रात का अंधेरा था। सड़क सुनसान थी। 8 लड़कों ने उसे घेर लिया, खूब पीटा और उसके सारे कपड़े फाड़कर निर्वस्त्र कर दिया। उसके साथ सेक्सुअल हैरेसमेंट किया गया। केवल इसलिए कि वह बेली डांसर है- और वह भी एक लड़का होकर। कुछ सालों बाद, आज जब वही लड़का मंच पर आता
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ब्लैकबोर्ड में इस बार पुरुष बेली डांसरों की स्याह कहानी। औरत कहकर इन डांसरों का मजाक उड़ाया गया। इनके साथ मारपीट की गई और इन्हें घर छोड़ना पड़ा। आज ये देश के चर्चित बेली डांसर हैं।
मुंबई के रहने वाले राहुल गुप्ता इस समय हरियाणा के गुरुग्राम में रहते हैं। वह एक बेली डांसर हैं। यह डांस आमतौर पर महिलाएं करती हैं। इसमें डांसर्स अपनी कमर और पैरों की खास मूव करता है, जिससे दर्शक तालियां बजाने को मजबूर होते हैं। राहुल बताते हैं- ‘हां मैं बचपन से ही डांसर बनना चाहता था, लेकिन मुझे नहीं पता था कि बेली डांसर ही बनूंगा।’
वह कहते हैं- ‘मैं जब पांच साल का था, तब कथक डांस शुरू किया। मेरी मां ने ही इसके लिए प्रेरित किया था। कथक सीखने के दौरान कई अलग-अलग डांस सीखे, लेकिन किसी में भी मजा नहीं आ रहा था। ऐसा महसूस होता कि मैं खुद से मिल नहीं पा रहा हूं। अपनी आत्मा नहीं ढूंढ़ पा रहा। मतलब डांस तो कर रहा था, लेकिन उससे दिल से कनेक्ट नहीं हो पा रहा था।’
‘एक दिन टीवी पर पहली बार बेली डांस देखा। उसके बाद तो सब कुछ बदल गया। लगा कि इस डांस में कुछ अलग बात है। फिर इस डांस को आजमाना शुरू किया। इसको करते हुए ऐसा महसूस होता कि इसमें खास ग्रेस यानी खूबसूरती है। सच कहूं तो यही डांस मेरे अंदर की महिला वाली खूबसूरती को सामने लेकर आया। यह खूबसूरती और किसी डांस में नहीं आ पा रही थी।’
‘लेकिन इसे सीखने के लिए मुझे कोई टीचर नहीं मिल रहा था। मैंने यूट्यूब और टीवी पर देख-देखकर इसे करना शुरू किया। इस दौरान मुझे एक टीचर मिल गए। उनके यहां एडमिशन लेने गया। मेरी मां भी साथ गईं। मैं खुशनसीब था कि मां साथ थीं। मां ने इस डांस को लेकर महिला-पुरुष की मानसिकता से ऊपर उठकर मेरा साथ दिया।’
राहुल आगे जोड़ते हैं- पापा को जब पता चला कि मैं बेली डांस करता हूं तो वो हैरान थे। उन्हें लगा कि लड़का होकर मैं लड़कियों की तरह कमर मटकाता हूं। हालांकि, अपने टीचर के पास मैंने लंबी ट्रेनिंग ली और एक प्रोफेशनल बेली डांसर बन गया।
वह कहते हैं कि इस डांस की ट्रेनिंग दौरान लोग बहुत चिढ़ाते थे। कहते- तुम हिजड़े की तरह नाचते हो। ‘गे’, ‘छक्का’ हो। ‘इम्पोस्टर’ यानी ‘बहुरूपिया’ हो। तब उनसे कहता- आप लोग जिनका नाम ले रहे हों, क्या वे इंसान नहीं हैं?
