राज्य बनने के बाद पहली बार ऐसा हो रहा है जब नगर निगम अपनी सभी कमर्शियल प्रॉपर्टी की जानकारी ऑनलाइन सार्वजनिक करेगा। अभी तक निगम के पास जोन वाइस इस बात की जानकारी है कि कौन सी दुकान का मालिक कौन है और किसे दुकानें लीज पर दी गई है।
.
जब इस तरह के किसी आंकड़ों की जानकारी चाहिए रहती है तो सभी जोन दफ्तरों से मांगनी पड़ती है। अफसरों का माने तो कई साल से ये जानकारी अपडेट भी नहीं हुई हैं। इसमें कई दुकानें एेसी हैं जिनकी लीज खत्म होने के बाद भी वो पुराने मालिक के पास ही है। ऐसी सभी विसंगतियों को दूर करने के लिए पहली बार यह बड़ी पहल की जा रही है।
अब जिनके पास भी निगम की कोई भी दुकान या जमीन है उन्हें पूरे दस्तावेजों के साथ निगम मुख्यालय में आकर जानकारी देनी होगी। वे ऐसा नहीं करते हैं तो उन्हें नोटिस दी जाएगी। नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
निगम की ओर से जारी सूचना के अनुसार निगम दुकान के मालिकों, किरायेदारों और लीज वालों को लीज डीड रजिस्ट्री, एग्रीमेंट, अधिकार पत्र, आवंटन पत्र, प्रीमियम राशि जमा करने की रसीद, किराये की रसीद, संपत्ति कर की कॉपी, गुमाश्ता, लाइसेंस समेत सभी दस्तावेजों की कॉपी के साथ निगम मुख्यालय के कमरा नंबर 104 में स्थित नजूल विभाग मुख्यालय में जमा करवाना होगा। सभी दस्तावेजों के साथ लोगों को अपना मोबाइल नंबर और आधार कार्ड भी देना होगा। लोगों से कहा गया है कि वे जल्द से जल्द इन दस्तावेजों के साथ निगम दफ्तर पहुंचे।
दशकों पहले से काबिज किराया भी कम दे रहे हैं निगम के पास ऐसी जानकारी भी निकलकर आई है कि अधिकतर किरायेदार निगम के दुकानों में 10 से 20 साल से काबिज हैं। वे किराया भी दशकों पुराना दे रहे हैं। ऐसे लोगों का किराया भी बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा लीज पर लेने वालों ने दुकानें दूसरे लोगों को सब लीज पर दे दी है या बेच दी है।
ऐसे लोगों के नाम भी सामने आएंगे। ऐसे लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई भी की जाएगी। इसके अलावा कई जगहों पर निगम दुकानें बनाकार भूल गया है। यानी वहां सालों से कोई मेंटेनेंस नहीं किया जा रहा है। ऐसी दुकानों की भी जानकारी सामने आने के बाद वहां नए सिरे से काम किया जाएगा।
दस्तावेज लेने के बाद क्या करेंगे? निगम अफसरों के अनुसार सभी तरह के दस्तावेजों को लेने के बाद उसकी जांच की जाएगी। नजूल और बाजार विभाग के अफसर मौके पर जाएंगे। इस बात की जांच करेंगे कि दुकानें जैसी दी गई थी वो वैसी ही हैं या नहीं। उनमें नया निर्माण तो नहीं किया गया है। पुरानी दुकानों की डिजाइन तो नहीं बदली गई है।
आसपास कोई अवैध कब्जा या अतिक्रमण तो नहीं किया गया है। सभी दुकानों की ऑनलाइन इंट्री होने के बाद पहली बार ऐसा होगा जब निगम की दुकानों का किराया, भूभाटक या किश्तों का भुगतान ऑनलाइन किया जा सकेगा। इस तरह का शुल्क अदा करने लोगों को निगम दफ्तर नहीं जाना होगा।
^ निगम की एक-एक दुकानों की जानकारी ऑनलाइन दर्ज करने के लिए यह काम किया जा रहा है। जो दुकानों के मालिक या किरायेदार हैं उनकी जानकारी भी सभी को ऑनलाइन मिलेगी। इसके बाद दुकानों से संबंधित सभी तरह के शुल्क का भुगतान भी ऑनलाइन हो सकेगा। विश्वदीप, आयुक्त नगर निगम रायपुर
