रांची49 मिनट पहले
- कॉपी लिंक
इसरो चीफ वी. नारायणन ने बुधवार को कहा कि भारत ने 2040 तक अपने नागरिकों को चंद्रमा पर उतारने का टारगेट तय किया है। वहीं, भारत का पहला मानव स्पेस मिशन ‘गगनयान’ 2027 में लॉन्च होना है।
नारायणन ने बताया कि इसरो 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) की स्थापना और 2026 तक तीन बिना मानव वाले गगनयान मिशन लॉन्च करने पर काम कर रहा है।
इनमें से पहला मिशन, जिसमें अर्ध-मानव रोबोट ‘व्योममित्रा’ शामिल होगा, दिसंबर 2025 में लॉन्च किया जाएगा।
नारायणन रांची स्थित बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (BIT), मेसरा के 35वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे।
नारायणन ने कहा, PM नरेंद्र मोदी ने स्वदेशी मानवयुक्त चंद्र मिशन के लिए 2040 की समय सीमा तय की है। इसके तहत हमें अपने नागरिकों को चंद्रमा पर उतारकर सुरक्षित वापस लाना होगा। इसके अलावा, शुक्र ग्रह (Venus) पर स्टडी के लिए ‘वीनस ऑर्बिटर मिशन (VOM)’ को भी मंजूरी मिल चुकी है।

भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन 2035 तक
इसरो प्रमुख ने बताया कि ‘भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन’ (BAS) की स्थापना 2035 तक की जाएगी। इसके शुरुआती मॉड्यूल 2027 से ही अंतरिक्ष में स्थापित किए जा सकते हैं।उन्होंने कहा, गगनयान मिशन में प्रगति हो रही हैं। क्रू मिशन से पहले तीन बिना मानव वाले मिशनों की योजना है। व्योममित्रा इस साल दिसंबर में उड़ान भरेगी, जबकि दो और मिशन अगले साल होंगे। मानवयुक्त गगनयान मिशन 2027 की पहली तिमाही तक संभव होगा।
नारायणन ने बताया कि PM मोदी के स्पष्ट रोडमैप और अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधारों की बदौलत इसरो आत्मनिर्भर और सशक्त स्पेस ईको सिस्टम बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
चंद्रयान-4,मंगल मिशन, और AXOM
उन्होंने कहा कि भारत की आने वाली परियोजनाओं में चंद्रयान-4, चंद्रयान-5, एक नया मंगल मिशन, और AXOM (खगोल विज्ञान वेधशाला मिशन) शामिल हैं।
इसरो प्रमुख ने बताया कि ‘आदित्य-L1 मिशन’ ने अब तक 15 टेराबाइट से अधिक सौर डेटा एकत्र किया है, जिससे सौर ज्वालाओं और अंतरिक्ष मौसम पर मूल्यवान जानकारी मिली है।
उन्होंने कहा कि भारत वैज्ञानिक और रणनीतिक प्राथमिकताओं के आधार पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए तैयार है। हम आत्मनिर्भरता पर ध्यान केंद्रित करते हुए भी जलवायु विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान जैसे वैश्विक मुद्दों पर सहयोग के लिए खुले हैं।

