अस्पताल में हाथ पर स्ट्रेचर में लेटा मरीज, हाथ में ग्लूकोज की बोतल पकड़कर खड़ा रिश्तेदार और वार्ड में मरीज के पट्टी से बांधे हाथ।
चंडीगढ़ के सेक्टर-32 स्थित सरकारी अस्पताल की इमरजेंसी में जमकर बदहाली की स्थिति है। मरीजों का इलाज बेड के बजाय स्ट्रेचर पर लिटाकर किया जा रहा है। ग्लूकोज की बोतल टांगने के लिए स्टैंड नहीं हैं। मरीजों के रिश्तेदारों को ग्लूकोज की बोतलें पकड़नी पड़ रही है
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हद तो यह है कि जब इस बारे में मेडिकल सुपरिटेंडेंट से पूछा गया तो अव्यवस्था पर चिंतित होने के बजाय वह ये पूछने लगे कि आपने अस्पताल में जाने के लिए किसकी परमिशन ली थी। हालांकि बाद में उन्होंने मरीज ज्यादा होने की बात कहकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की। दैनिक भास्कर एप ने गुरुवार (9 अक्टूबर) को यहां का जायजा लिया तो हालत बहुत ही बदतर नजर आए। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
सबसे पहले देखिए, इमरजेंसी के हालात के PHOTOS…
हाथ में ग्लूकोज की बोतल लेकर खड़ी महिला।

मरीज का स्ट्रेचर पर ही इलाज हो रहा है। बच्चे को ग्लूकोज की बोतल पकड़ाई गई है।

अस्पताल के वार्डों में जमीन पर गिरी खून लगी पट्टी।

वार्ड में मरीज को लगाने के बाद खुली रखी गई ग्लूकोज की बोतल
इमरजेंसी के हालात, मरीजों के रिश्तेदार स्टैंड बना दिए सेक्टर 32 के अस्पताल की इमरजेंसी में लोगों की भीड़ लगी दिखी। हाई रिस्क एरिया होने के बावजूद कोई रोक-टोक नहीं है। कई मरीज ऐसे हैं, जिनका इलाज बेड की जगह स्ट्रेचर पर ही लिटाकर किया जा रहा है। स्ट्रेचर पर स्टैंड नहीं तो ग्लूकोज की बोतल पकड़ने के लिए मरीजों के रिश्तेदार की स्टैंड की तरह बोतल पकड़वाकर खड़े कर दिए।
गेट पर सिक्योरिटी गार्ड खड़े हैं लेकिन वह सिर्फ इतना ही पूछते हैं कि कहां जाना है। कोई व्यक्ति वाकई में किसी काम से आया है या बेवजह, इसको लेकर किसी से कोई पूछताछ नहीं होती।
अल्ट्रासाउंड कराने वालों के लिए वेटिंग एरिया तक नहीं है। दूसरी मंजिल के वार्ड में भी बेसहारा लोगों को स्ट्रेचर पर लिटाया गया है। मरीज उठकर कहीं चला ना जाए, इसलिए पट्टियों से ही उनके हाथ बिस्तर से बांधे हुए हैं।
वार्ड में सरेआम निडिल लगी बोतल, खाली सीरिंज दिखाई दे रहे हैं। बायो मेडिकल वेस्टेज को भी लिफाफों में भरकर खुले में फेंका गया है। इमरजेंसी के बाहर भी खून से सनी पटिट्यां और चादरें बैड पर पड़ी हुई हैं।

मरीज के साथ आए रिश्तेदार महावीर ने कहा कि स्टाफ हाथ में पकड़ा गया, इसे कहां टांगू, कुछ पता नहीं।
मरीजों ने हालात पर क्या कहा…
- महिला बोली- डॉक्टर आएगा तो अल्ट्रासाउंड होगा: स्ट्रेचर पर लेटी एक महिला ने कैमरे के सामने आने से मना कर दिया। उन्होंने कहा- मैं 2 महीने तक यहां एडमिट रही, आज चेकअप कराने आई थी। मेरा अल्ट्रासाउंड होना है। सुबह से बाहर स्ट्रेचर पर बैठी हुई हूं। किसी बड़े डॉक्टर ने आना है, उसके बाद ही मेरा अल्ट्रासाउंड होगा।
- महावीर बोला- हाथ में बोतल पकड़ा दी, कहां जाना है, मुझे कुछ पता नहीं: महावीर ने कहा- मेरा रिश्तेदार चंडीगढ़ में फ्लैट से काम करते हुए गिर गया। एक घंटे पहले आया, एक्सरे लिखकर दे दिए। अब मुझे पता नहीं कि कहां जाना है?। मरीज को स्ट्रेचर पर लिटाकर हाथ में बोतल पकड़ाकर स्टाफ चला गया। अब मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा।
मेडिकल सुपरिटेंडेंट बोले- ज्यादा मरीजों से दिक्कत इस मामले में जब सेक्टर-32 के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉक्टर हरीश दाशारी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि इमरजेंसी में मरीजों की ज्यादा संख्या होने के कारण कई बार दिक्कत आती है। मरीजों को कोई परेशानी न हो, इस संबंध में आदेश जारी कर दिए जाएंगे।
