मॉस्को7 मिनट पहले
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रूस ने दुनिया की पहली न्यूक्लियर पावर्ड यानी परमाणु ऊर्जा से चलने वाली मिसाइल बुरेवस्तनिक का सफल परीक्षण किया है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने रविवार को इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि इस मिसाइल के सभी टेस्ट पूरे हो चुके हैं।
पुतिन ने कहा कि ऐसी मिसाइल दुनिया के किसी भी देश के पास नहीं है। उन्होंने इस मिसाइल को सर्विस में लेने के लिए सेना को तैयारी करने के निर्देश भी दे दिए हैं।
रूसी सेना के प्रमुख वैलेरी गेरेसिमोव ने पुतिन को बताया कि मिसाइल का सफल टेस्ट 21 अक्टूबर को किया गया। इस टेस्ट में बुरेवस्तनिक ने करीब 15 घंटे तक उड़ान भरी। इस दौरान मिसाइल ने 14 हजार किलोमीटर की दूरी तय की।
हालांकि गेरेसिमोव ने बताया कि यह मिसाइल की अधिकतम रेंज नहीं है, यह इससे अधिक दूरी भी तय कर सकती है।

पुतिन ने 2023 में दावा किया था कि मिसाइल का अंतिम सफल परीक्षण हो चुका है, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हो सकी थी। (फाइल फोटो)
क्या है बुरेवस्तनिक मिसाइल?
बुरेवस्तनिक (9M730) एक क्रूज मिसाइल है, जो सामान्य ईंधन की बजाय न्यूक्लियर रिएक्टर से चलती है। इस वजह से यह मिसाइल लगभग अनलिमिटेड यानी असीमित दूरी तक उड़ान भर सकती है। साथ ही दुश्मन के एंटी-मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में सक्षम है।
सामान्य इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) अंतरिक्ष में तय मार्ग पर जाती हैं, जिन्हें ट्रैक किया जा सकता है। जबकि बुरेवस्तनिक सिर्फ 50–100 मीटर की ऊंचाई पर उड़ती है और लगातार रास्ता बदलती रहती है, जिससे इसे पकड़ना लगभग असंभव हो जाता है।
पुतिन ने पहले भी इसे अजेय हथियार बताया था। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह उड़ान के दौरान अपनी दिशा बदल सकती है, जिससे इसे रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है।
अमेरिकी वायुसेना की रिपोर्ट के अनुसार, मिसाइल के सर्विस में आने के बाद रूस के पास इंटरकॉन्टिनेंटल रेंज यानी 10 से 20 हजार किमी तक हमला करने की क्षमता होगी। इससे रूस किसी भी हिस्से से अमेरिका तक हमले में सक्षम होगा।
मिसाइल की क्षमताओं को लेकर उठते रहे हैं सवाल
अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक अध्ययन संस्थान (IISS) ने कहा कि रूस के सामने इस मिसाइल को लेकर अभी भी कई तकनीकी चुनौतियां हैं। इनमें मिसाइल के परमाणु इंजन को सुरक्षित और भरोसेमंद ढंग से संचालित करने की चुनौती सबसे बड़ी है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इसके कई परीक्षण असफल रहे और एक दुर्घटना में कई लोगों की मौत हुई थी।
इस मिसाइल के विकास में कई तकनीकी दिक्कतें आई हैं। 2016 से अब तक दर्जनों परीक्षणों में केवल आंशिक सफलता मिली है।
2019 में नेनोक्षा इलाके में एक परीक्षण के दौरान हुए विस्फोट में 7 वैज्ञानिकों की मौत हुई थी। साथ ही पास के सेवरोदविंस्क शहर में रेडिएशन स्तर बढ़ गया था। बाद में रूस ने स्वीकार किया कि यह हादसा परमाणु-संचालित मिसाइल के परीक्षण के दौरान हुआ था।
