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मुस्लिमों को ठगने वाले हलाल की कीमत 5 हजार: जिस निशान को देखकर मुस्लिम सामान खरीद रहे वो फर्जी, कैमरे पर नेक्सस का पर्दाफाश

मुस्लिमों को ठगने वाले हलाल की कीमत 5 हजार:  जिस निशान को देखकर मुस्लिम सामान खरीद रहे वो फर्जी, कैमरे पर नेक्सस का पर्दाफाश


बिना जांच और बिना किसी तय प्रक्रिया के 5 हजार से 15 हजार रुपए में हलाल सर्टिफिकेट बनाए जा रहे हैं। न कोई वैरिफिकेशन, न दस्तावेजी पड़ताल, सिर्फ पैसे देकर ‘हलाल’ का ठप्पा लगवाइए और बेफिक्र व्यापार करिए।

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हलाल सर्टिफिकेट देखकर मुस्लिम ग्राहक ये यकीन कर लेते हैं कि वो जो प्रोडक्ट खरीद रहे हैं, वो जायज है और उसे कुरआन या हदीस में जो नियम बताए गए हैं, उसके तहत ही तैयार किया गया है।

लेकिन भास्कर की पड़ताल में पता चला कि देशभर में फर्जी हलाल सर्टिफिकेट का बड़ा नेटवर्क एक्टिव है। जैसे, शुद्ध शाकाहारी (प्योर वेज) के लिए हरा निशान होता है, वैसे ही हलाल सर्टिफिकेट मुस्लिम खरीदार को भरोसा देता है कि प्रोडक्ट इस्लामिक नियमों के हिसाब से तैयार किया गया है। इस्लामिक कानून के तहत हलाल सिर्फ कत्ल का तरीका नहीं है, बल्कि जानवर की किस्म, सही जबीहा, पवित्रता और नशा न होने जैसे नियम इसमें फॉलो होना जरूरी है।

भास्कर इन्वेस्टिगेशन : कैमरे पर 4 कंपनियां एक्सपोज

भास्कर की टीम ने खुद को नॉन-वेज रेस्टोरेंट का मालिक बताकर फर्जीवाड़े की परतें खोलीं। जांच में सामने आया कि कई कंसल्टेंसी फर्म्स, जो जस्टडायल और इंडियामार्ट जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर खुद को ‘सर्टिफिकेशन कम्पनी’ बताकर लिस्ट कर चुकी हैं, वे पैसों के लिए फर्जी हलाल सर्टिफिकेट तैयार कर रही हैं।

हमने ऐसी चार कंपनियों को शॉर्टलिस्ट किया, जो खुद को हलाल सर्टिफिकेट जारी करने वाली एजेंसी बताती हैं। ये कंपनियां दावा करती हैं कि वे यूके, स्विट्जरलैंड और यूएस बेस्ड ऑर्गनाइजेशन्स से सर्टिफाइड हैं, जिन्हें ग्लोबली मान्यता प्राप्त है।

1. ‘कौन पूछता है, बस टांगना ही तो है’

रिपोर्टर : जनकपुरी में हमारा नॉन-वेज रेस्टोरेंट है उसी के लिए हलाल सर्टिफिकेट चाहिए

प्रभाकर : भारत में यूज के लिए फर्जी हलाल सर्टिफिकेट दस हजार रुपए में बन जाएगा।

रिपोर्टर : आपकी तरह ही कई कंपनियां हैं जो यूके, यूएस और स्विट्ज़रलैंड की संस्थाओं से हलाल सर्टिफिकेट दिलवाने की बात कह रही हैं, ये असली हैं या फर्जी?