‘इस तरह मेरा बहुत मजाक उड़ाया जाता। कई बार तो ऐसा लगा कि जो कुछ कर रहा हूं वो पाप है। बहुत गंदा काम है। लोग मुझे स्वीकार ही नहीं कर रहे थे। एक बार तो मन बना लिया कि अब से बेली डांस नहीं करूंगा। कुछ दिन के लिए इसे बंद कर दिया। उस दौरान सोचा… अगर इसी तरह लोगों के कहने पर चीजों को छोड़ता रहा, तो अपनी जिंदगी में कुछ भी हासिल नहीं कर पाऊंगा। बहुत सोचने के बाद मैंने ठान लिया- अपनी पहचान से समझौता नहीं करूंगा।’
उसके बाद इस डांस को फिर से शुरू किया। इसे एक प्रमाणिक आर्ट और इजिप्शियन यानि मिस्र के क्लासिक डांस के तौर पर देखने लगा। दरअसल, यह डांस कैबरे आर्ट फॉर्म- यानी संगीत, नृत्य, गीत, हास्य और थिएटर की मिली-जुली कला वाला डांस नहीं है। इसको कोई भी ट्राई कर सकता है।
राहुल के इस सफर में एक किस्सा घटा। उसने उन्हें घर छोड़ने को मजबूर कर दिया। वह बताते हैं, ‘एक बार मैंने एक रियलिटी शो में डांस किया। वहां पापा भी साथ गए थे। मेरे जान-पहचान के भी लोग थे। शो के बाद कुछ लोगों ने मेरे पापा से कहा- आप अपने बेटे से ये क्या करवा रहे हो। इस डांस को तो लड़कियां करती हैं। उस दिन पापा बहुत दुखी हुए थे। वह नाराज होकर घर लौट आए थे।’
‘वो दिन मेरे लिए सबसे मुश्किल साबित हुआ। घर आया तो पापा ने मुझे बहुत डांटा और इस डांस को छोड़ने को कहा। बात इतनी बढ़ी कि उन्होंने मुझे मारा और घर से निकाल दिया। उस दिन चेहरे पर मायूसी लेकर घर से निकल गया। उस दिन ठान लिया कि किसी भी कीमत पर रुकूंगा नहीं। लोगों को एक अच्छा बेली डांसर बनकर दिखाऊंगा।’
राहुल कहते हैं कि उस वक्त मेरी मां ने कहा था- मैं जो कर रहा हूं, वो गलत नहीं है। हालांकि पापा को गलत नहीं मानता। उन्हें लगता था कि कुछ चीजें लड़कों के लिए बनीं हैं और कुछ लड़कियों के लिए। वह नहीं समझ रहे थे कि समय बदल गया है। आज अगर लड़कियां माइकल जैक्सन से प्रेरित हो सकती हैं, तो लड़के माधुरी दीक्षित की तरह डांस क्यों नहीं कर सकते?
घर से निकाले जाने के बाद राहुल हरियाणा के गुरुग्राम में आकर रहने लगे। यहां जमकर बेली डांस की प्रैक्टिस की। वह कहते हैं कि यहां रहते हुए कई छात्र उनसे बेली डांस सीखने आने लगे। गुरुग्राम में अक्सर मंच पर प्रोग्राम करने जाता। लेकिन यहां भी सुकून नहीं था। लोगों ने तरह-तरह की गालियां दीं।
वह कहते हैं, ‘गुरुग्राम जैसे शहर में, रास्ते से गुजरते वक्त कहते- देखो, छक्का जा रहा है। मुझे रां@#’, भां@#, नचनिया कहकर बुलाया। इस डांस की वजह से मुझे बहुत दिक्कतें झेलनी पड़ी।
राहुल की आवाज में यह कहते हुए बड़ा दर्द था- ‘आखिर आज जब लड़कियां गाड़ी चलाती हैं या पायलट बनती हैं, तो उन्हें खूब सराहा जाता है। लेकिन अगर कोई लड़का शेफ बन जाए, डांसर बन जाए, डिजाइनर बन जाए तो उस पर तंज कसे जाते हैं। उसे ‘गे’, ‘छक्का’, ‘हिजड़ा’, ‘मामू’- और न जाने क्या-क्या कहा जाता है।’
यही नहीं, जब मैंने अपने डांस के कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर डाले, तो मुझे उम्मीद थी कि लोग सराहेंगे। लेकिन हुआ उल्टा। लोगों ने मेरा मजाक उड़ाया। कहा- ‘तू मर्द के नाम पर कलंक है, मर क्यों नहीं जाता।’
कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर मेरा एक वीडियो वायरल हुआ। उसके बाद तो मेरा खाना-पीना और सोना हराम हो गया। लोग उस वीडियो की मीम बनाने लगे। उसमें वे मुझे गलत तरीके से दिखाते। ‘मैं बहुत डर गया था। खुद को कमरे में बंद कर लिया। कई दिनों तक बाहर नहीं निकला। आस-पास रहने वाले लोगों से डर लगने लगा था। डिप्रेशन में चला गया। डेढ़ साल तक डिप्रेशन में रहा। कई बार लगा कि सुसाइड कर लूं।’
