अनाज मंडी में पहुंची कपास का मापतोल करते हुए
भिवानी की नई अनाज मंडी में किसानों की परेशानी बाजरे की खरीद के बाद अब कपास की खरीद को लेकर भी गंभीर रूप ले चुकी है। मंडी में किसानों को कपास के सरकारी निर्धारित मूल्य से 800-1600 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक कम दाम मिल रहे हैं। जिससे किसानों को भारी आर
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भिवानी नई अनाज मंडी के प्रधान नरेश बंसल उर्फ भुरू ने इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि सरकार ने लंबे रेशे वाले कपास का सरकारी रेट 8 हजार 110 प्रति क्विंटल निर्धारित किया है, जबकि नई अनाज मंडी में किसान अपनी कपास 6 हजार से 7 हजार रुपए प्रति क्विंटल के बीच बेचने को मजबूर हैं। इस तरह किसानों को सीधे तौर पर 800 से 1600 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक का नुकसान हो रहा है।
भिवानी की अनाज मंडी में पहुंची कपास को देखते हुए आढ़ती
अनाज मंडी प्रधान भुरू ने कहा कि किसानों को इस नुकसान की मुख्य वजह बारिश के कारण कपास की गुणवत्ता में आई कमी है। जिसमें किसान का कोई दोष नहीं है। प्राकृतिक आपदा के बावजूद सरकारी एजेंसियां किसानों की कपास नहीं खरीद रही हैं। किसानों के पास अगली फसल की बुआई के लिए रुपए का अभाव है। इस वजह से वे मजबूरन औने-पौने दामों में अपनी कपास व्यापारियों को बेच रहे हैं।
पानी भरने से फसल खराब, अब सरकार नहीं खरीद रही कपास अनाज मंडी में कपास लेकर पहुंचे गांव दिनोद निवासी वेदप्रकाश ने कहा कि वे कपास लेकर बेचने के लिए मंडी में आए थे। यहां पर बिक नहीं रही। यहां 6 हजार या साढ़े 6 हजार रुपए बिक रही है। सरकार भी किसानों को मार रही है। अच्छे से बिक जाती तो दीवाली ठीक से मनाई जाती। पहले ही खेतों में पानी भरा हुआ है, जिसके कारण फसल हुई नहीं। जो हुई है, वह बिक भी ठीक से नहीं रही। सरकार से मांग है कि एमएसपी पर खरीदे

भिवानी अनाज मंडी में पहुंची कपास
किसानों की दीवाली फीकी ही रहेगी आढ़ती संदीप ने कहा कि मंडी में किसानों की कपास आ रही है। लेकिन फसल में काफी नुकसान है। क्वालिटी हल्की भी है कुछ, इसलिए किसानों को दोहरी मार लगी हुई है। किसान की समस्या को देखते हुए सरकार को सरकारी खरीद शुरू करनी चाहिए। ताकि किसान को कुछ फायदा हो। किसान की बाजरे की ही खरीद नहीं हुई, कपास में भी किसान घाटे में जाएगा। इसलिए इस बार किसानों की दीवाली फीकी ही रहेगी।

भिवानी अनाज मंडी में पहुंची कपास का मापतोल करते हुए
बाजरे की सरकारी खरीद भी नहीं हुई शुरू नरेश बंसल उर्फ भुरू ने कहा कि किसानों को पहले ही बाजरे की खरीद को लेकर भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जहां न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद शुरू नहीं होने से मंडी में लाखों क्विंटल बाजरा जमा है। कपास की खरीद भी ना होने से किसानों की परेशानियां गुणात्मक रूप से बढ़ गई हैं। इस दोहरी मार से किसान न केवल अपनी मेहनत का उचित मूल्य खो रहे हैं, बल्कि अगली फसल की तैयारी के लिए भी पूंजी जुटाने में असमर्थ हैं, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति और खराब हो रही है। उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए कपास की खरीद 8 हजार रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से तुरंत सुनिश्चित की जाए।