प्रभाकर : यूएसए, यूके और स्विट्ज़रलैंड के सर्टिफिकेट फर्जी हैं। असली तो केवल वही हैं जिन्हें भारत सरकार से मान्यता मिली है। यहां कौन पूछता है। बस टांगना ही तो है। टांगने के लिए 10 हजार रुपए में मिल जाएगा। बातचीत के दौरान ही प्रभाकर ने वॉट्सऐप पर कुछ हलाल सर्टिफिकेट भेजे जो उसने खुद बनवाए थे। ये सर्टिफिकेट स्विट्जरलैंड की यूरोस्विस इंक संस्था द्वारा जारी दिखाए गए थे।

2. ‘भारत में फर्जी सर्टिफिकेट लगाने में कोई दिक्कत नहीं’

उमेश ने बताया कि वह जो ‘यूएससर्ट’ का हलाल कंप्लायंस सर्टिफिकेट देता है, वह अमेरिका की एक कंपनी ‘यूएस सर्टिफिकेशन एंड इंस्पेक्शन लिमिटेड’ है। इस कंपनी का नाम अमेरिका की सरकारी वेबसाइट पर भी दर्ज है।

रिपोर्टर : क्या ‘यूएससर्ट’ को हलाल सर्टिफिकेट जारी करने का अधिकार है?

उमेश : जी नहीं। हलाल को लेकर बहुत कम इंक्वायरी आती है, इसलिए कंपनी ने इसके लिए अनुमति नहीं ली है। बाकी आप भारत में आराम से हलाल सर्टिफिकेट लगा सकते हैं। अगर कोई दिक्कत आती है तो मुझे फोन करना, मेरे मिनिस्ट्री में काफी जानकार है।

भास्कर ने जब ‘यूएस सर्टिफिकेशन एंड इंस्पेक्शन लिमिटेड’ की वेबसाइट पर जानकारी खंगाली , तो वहां ‘हलाल सर्टिफिकेशन’ के नाम से एक सेक्शन मौजूद था। जब इस सेक्शन को खोला तो उसमें लिखा था कि यह सर्टिफिकेट इस बात की गारंटी देता है कि संबंधित प्रोडक्ट पूरी तरह से हलाल है, और जानवर को काटने से पहले इस्लामी तरीके से ‘बिस्मिल्लाह अल्लाहु अकबर’ पढ़ा गया है।

लेकिन उमेश के मुताबिक, ‘यूएससर्ट’ का यह हलाल सर्टिफिकेट वह बिना किसी वेरिफिकेशन या साइट विजिट के वॉट्सऐप पर ही मुहैया करा देता है।

हमने उमेश से कुछ ऐसे हलाल सर्टिफिकेट के सैंपल मांगे जो उसने पहले कंपनियों को दिए हों। उमेश ने कुछ ही देर में वे सभी हलाल सर्टिफिकेट वॉट्सऐप पर शेयर कर दिए। हम जितनी देर उमेश से बात कर रहे थे, उतनी देर में उसके स्टाफ ने हमारे रेस्टोरेंट के हलाल सर्टिफिकेट का ड्राफ्ट तैयार कर दिया। मतलब 5 हजार देने पर हमें उसी समय सर्टिफिकेट की कॉपी मिल जाती।

उमेश से बातचीत में पता चला कि, उसने उन कंपनियों के भी विदेशी संस्थाओं के हलाल कम्प्लायंस सर्टिफिकेट लिए हुए हैं, जो माल मुस्लिम देशों में एक्सपोर्ट करती हैं, जबकि भारत सरकार के नियम साफ हैं कि कोई भी कंपनी हलाल प्रोडक्ट एक्सपोर्ट करने के लिए एनएबीसीबी से मान्यता प्राप्त संस्था से ही सर्टिफिकेट लेगी।

3. विदेशी संस्थाओं के नाम से सर्टिफिकेट

नागेन्द्र ने बताया कि जो संस्थाएं इंस्पेक्शन और वेरिफिकेशन करती हैं, उन्हें ‘नोटिफाइड बॉडी’ कहा जाता है। जो सीधे हलाल सर्टिफिकेट देती हैं, उन्हें ‘कंप्लायंस बॉडी’ कहा जाता है।

नागेंद्र के मुताबिक, भारत में ज्यादातर लोग विदेशी संस्थाओं के हलाल सर्टिफिकेट ही लेते हैं क्योंकि यह कम खर्च में बन जाता है और इसमें न कोई वेरिफिकेशन होता है, न इंस्पेक्शन।

