मौसम फिर करवट लेने वाला है। दिन और रात के पारे में करीब एक पखवाड़े से 11 से 13 डिग्री सेल्सियस का फासला है। नतीजा ये कि सुबह-शाम ठंडक, लेकिन दोपहर में गर्मी महसूस हो रही है। पारे की उठापटक के बीच मौसमी बीमारियों का दायरा बढ़ता जा रहा है। शहर से लेकर ज
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बीते एक पखवाड़े (11 से 24 अक्टूबर) के दौरान जिले में स्क्रब टाइफस के रिकॉर्ड 109 मरीज मिले हैं। ये आंकड़े इसलिए भी डराते हैं कि इस रोग से इस साल 7 लोग दम तोड़ चुके हैं। एमबी में मलेरिया के 48, डेंगू के 14 और स्क्रब टाइफस के 17, जबकि जिलेभर के सीएचसी, पीएचसी व सब सेंटर पर डेंगू के 23, मलेरिया के 22, स्क्रब टाइफस के 92 केस सामने आए हैं। चिकनगुनिया के भी 2 केस हैं। जिले में स्क्रब टाइफस सबसे बड़ी चिंता के रूप में उभरा है। इसका आंकड़ा पिछले सप्ताह 44 था, जो मौजूदा सप्ताह में 48 तक जा पहुंचा है। आंकड़े बता रहे हैं कि गत 19 अक्टूबर को मलेरिया के केस अचानक बढ़कर 10 हो गए। जबकि स्क्रब टाइफस हर दिन रिपोर्ट हुआ। इसके दो-दो केस 15 और 17 अक्टूबर को सामने आए थे।
2015-16 में आया रोग, अब प्रदेश में सबसे आगे
एमबी अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. महेश दवे ने बताया कि उदयपुर में स्क्रब टाइफस पहली बार वर्ष 2015-16 में सामने आया था। शुरुआत में इक्के-दुक्के केस आते थे। अब प्रदेश में सबसे ज्यादा केस यहीं आते हैं। इसकी बड़ी वजह बारिश ज्यादा हाेने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन, घास और इसमें पनपने वाला जीव पिस्सू है।
गांवों में ज्यादा बांध या जल जमाव होने से वनस्पति भी पनपती है। ऐसे में बांधों के आसपास की घनी झाड़ियां, घास और अनियंत्रित वनस्पति पिस्सू को बढ़ाती है। यहां रहने वाले चूहे और छोटे जीव पिस्सू के लिए भोजन का स्रोत होते हैं। पिस्सू के लार्वा, जिन्हें चिगर्स कहते हैं, संक्रमित चूहों से जीवाणु ग्रहण कर लेते हैं। ये संक्रमित चिगर्स ही मनुष्यों को काटते हैं, जिससे रोग ज्यादा फैलता है।
काम की बात- एसी-तेज पंखे का उपयोग न करें, खान-पान पर ध्यान जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार मौसम बदलने पर शरीर को नए तापमान और वातावरण के अनुसार खुद को ढालने में समय लगता है। इस दौरान इम्यून सिस्टम कमजोर पड़ जाता है। नतीजतन वायरस और बैक्टीरिया आसानी से शरीर को प्रभावित कर देते हैं। ठंड-गर्मी के उतार-चढ़ाव से सर्दी, खांसी, फ्लू, एलर्जी, गले और स्किन इन्फेक्शन जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि यह दोहरा मौसम है। फिलहाल एसी या तेज पंखे का उपयोग नहीं करें। खान-पान भी बदलने की जरूरत है। पौष्टिक और गर्म खाना खाएं। भरपूर नींद लें। फल-सब्जियों का नियमित उपयोग करें। गला जाम होने या सर्दी-जुकाम के आसार लगने पर गुनगुना पानी पीएं। मच्छरों से बचाव भी जरूरी है। लक्षण गंभीर या स्थायी लगने लगें तो तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लें।
विभाग बोला-सर्वे जारी, दवाइयां भी बंटवा रहे सीएमएचओ डॉ. अशोक आदित्य ने बताया कि मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में सर्वे जारी है। आमजन को मच्छर जनित बीमारियों से बचाव के उपाय बताए जा रहे हैं। स्क्रब टायफस, मलेरिया और डेंगू की दवाइयां भी दी जा रही हैं। उधर, एमबी हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉ आर.एल. सुमन का कहना है कि बदलता मौसम सर्दी, जुकाम और बुखार को तेजी से फैलाती है, खान-पान में होने वाले बदलाव को भी मौसम के अनुरूप करना होगा।
