने हुए हैं।
