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पंजाब में 24 घंटे में पराली जलाने के 283 मामले: सीजन में एक दिन के सर्वाधिक; सबसे ज्यादा सीएम के जिले में, 402 नोडल अधिकारियों को नोटस – Amritsar News

पंजाब में 24 घंटे में पराली जलाने के 283 मामले:  सीजन में एक दिन के सर्वाधिक; सबसे ज्यादा सीएम के जिले में, 402 नोडल अधिकारियों को नोटस – Amritsar News


पंजाब में आने वाले दिनों में और बढ़ सकते हैं पराली जलाने के मामले।

पंजाब में धान की कटाई के बाद अब पराली जलाने के मामले बढ़ना शुरू हो गए हैं। बुधवार को इस सीजन में एक ही दिन में सर्वाधिक मामले दर्ज किए गए हैं। मामले 1200 के पार पहुंच गए हैं। जिसके बाद सरकार ने इस पर सख्ती की है।

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पंजाब सरकार ने 402 नोडल अफसरों को नोटिस भेजा है। उनसे जवाब मांगा है कि उनके इलाकों में आगजनी की घटनाएं क्यों नहीं रोकी जा सकीं। इसका जवाब नोडल ऑफिसरों को दो सप्ताह में देना होगा, अन्यथा कार्रवाई भी हो सकती है।

प्रदूषण बोर्ड की तरफ से जारी आंकड़ों के अनुसार बुधवार 283 नए मामले दर्ज किए गए। 15 सितंबर से 29 अक्टूबर तक एक ही दिन में पराली जलाने के ये सर्वाधिक मामले हैं। इसके बाद अब तक राज्य में कुल 1216 पराली जलाने के मामले सामने आ चुके हैं।

सीएम के जिले में सर्वाधिक मामले

बीते 24 घंटों में सबसे ज्यादा मामले मुख्यमंत्री भगवंत मान के जिले संगरूर में देखने को मिले। संगरूर में 79, तरनतारन में 43, फिरोजपुर में 32, पटियाला में 25, बठिंडा में 19 और मानसा में 16 दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा कई जगह पराली जलाने के मामले सामने आए हैं।

15 सितंबर से 29 अक्टूबर शाम तक कुल 1216 मामले सामने आए हैं। इसमें सबसे ज्यादा तरनतारन में 296, अमृतसर में 173, संगरूर में 170, फिरोजपुर में 123, पटियाला में 73, बठिंडा में 61, कपूरथला में 48, गुरदासपुर में 43 और बरनाला में 28 मामले दर्ज किए गए हैं।

किसानों के खिलाफ भी एक्शन तेज

सरकार भी इस मामले में सख्त दिख रही है। सरकार ने अब तक 331 किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है। जबकि, 443 किसानों पर करीब 23 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है। पर्यावरण विभाग ने कहा है कि अगर आने वाले दिनों में पराली जलाने की घटनाएं नहीं रुकीं तो और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

कटाई में देरी के कारण अब बढ़ेंगे मामले

राज्य में पराली जलाने का सीजन सितंबर मध्य से शुरू होता है और नवंबर तक जारी रहता है। यह समस्या हर साल वायु गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित करती है। इस साल मौसम परिवर्तन के कारण धान की फसल को पकने में समय लगा। धान की कटाई में देरी के बाद अब पराली जलाने के मामलों में बढ़ौतरी का खतरा बड़ने लगा है।



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