स्पेस क्षेत्र में 300 से अधिक स्टार्टअप
नारायणन ने बताया कि भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रोत्साहन और प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) की स्थापना के बाद स्टार्टअप्स और निजी कंपनियों का एकीकरण हुआ है। “कुछ साल पहले अंतरिक्ष क्षेत्र में केवल एक-दो स्टार्टअप थे, आज 300 से अधिक स्टार्टअप उपग्रह निर्माण, लॉन्च सेवाएं और डेटा एनालिटिक्स में काम कर रही हैं।
यह बदलाव भारत में खेती, डिजास्टर मैनेजमेंट, दूरसंचार, ट्रेन और वाहन निगरानी, मछली पालन जैसे क्षेत्रों में बढ़ती मांग को पूरा करने में सहायक है।
नारायणन ने बताया कि भविष्य के मानवयुक्त मिशनों के लिए भारत को अपनी लॉन्च क्षमता बढ़ाना होगा। पहले जहां हम 35 किलोग्राम तक भार ले जा सकते थे, अब हम 80 हजार किलोग्राम तक भार उठाने में सक्षम रॉकेट विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बदलेगा स्पेस क्षेत्र
उन्होंने बताया कि अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स और बिग डेटा जैसे क्षेत्रों का स्पेस मिशन में तेजी से उपयोग हो रहा है। जैसे 35 साल पहले किसी ने कंप्यूटर क्रांति की कल्पना नहीं की थी, वैसे ही AI और रोबोटिक्स भविष्य में स्पेस में बहुत महत्वपूर्ण होंगे।
इसरो प्रमुख ने बताया कि भारत आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। इसका अंतरिक्ष क्षेत्र अब वैश्विक मानकों को न केवल पूरा कर रहा है, बल्कि कई मामलों में उनसे आगे बढ़ चुका है।
उन्होंने कहा, चंद्रयान-1 से चंद्रमा पर पानी की खोज और चंद्रयान-3 से दक्षिणी ध्रुव पर पहली सॉफ्ट लैंडिंग जैसी उपलब्धियों ने भारत को विश्व रिकॉर्ड दिलाए हैं। आज भारत नौ स्पेस कैटेगरी में दुनिया में नंबर 1 है।
स्पेस क्षेत्र में भारत के कई कीर्तिमान
नारायणन ने यह भी बताया कि भारत अब उन चार देशों में शामिल हो गया है जिन्होंने अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक डॉकिंग और अनडॉकिंग की तकनीक हासिल की है।
उन्होंने बताया कि इसरो ने हाल ही में 100वां प्रक्षेपण (GSLV F15/NVS-02 मिशन) पूरा किया है और अब तीसरे लॉन्च पैड को मंजूरी मिल चुकी है, जिसकी अनुमानित लागत 4,000 करोड़ रुपए है और यह अगली पीढ़ी के रॉकेट (NGLV) को भी समर्थन देगा।
परमाणु ऊर्जा पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि भारत में वर्तमान में 8 प्रमुख परमाणु संयंत्रों में 23 रिएक्टर कार्यरत हैं, जिनमें तारापुर और भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र प्रमुख हैं।
ध्यान देने योग्य है कि वी. नारायणन ने जनवरी 2025 में इसरो अध्यक्ष पद का कार्यभार संभाला, इससे पहले वे लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम सेंटर (LPSC) के निदेशक रह चुके हैं — जो इसरो की सबसे महत्वपूर्ण इकाइयों में से एक है।
गगनयान मिशन से भारत को क्या हासिल होगा
- स्पेस एक बढ़ती हुई इकोनॉमी है, जो 2035 तक 1.8 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब 154 लाख करोड़ रुपए की हो जाएगी। इसलिए भारत का इसमें बना रहना जरूरी है।
- रूस, अमेरिका और चीन के बाद भारत स्पेस में इंसान भेजने वाला चौथा देश बन जाएगा।
- स्पेस के जरिए सोलर सिस्टम के अन्य पहलुओं की रिसर्च का रास्ता खुलेगा।
- भारत को खुद का स्पेस स्टेशन बनाने के प्रोजेक्ट में मदद मिलेगी।
- रिसर्च और डेवलपमेंट के क्षेत्र में नए रोजगार बनेंगे।
- निवेश बढ़ेगा, जिससे इकोनॉमी को बूस्ट मिलेगा।
- स्पेस इंडस्ट्री में काम कर रहे दूसरे देशों के साथ मिलकर काम करने का मौका मिलेगा।
ISRO ने ‘गगनयान मिशन’ की क्या-क्या तैयारी कर ली है और क्या बाकी है गगनयान मिशन का रॉकेट तैयार है और एस्ट्रोनॉट्स की ट्रेनिंग जारी है…
1. लॉन्च व्हीकल तैयार: इंसान को अंतरिक्ष में ले जाने लायक लॉन्च व्हीकल HLVM3 रॉकेट तैयार कर लिया गया है। इसकी सिक्योरिटी टेस्टिंग पूरी हो चुकी है। इस रॉकेट को पहले GSLV Mk III के नाम से जाना जाता था, जिसे अपग्रेड किया गया है।
2. एस्ट्रोनॉट्स सिलेक्शन और ट्रेनिंग: गगनयान मिशन के तहत 3 एस्ट्रोनॉट्स को स्पेस में ले जाया जाएगा। इसके लिए एयरफोर्स के 4 पायलटों को चुना गया। भारत और रूस में इनकी ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है। इन्हें सिम्युलेटर के जरिए ट्रेनिंग दी गई है। स्पेस और मेडिकल से जुड़ी अन्य ट्रेनिंग दी जा रही हैं।
3. क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल: एस्ट्रोनॉट्स के बैठने वाली जगह क्रू मॉड्यूल और पावर, प्रप्लशन, लाइफ सपोर्ट सिस्टम वाली जगह सर्विस मॉड्यूल् अपने फाइनल स्टेज में है। इसकी टेस्टिंग और इंटीग्रेशन बाकी है।
4. क्रू एस्केप सिस्टम (CES): लॉन्चिंग के दौरान किसी अनहोनी की स्थिति में क्रू मॉड्यूल को रॉकेट से तुरंत अलग करने के लिए क्रू एस्केप सिस्टम तैयार किया जा चुका है। पांच तरह के क्रू एस्केप सिस्टम सॉलिड मोटर्स बनाए गए हैं, जिनका सफल परीक्षण भी हो चुका है।
5. रिकवरी टेस्टिंग: ISRO और नेवी ने अरब सागर में स्पलैशडाउन के बाद क्रू मॉड्यूल की सुरक्षित वापसी के लिए टेस्टिंग की है। बैकअप रिकवरी के लिए ऑस्ट्रेलिया के साथ भी समझौता हुआ है।
6. मानव-रहित मिशन के लिए रोबोट: जनवरी 2020 में ISRO ने बताया कि गगनयान के मानव रहित मिशन के लिए एक ह्यूमोनोइड बनाया जा चुका है, जिसका नाम व्योममित्र है। व्योममित्र को माइक्रोग्रैविटी में एक्सपेरिमेंट्स करने और मॉड्यूल की टेस्टिंग के लिए तैयार किया गया है।
—————————–
यह खबर भी पढ़िए…
शुभांशु शुक्ला ऐसा क्या सीख रहे, जिससे 2 साल में भारतीय अंतरिक्ष जाने लगेंगे

धरती से 28 घंटे का सफर कर कैप्टन शुभांशु शुक्ला इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन यानी ISS पहुंचे थे। वो एक्सियम-4 मिशन का हिस्सा रहे, जिसकी एक सीट के लिए भारत ने 548 करोड़ रुपए चुकाए। भारत ने शुभांशु पर इतनी बड़ी रकम क्यों खर्च की, उन्होंने अंतरिक्ष में 14 दिन क्या-क्या किया और ये भारत के गगनयान मिशन के लिए कितना जरूरी। पूरी खबर पढ़ें…
