सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों द्वारा मुझे चार माह से लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। डराया-धमकाया जा रहा है। मुझे ऑपरेशन थिएटर (OT) की पोस्टिंग से बेदखल करने की धमकी दी गई। मेरी मेडिकल लीव को लेकर झूठी अफवाहें फैलाई। मैं लगातार परेशानी झेल र
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यह गंभीर आरोप इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज की पीजी फर्स्ट ईयर की स्टूडेंट ने लगाए हैं। प्रसूति एवं स्त्री रोग (Obstetrics and Gynaecology) विभाग में पढ़ रही इस जूनियर डॉक्टर ने यूजीसी की राष्ट्रीय एंटी रैगिंग सेल में इसकी शिकायत दर्ज कराई है। उसने आरोप लगाया है कि सीनियर रेजीडेंट डॉक्टरों ने मुझे अत्यधिक और रात की ड्यूटी करने को मजबूर किया। मुझे ऑपरेशन थिएटर की पोस्टिंग से बेदखल करने की धमकी दी और मेरे अवकाश को लेकर झूठी अफवाहें फैलाईं जिससे वह गहरी मानसिक परेशानी में चली गई।
छात्रा ने बताया कि दबाव सहन न कर पाने के कारण उसे लंबी मेडिकल लीव लेनी पड़ी। खास बात यह कि जूनियर स्टूडेंट के परिवार ने भी माना कि मानसिक रूप से टूट चुकी थी और वर्तमान में उसका इलाज चल रहा है।
एंटी रैगिंग कमेटी के ये हैं सदस्य
एंटी रैगिंग कमेटी को की गई शिकायत में यह भी बताया कि बात काम के बोझ की नहीं है, बल्कि मानसिक रूप से किए गए अत्याचार की है। उसे बुरी तरह अपमानित किया गया। जिससे उसकी मानसिक स्थिति खराब हो गई है।
शिकायत में चार सीनियर रेजीडेंट डॉक्टरों के नाम
एंटी रैगिंग सेल में दर्ज शिकायत में सीनियर रेजीडेंट डॉक्टरों के नाम हैं। इन पर उसे डराने और उसके खिलाफ अपमानजनक माहौल बनाने का आरोप है। पीड़िता स्टूडेंट कहना है कि उसके सीनियरों ने एक वाट्सएप ग्रुप पर उसके बारे में गलत मैसेज चलाए गए और उसे “झूठी” बताया और लिखा कि उसकी मेडिकल लीव फर्जी है। उन्होंने चेतावनी दी थी कि वापसी के बाद उसे छह महीने तक ओटी ड्यूटी नहीं दी जाएगी और सजा के तौर पर अलग से नाइट शिफ्ट करनी होगी।
स्टूडेंट का आरोप है कि लगातार प्रताड़ना के कारण मेरी तबीयत तेजी से बिगड़ी और चार महीनों में उसका वजन 22 किलो से अधिक घट गया। उसे चार दिनों तक एमवाय अस्पताल में एडमिट रहना पड़ा और हालत बिगड़ने पर वह घर लौट गई।
एंटी रैगिंग कमेटी ने शुरू की जांच
मेल के माध्यम से शिकायत मिलने के बाद एंटी रैगिंग कमेटी ने जांच शुरू कर दी है। समिति की अध्यक्ष डॉ. पूनम देयसरकार ने पुष्टि की कि जूनियर स्टूडेंट ने शिकायत की है। कमेटी ने जांच प्रारंभ कर दी है। कमेटी पीड़िता और सीनियर रेजीडेंट डॉक्टरों की पहचान कर उनके बयान दर्ज करेगी। इसके साथ जल्द ही अपनी रिपोर्ट राष्ट्रीय एंटी रैगिंग सेल और कॉलेज प्रशासन को सौंपेगी। उधर, डॉ. निलेश दलाल (HOD, प्रसूति व स्त्री रोग विभाग) का कहना है का मामला एंटी रैगिंग कमेटी के पास है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
