हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में अवैध खनन का कारोबार तेज़ी से बढ़ रहा है। इससे ब्यास और उसकी सहायक नदियाँ (न्युगल, बनेर) खतरे में आ गई हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए उपायुक्त हेमराज बैरवा ने अवैध खनन रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
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उपायुक्त की अध्यक्षता में मंगलवार को अवैध खनन गतिविधियों और एनजीटी के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन पर उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक हुई। बैठक में बिना अनुमति खनन करने वालों पर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए। अवैध खनन पर ड्रोन से निगरानी रखी जाएगी।
उन्होंने कहा कि अवैध खनन करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा, क्योंकि यह न केवल पर्यावरण बल्कि स्थानीय बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचाता है। इससे भूजल रिचार्ज घट रहा है इसके साथ नदियों को मार्ग बदलने से फसलों को भी नुकसान हो रहा है।
अवैध खनन के आरोप में पकड़े गए ट्रक (फाइल फोटो)
कितना खतरा भूजल का रिचार्ज रुका, नदियों ने प्राकृतिक मार्ग बदला
- नदियां को तल मानक से ज्यादा गहरें:अवैध खनन के कारण नदियों के तल मानक से अधिक गहरे हो गए हैं, जिससे भूजल रिचार्ज रुक गया है। बनेर और न्युगल नदियों के किनारे स्थित किसानों के कुएँ सूख गए हैं। इसके अलावा, नदी तल के गहरा होने से पुलों की नींवें कमजोर हो रही हैं, जिससे उनके अस्थिर होने का खतरा बढ़ गया है।
- कटाव बढ़ा, फसलों को नुकसान:संसरपुर टैरेस और हरिपुर के पास ब्यास नदी ने अपना प्राकृतिक मार्ग बदल लिया है, जिससे किनारों पर कटाव बढ़ गया है। पालमपुर और शाहपुर के पास लगे क्रशरों से निकलने वाली धूल चाय के बागानों और अन्य फसलों पर जमा हो रही है, जिससे पैदावार में कमी आ रही है।
डीसी ने दिए ये 5 बड़े निर्देश:
- संयुक्त निरीक्षण दल सक्रिय: राजस्व, पुलिस, वन और खनन विभाग के संयुक्त दल बनाकर संवेदनशील स्थलों का नियमित निरीक्षण होगा।
- हाई-टेक निगरानी: संवेदनशील खनन क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे और ड्रोन सर्वेक्षण के माध्यम से निगरानी की जाएगी।
- कंट्रोल रूम: अवैध खनन की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए एक कंट्रोल रूम स्थापित किया जाएगा।
- नियमित रिपोर्टिंग: एसडीएम और खनन अधिकारियों को अपने क्षेत्रों की तुरंत रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है।
- जवाबदेही और पारदर्शिता: खनन से जुड़ी सभी गतिविधियों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
