फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी। विस्फोटक सामग्री के मामले में यहीं का डॉ. मुजम्मिल शकील गिरफ्तार किया गया है।
फरीदाबाद के धौज व फतेहपुरा तगा में 2900 किलो विस्फोटक मिलने के मामले की परतें उधड़ने लगी हैं। इस पूरे मामले में धौज में स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी साजिश का केंद्र बनती दिख रही है। अभी तक की जांच में यूनिवर्सिटी के 2 डॉक्टर्स पहले ही गिरफ्तार हो चुके ह
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धौज में डॉ. मुजम्मिल शकील के किराए के कमरे से विस्फोट मिले। सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तारी से पहले वह 15 दिन की छुट्टी लेकर गया था। इस दौरान जम्मू-कश्मीर के पुलवामा भी पहुंचा। जांच एजेंसियों का कहना है कि इसी अवधि में उसने अपने संपर्कों से मुलाकात की और बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री एकत्रित की। अल-फलाह यूनिवर्सिटी में डॉ. मुजम्मिल कैजुअल सर्जन था।
इस केस में जिस डॉक्टर शाहीन शाहिद की गिरफ्तारी हुई है। वो लखनऊ की रहने वाली है। यूनिवर्सिटी में वह जूनियर डॉक्टरों को गाइड करती थी। वह डॉ. मुजम्मिल की बेहद करीबी थी। शाहीन भारत में जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग ‘जमात-उल-मोमीनात’ की हेड बताई जा रही है। पाकिस्तान में आतंकी अजहर मसूद की बहन सादिया इसकी चीफ है।
फतेहपुरा तगा में इमाम के घर रात बिताई जांच अधिकारियों के अनुसार, डॉ. मुजम्मिल फतेहपुरा तगा क्षेत्र में एक और मकान किराए पर लेने की कोशिश में था। इसके लिए उसने इलाके के इमाम सहित कई लोगों से बातचीत भी की थी। छुट्टियों से लौटने के बाद वह फतेहपुरा तगा में इमाम के घर पर एक रात ठहरा भी था। तगा स्थित घर से 2563 किलो विस्फोटक सामग्री मिली थी। वहीं धौज स्थित कमरे से 360 किलो अमोनियम नाइट्रेट, एक राइफल और कई अन्य हथियार बरामद किए थे। यह घर यूनिवर्सिटी से 300 मीटर की दूरी पर है।
यूनिवर्सिटी संदेह के घेरे में आई अल-फलाह यूनिवर्सिटी के तीन डॉक्टरों मुजम्मिल शकील और शाहीन शाहिद की एक संदिग्ध आतंकी मॉड्यूल में गिरफ्तारी के बाद यूनिवर्सिटी जांच के घेरे में आ गया है। मंगलवार को दिनभर यूनिवर्सिटी में छापेमारी और जांच चली। पुलिस ने अब तक करीब 13 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की है। बताया जा रहा है कि इस दिल्ली ब्लास्ट में मोहम्मद उमर नबी मारा जा चुका है। i-20 कार में विस्फोट के साथ उसने खुद को भी उड़ा लिया। वह अलफलाह यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर था।

पुलिस की टीमों ने 11 नवंबर को यूनिवर्सिटी से 13 लोगों को हिरासत में लिया। इनमें डॉक्टर्स और स्टूडेंट्स शामिल हैं।
डॉ. शाहीन की कार इस्तेमाल करता था मुजम्मिल जांच में यह भी पता चला है कि डॉ. मुजम्मिल को लेडी डॉक्टर शाहीन शाहिद ने कार दी थी। डॉ. शाहीन की कार ही मुज्जमिल नियमित रूप से इस्तेमाल करता था। लेडी डॉक्टर यूनिवर्सिटी के कई जूनियर डॉक्टरों को गाइड करती थीं और डॉ. मुज्जमिल भी उन्हीं में से एक था। अस्पताल के अन्य डॉक्टरों के अनुसार, दोनों अक्सर साथ में लंच करते थे।
स्टूडेंट्स के ब्रेनवॉश करने का शक जांच अधिकारियों का कहना है कि इस महिला डॉक्टर द्वारा गाइड करने के बहाने कुछ छात्रों को प्रभावित करने और उनका ब्रेनवॉश करने की बात भी सामने आई है। मंगलवार को यूनिवर्सिटी कैंपस पहुंची जांच टीम ने कुछ जूनियर डॉक्टरों और छात्रों से डॉ. शाहीन को लेकर करीब 12 लोगों से पूछताछ की जिनमें कुछ डॉक्टर और कुछ स्टूडेंट्स हैं।
13 सितंबर को किराए पर लिया था कमरा पुलिस की जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि यूनिवर्सिटी रोड पर स्थित जिस जगह से विस्फोटक सामग्री मिली, वहां नीचे सीमेंट का गोदाम है और ऊपर मकान मालिक ने किराए पर कमरे बना रखे हैं। इन्हीं में से एक कमरा डॉ. मुज्जमिल ने 13 सितंबर को किराए पर लिया था। मंगलवार को पंचकूला मुख्यालय से सीआईडी की टीम एसपी जितेश गहलावत के नेतृत्व में मौके पर पहुंची और वहां विस्तृत छानबीन की।

11 नवंबर को पुलिस की टीमें डॉ. मुजम्मिल के धौज स्थित घर के मकान मालिक के पास पहुंची थी। यहां पता चला कि उसने 13 सितंबर को किराए पर कमरा लिया था।
पिता बोले- बेटी के आतंकी संपर्क का नहीं पता डॉ. शाहीन शाहिद के पिता सईद अंसारी ने लखनऊ में बताया कि उनके तीन बच्चे हैं। सबसे बड़ा बेटा मोहम्मद शोएब है, जो साथ रहता है। दूसरी नंबर की बेटी डॉ. शाहीन शाहिद और तीसरा बेटा डॉ. परवेज अहमद अंसारी हैं। बेटी डॉ. शाहीन शाहिद के आतंकी होने के बारे में सुन रहे हैं, लेकिन यकीन नहीं है।

यूनिवर्सिटी में MBBS की 260 सीटें दैनिक भास्कर एप से बातचीत में यूनिवर्सिटी के कुछ स्टूडेंट्स ने बताया कि वे यहां एडमिशन लेकर अब फंसा हुए महसूस कर रहे हैं। यूनिवर्सिटी के MBBS कोर्स में 260 सीटें हैं, जबकि मेडिकल कॉलेज में करीब 950 छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। इनमें कई NRI भी शामिल हैं। छात्रों के अनुसार, अधिकांश को मुजम्मिल नामक डॉक्टर के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी। स्थानीय ग्रामीणों ने भी बताया कि उन्होंने मुजम्मिल को कभी नहीं देखा।
यूनिवर्सिटी की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल भी उठे हैं। छात्रों का कहना है कि एक ही गेट से फैकल्टी, स्टूडेंट्स, स्कूल के बच्चे, हॉस्पिटल के कर्मचारी, डॉक्टर और मरीज सभी की एंट्री होती है, जिससे पहचान और सुरक्षा जांच मुश्किल हो जाती है। फिलहाल पुलिस ने यूनिवर्सिटी परिसर को सुरक्षा घेरे में लेकर जांच तेज कर दी है। विस्फोटक पदार्थ कहां से आया और उसका मकसद क्या था, यह पता लगाने के लिए जांच एजेंसियां सक्रिय हैं।
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