लुधियाना में वकील पार्षद हिमांशू मलिक के समर्थन में उतरे।
लुधियाना में आज यानी शुक्रवार को वकीलों की हड़ताल लगातार पांचवें दिन भी जारी रही। जगराओं बार एसोसिएशन द्वारा पार्षद एडवोकेट हिमांशू मलिक पर दर्ज मामले को रद्द करवाने की मांग की जा रही। चर्चा है कि अगर अब भी मामला रद्द नहीं किया तो आने वाले दिनों में
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बार एसोसिएशन का आरोप है कि थाना सिटी पुलिस ने राजनीतिक दबाव में आकर पार्षद एडवोकेट हिमांशू मलिक पर झूठा केस दर्ज किया। वकीलों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि केस रद्द नहीं हुआ तो लुधियाना जिले की सभी कोर्ट में हड़ताल होगी।
अब आंदोलन को पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ तक फैलाने की तैयारी है। पुलिस मामले को शांत करवाने को वकीलों से संपर्क करने में जुटी है। वही दूसरी और एडवोकेट हिमांशू मलिक द्वारा डाली गई वीडियो को कांग्रेस पार्टी ने अपने फेसबुक पेज पर डाल कर मामले को और हवा दे दी। वीडियो में पार्षद मलिक ने विधायक पर सीधे आरोप लगाए है।
पार्षद हिमांशु मलिक पर FIR हुई थी।
जानिए क्या था मामला… करीब दो महीने पहले नगर कौंसिल प्रधान जकिंदरपाल राणा की अध्यक्षता में हाउस बैठक हुई थी। बैठक में प्रधान गुट के पार्षद हिमांशू मलिक और विधायक गुट से जुड़े भाजपा पार्षद सतीश कुमार पप्पू के बीच कहासुनी हो गई। बहसबाजी के दौरान पप्पू अपनी सीट छोड़कर मलिक के पास पहुंचे, जिस पर मलिक ने उन्हें हल्का-सा पीछे धकेल दिया।
इसके बाद भाजपा पार्षद को अस्पताल में दाखिल करवाकर उन पर हमला करने और जातिसूचक शब्द कहने के आरोप लगाए गए। दूसरी ओर, हिमांशू मलिक ने भी अस्पताल में भर्ती होकर भाजपा पार्षद पर गंभीर आरोप लगाए।
हालांकि, मीटिंग हॉल के सीसीटीवी फुटेज और पुलिस जांच में स्पष्ट हुआ कि न तो हिमांशू मलिक ने हमला किया और न ही कोई जातिसूचक शब्द बोले। इसके बावजूद, राजनीतिक दबाव के चलते पुलिस ने हिमांशू मलिक पर केस दर्ज कर लिया। एफआईआर में पुलिस ने खुद लिखा कि यह मामला आपसी राजनीतिक रंजिश से जुड़ा है और दोनों पक्षों पर अपराध-रोको अधिनियम के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।
नगर कौंसिल में कांग्रेस के प्रधान जतिंदरपाल राना के पक्ष में खड़ा होना पार्षद एडवोकेट हिमांशू मलिक को अब भारी पड़ता दिख रहा है। पार्षद का आरोप है कि आप विधायक के इशारे पर हिमांशू मलिक को लगातार निशाना बनाया जाने लगा।

पूर्व नगर कौंसिल अध्यक्ष व मौजूदा पार्षद सतीश कुमार पप्पू।
दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक रंजिश पार्षद मलिक का आरोप है कि पहले उस पर कांग्रेस प्रधान का साथ छोड़कर आप में शामिल होने के लिए दबाव डाला गया। ताकि विधायक अपने चहेते को कौंसिल प्रधान बना सके। जब उन्होंने इससे साफ इनकार कर दिया तो उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश शुरू हो गईं। पहले बिजली विभाग से उनके जिम पर रेड करवाई गई, फिर नगर कौंसिल से नोटिस भिजवाए गए। हालांकि, कौंसिल अधिकारियों ने खुद को फंसता देख नोटिस वापस ले लिए।
इससे नाराज आप नेताओं ने अगला कदम उठाते हुए भाजपा पार्षद को मोहरा बनाया। एक मामूली धक्का-मुक्की की घटना को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया और भाजपा पार्षद से झूठी शिकायत दर्ज करवाई गई कि मलिक ने उन पर हमला किया और जातिसूचक शब्द कहे।
लेकिन आप नेताओं की यह चाल सीसीटीवी फुटेज और जांच में बेनकाब हो गई। पुलिस जांच में स्पष्ट हुआ कि न तो हमला हुआ और न ही कोई जातिसूचक टिप्पणी की गई। इसके बावजूद, आरोप है कि विधायक के दबाव में पुलिस ने साधारण कहासुनी और धक्का-मुक्की को मारपीट का रंग देते हुए एडवोकेट हिमांशू मलिक पर केस दर्ज कर दिया।