हालांकि, नागेन्द्र खुद मानता है कि कंप्लायंस सर्टिफिकेट का मतलब यही होता है कि ‘हमने जांच की है और यह सब कुछ हलाल मानकों के मुताबिक है, इसलिए सर्टिफिकेट जारी किया गया है।’

जब हमने नागेंद्र से पूछा कि कहीं इस हलाल सर्टिफिकेट को फर्जी तो नहीं कहा जाएगा? क्योंकि हमें यह सर्टिफिकेट बिना किसी वेरिफिकेशन या इंस्पेक्शन के मिल रहा है, जबकि हमने सुना है कि हलाल सर्टिफिकेट देने से पहले प्रोडक्ट की पूरी जांच की जाती है। इस पर नागेंद्र ने हमें भरोसा दिलाने के लिए कई सैंपल सर्टिफिकेट दिखाए।

नागेन्द्र ने बताया कि उनकी कंपनी ने कोलकाता की एक बड़ी फास्ट-फूड कंपनी को भी यही हलाल कंप्लायंस सर्टिफिकेट दिया है। यह कंपनी पूरे भारत में आउटलेट रन करती है।

नागेन्द्र के मुताबिक, उनकी कंपनी ‘यूके ग्लोबल’ नाम से हलाल सर्टिफिकेट देती है। लेकिन जब भास्कर रिपोर्टर ने यूके ग्लोबल की वेबसाइट पर जांच की, तो वहां हलाल सर्टिफिकेशन से जुड़ी कोई जानकारी नहीं मिली।

4. ‘5 हजार रुपए में काम हो जाएगा’

रिपोर्टर : मेरा नॉनवेज रेस्टोरेंट है, उसके लिए हलाल सर्टिफिकेट की जरूरत है

वैभव : 5 हजार रुपए में हलाल का कम्पलायंस सर्टिफिकेट मिल जाएगा।

रिपोर्टर : क्या इसे देने से पहले रेस्टोरेंट का कोई इंस्पेक्शन या वेरिफिकेशन किया जाएगा?

वैभव : हमारी कंपनी सेंटर फॉर ग्लोबल एक्रिडिटेशन, जर्मनी से मान्यता प्राप्त है और उसी के तहत वह बिना किसी इंस्पेक्शन के हलाल सर्टिफिकेट जारी कर देगा। बस रेस्टोरेंट और किचन की कुछ तस्वीरें चाहिए होंगी।

वैभव ने हमें कंप्लायंस सर्टिफिकेट के कुछ सैंपल शेयर किए, जो उसने पहले दूसरी कंपनियों को जारी किए हुए थे। बड़ी बात यह है कि इनमें जिन कंपनियों ने हलाल सर्टिफिकेट लिए हुए हैं, उनमें से ज्यादातर कंपनियां ऐसी हैं जो माल एक्सपोर्ट करती हैं।

जबकि सरकारी नियम कहते हैं कि कोई भी भारतीय कंपनी जिस भी संस्था का हलाल सर्टिफिकेट लेगी, वह संस्था एनएबीसीबी से सर्टिफाइड होनी चाहिए। लेकिन वैभव के मुताबिक, उसका दिया हुआ हलाल सर्टिफिकेट देश और विदेश, दोनों जगह काम करेगा।

भास्कर रिपोर्टर ने जब सेंटर फॉर ग्लोबल एक्रिडिटेशन की वेबसाइट पर जाकर सर्टिफिकेट से जुड़ी जानकारी खंगालनी शुरू की, तो वहां कहीं भी हलाल सर्टिफिकेट का जिक्र नहीं मिला।

अब सवाल उठता है कि ये सर्टिफिकेशन सर्विस कंपनियां सरकारी नियमों की अनदेखी कर कैसे हलाल कंप्लायंस सर्टिफिकेट जारी कर रही हैं?

