प्रदेश की राजनीति में हलचल मचा देने वाले नागरिक आपूर्ति निगम (नान) घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग की छह साल से रुकी जांच फिर शुरू हो गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छह साल बाद मुख्य आरोपी रिटायर्ड आईएएस आलोक शुक्ला और अनिल टुटेजा को गिरफ्तार किया है। दो
.
इस मामले में ईओडब्ल्यू एक बार फिर कोर्ट जा रही है। एजेंसी उन गवाहों के बयान दोबारा कराना चाहती है जिन्होंने अपना बयान बदला था, क्योंकि ईडी को जांच के दौरान जो चैट मिले हैं जिनसे पता चलता है कि गवाहों को धमका कर उनका बयान प्रभावित किया गया है। इस मामले की जांच सीबीआई भी कर रही है। ईओडब्ल्यू की जांच 2018 में पूरी हो चुकी थी। उन्होंने दोनों आईएएस अधिकारियों समेत 16 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल कर दी थी। इसमें 172 लोगों को गवाह बनाया गया है। इस मामले में सभी आरोपियों को जमानत मिल चुकी है। कोर्ट में सुनवाई भी पूरी हो गई है। शेष|पेज 9
ईओडब्ल्यू ने 10 साल पहले दर्ज किया था केस
ईओडब्ल्यू ने 12 फरवरी 2015 को छह करोड़ के घोटाले में नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों के 28 ठिकानों पर एक साथ छापे मारे थे। छापों में 3.25 करोड़ नकद बरामद हुए। इसमें आईएएस अनिल टुटेजा, आलोक शुक्ला, शिवशंकर भट्ट समेत 16 लोगों को आरोपी बनाया गया। आरोप है कि छत्तीसगढ़ में राइस मिलों से लाखों क्विंटल घटिया चावल लिया गया और इसके बदले करोड़ों की रिश्वतखोरी की गई। परिवहन में भी भारी गड़बड़ी की गई। इस मामले में अनिल टुटेजा और आलोक शुक्ला के खिलाफ 17 जुलाई 2015 को राज्य शासन ने अभियोजन स्वीकृति दी थी। 4 जुलाई 2016 को केंद्र सरकार से भी स्वीकृति मिल गई। 29 नवंबर 2018 को दोनों अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट पेश की गई। तब से मामला कोर्ट में विचाराधीन है। पिछले साल इस मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी है।
