पलवल में यमुना किनारे खेतों में भरा पानी। किसानों को इससे भारी नुकसान पहुंचा है।
पलवल जिले में यमुना नदी में आई बाढ़ से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जिले में 45.2 किलोमीटर में बह रही यमुना नदी के कारण करीब 20 हजार एकड़ में खड़ी फसलें जलमग्न हो गई हैं, जिससे किसानों के चेहरे मायूस दिखाई दे रहे हैं। बाढ़ का पानी कम होने का नाम
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जिले के बागपुर खादर से यूपी बॉर्डर तक यमुना नदी 45.2 किलोमीटर में बहती है। बाढ़ आने से जिले के किसानों की करीब 20 हजार एकड़ में खड़ी सबसे अधिक धान की फसल, कपास, सब्जियां, ज्वार, ईख व अन्य फसलें यमुना के पानी में जलमग्न हो गई हैं। किसानों ने सरकार व प्रशासन से मुआवजे की गुहार लगाई है।
पलवल में खेतों में नुकसान पहुंचा रहा यमुना का पानी।
किसानों का फूटा दर्द- नहीं बची फसलें
यमुना किनारे बसे सुल्तापुर गांव के किसान ज्ञानचंद ने बताया कि उनकी 20 एकड़ में धान की फसल थी, जो पिछले एक सप्ताह से यमुना में पानी बढ़ने से जलमग्न हो चुकी है। ज्ञानचंद ने कहा कि इतना समय हो चुका है, अब तो फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी होगी।
कुशक गांव के किसान रामबीर ने बताया कि उसने दस एकड़ में धान की और दो एकड़ में पशुओं के चारे के लिए ज्वार की फसल बोई हुई थी, जो यमुना के बहाव में डूब चुकी है। इंदिरा नगर गांव के जोगेंद्र ने बताया कि उनकी फसल तो डूबी सो डूबी, उनके गांव को जाने वाला रास्ता भी पानी में डूबने से गांव से संपर्क खत्म हो गया।

यमुना के पानी से जलमग्न हुए खेत।
जिले के मोहबलीपुर व इंदिरानगर दोनों गांवों के चारों तरफ यमुना का पानी भरने से गांवों का संपर्क खत्म हो चुका है। जिला प्रशासन ने दोनों गांवों के लोगों के लिए अच्छेजा व खटका गांव के सरकारी व निजी स्कूलों में सेफ होम बनाकर उन्हें गांवों से पहले ही शिफ्ट करा दिया था।
स्थानीय निवासी जोधाराम, सचिन व रोशन ने बताया कि वे फिलहाल तो सेफ हाउस में रह रहे हैं, लेकिन दो-चार दिन में जब पानी कम हो जाएगा तो गांव जाएंगे, उनके घरों की क्या हालत होगी, यह अभी उन्हें भी नहीं पता। लोगों ने प्रशासन से ऊंचाई वाले गांवों के पास 100-100 वर्गगज के प्लाटों की मांग की है, ताकि प्रति वर्ष बाढ़ के दौरान उन्हें गांव छोड़कर सेफ हाउसों का सहारा न लेना पड़े।
प्रशासन बोला- क्षतिपूर्ति पोर्टल खुला, जानकारी दें
डीसी डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने किसानों से कहा कि क्षतिपूर्ति पोर्टल खुला हुआ है, उसपर अपनी नष्ट हुई फसल का ब्यौरा भरकर भेज दें, मुआवजा अवश्य मिलेगा। प्लाटों की मांग पर उन्होंने कहा कि प्लाट एससी बीपीएल परिवारों के लिए होते है, जरनल को कैसे दे सकते है। जिले के 20 से अधिक गांवों में रहने वाले हजारों किसान बाढ़ से प्रभावित हैं और सरकार से मदद की उम्मीद कर रहे हैं।