हलाल सर्टिफिकेशन के लिए NABCB से मान्यता जरूरी

सरकार ने हलाल सर्टिफिकेशन कंपनियों का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया है। मीट एक्सपोर्ट के लिए नेशनल एक्रिडिटेशन बोर्ड फॉर सर्टिफिकेशन बॉडीज यानी NABCB मान्यता जरूरी है।

यह क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया के तहत काम करती है। सर्टिफिकेशन और इंस्पेक्शन बॉडीज को अंतरराष्ट्रीय मानकों पर मान्यता देती है। हलाल सर्टिफिकेशन में NABCB ने आई-कैस हलाल स्कीम लागू की है। इसके तहत हलाल सर्टिफिकेट जारी करने वाली संस्थाओं के लिए प्रक्रिया और गाइडलाइन तय की है।

NABCB के एक सीनियर अधिकारी ने नाम न पब्लिश करने की रिक्वेस्ट पर बताया कि, ‘सरकार ने सिर्फ एक्सपोर्ट के लिए हलाल सर्टिफिकेट से जुड़े नियम तय किए हैं। देश के अंदर इससे जुड़े कोई नियम अभी लागू नहीं हैं। जब कानून ही नहीं है, तो कोई भी किसी को भी हलाल सर्टिफिकेट दे सकता है। यह पूरी तरह से ग्राहक और सप्लायर या सर्विस देने वाले के बीच की बात होती है। इंडस्ट्री को अलग-अलग तरह के प्रोडक्ट्स और सर्विसेस की ज़रूरत होती है, तो वो किसी से भी सर्टिफिकेट ले सकती है।’

वहीं, इस बारे में जमीयत उलेमा-ए-हिंद हलाल ट्रस्ट के सचिव एडवोकेट नियाज़ अहमद फारूकी का कहना है कि, कोई बिना जांच–पड़ताल के फर्जी हलाल सर्टिफिकेट दे रहा है तो यह मुस्लिमों के साथ धोखा है। कोई भी मुस्लिम जब किसी उत्पाद पर हलाल का निशान देखता है, तो मान लेता है कि वह पूरी तरह इस्लामिक कानून के अनुसार बना है।

कन्कलूजन : भारत में हलाल सर्टिफिकेशन का बाजार गैर-मान्यता प्राप्त संस्थाओं और कंपनियों के बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी का मैदान बन गया है। यह एक व्यवस्थित नेटवर्क है जहां हलाल का नाम लेकर मुस्लिम खरीदारों को धोखा दिया जा रहा है, बिना किसी उचित जांच या मान्यता के।

हलाल सर्टिफिकेट वाले प्रोडेक्ट की बिक्री पर रोक के खिलाफ याचिका : यूपी के फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FSDA) ने 18 नवंबर 2023 को हलाल सर्टिफिकेट वाले फूड प्रोडक्ट्स, दवाओं और कॉस्मेटिक्स समेत दूसरे उत्पादों की बिक्री और स्टोरेज पर रोक लगा दी थी। हलाल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और जमीयत उलेमा-ए-हिंद महाराष्ट्र ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई है।

संस्थाओं का तर्क है कि, अगर धार्मिक कारणों से लोग हलाल सर्टिफिकेट वाले उत्पादों का इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो इससे दूसरे लोगों के हितों पर कोई असर नहीं पड़ता। उन्होंने याचिका में हलाल सर्टिफिकेट जारी करने वाली संस्थाओं पर यूपी में FIR दर्ज होने का भी विरोध किया था। सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी, 2024 को यूपी सरकार को नोटिस भेजा था। मामले की सुनवाई जारी है।

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देश के तीन बड़े खिलाड़ियों के कोच रहे इन दिग्गजों ने ये खुलासे भास्कर के स्पाई कैम पर किए हैं। डोमेस्टिक क्रिकेट में भास्कर की पड़ताल का सिलसिला दिल्ली के अलग–अलग थानों में दर्ज हुई तीन शिकायतों से हुआ। पूरी खबर पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें…।



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