‘आखिरकार मैं एक मनोचिकित्सक के पास गया। उन्होंने मेरी काउंसलिंग की। कहा कि अगर तुम्हें ठीक होना है, तो दोबारा डांस शुरू कर दो। ऐसा नाचो कि पीछे मुड़कर मत देखो। उस दिन तो मेरे जैसे नया जन्म हुआ था। उसके बाद फिर से अपने पैरों पर खड़ा हो पाया।’
यह कहते हुए उनकी आंखों में अब डर नहीं, चमक है। वो मुस्कुराते हैं। कहते हैं कि कला का औरत-मर्द से कोई लेना-देना नहीं। अगर लड़कियां आज मर्दों वाले काम कर सकती हैं, तो लड़के भी अपनी कमर की लचक से समाज की सोच हिला सकते हैं। आज तो मैं दूसरे देशों के लोगों को भी बेली डांस सिखा रहा हूं।
वह कहते हैं- ‘मैं चाहता हूं कि जो मेरे साथ हुआ, वो किसी और के साथ न हो। अगर मेरी तरह कोई दिक्कत में हो तो, वो मुझसे मिल सकता है। मुझे उसकी मदद करके बहुत खुश मिलेगी।’
आखिर में कहूंगा- ‘मैंने बहुत संघर्ष किया है। नहीं चाहूंगा कि अगले जन्म में फिर से ‘राहुल द बेली डांसर’ बनूं। लेकिन इन 15 सालों में आज भारत के सबसे बेहतरीन बेली डांसरों में से एक बन गया हूं।’
चर्चित बेली डांसर राहुल गुप्ता एक कार्यक्रम में परफॉर्म करते हुए। इस डांस की वजह से इन्हें इनके पिता ने घर से निकाल दिया। लोगों के भद्दे कमेंट के बाद डिप्रेशन में रहे, लेकिन देश के एक जाने-माने बेली डांसर हैं।
राहुल की तरह अभिषेक भी एक बेली डांसर हैं। हिमाचल प्रदेश के रहने वाले अभिषेक इस समय महाराष्ट्र के पुणे में रहते हैं। वो बताते हैं कि 14-15 साल का था। कुछ महिलाओं सज-धज कर एक डांस कर रही थीं। उस डांस में हिप्स और कमर के मूवमेंट बहुत लुभावने थे। उनका डांस बहुत पसंद आया। इतना कि उसी पल तय कर लिया कि अब यही करूंगा, यही मेरी पहचान होगी। वह बेली डांस था।
वह कहते हैं उससे पहले फ्रीस्टाइल और हाउस डांस करता था। लेकिन उस बेली डांस ने एक नई दिशा में खींच लिया। ‘अब मुझे लगता है कि इस डांस को मैंने नहीं, इसने मुझे चुना है। जब भी दरबुका म्यूजिक यानि मध्य-पूर्वी, तुर्की, मिस्री और अरबी की पारंपरिक ताल बजती है तो मेरी शरीर अपने आप उस धुन पर थिरकने लगती है।’
अभिषेक कहते हैं, उसके बाद मैंने इसकी ट्रेनिंग लेनी शुरू की। इसके लिए दिन-रात मेहनत किया। आज इस मुकाम पर पहुंच गया हूं कि अपनी मेहनत से खुश हूं।
अभिषेक की आवाज अचानक धीमी पड़ जाती है। वह कुछ पल रुककर बताते हैं- ‘एक बार रात में घर से टहलने निकला। उस रात 8 लड़कों ने मुझे घेर लिया और पीटना शुरू कर दिया। उन्हें पता था कि मैं बेली डांसर हूं। उस दिन उन्होंने मेरे सारे कपड़े फाड़ दिए। वे लोग उस दिन मुझे लगभग एक किलोमीटर तक घसीट कर ले गए। उनसे रहम की भीख मांग रहा था, गिड़गिड़ा रहा था, लेकिन वो मेरी एक नहीं सुन रहे थे। उन्होंने मुझे निर्वस्त्र कर दिया। मेरा सेक्सुअल हैरेसमेंट किया। मुझे लात-घूंसे मारे और कहते रहे कि तुम जैसे लोग सोसाइटी के लिए गंदगी हो। वो हालत मेरे लिए बहुत ही खराब थी। जैसे-तैसे मैं उस दिन बचकर आया था।’
वह कहते हैं कि आखिर सोसाइटी ने नियम बनाकर रखा है। लोग तय करते हैं कि फलां काम लड़कों का है और फलां लड़कियों का। हमारे देश में तो रंग का भी जेंडर तय कर दिया गया है। जैसे- पिंक कलर को लड़कियों का कलर माना जाता है। अगर कोई लड़का पिंक कलर के कपड़े भी पहन ले तो उसका मजाक उड़ाया जाता है।
वह अफसोस जाहिर करते हुए कहते हैं, ‘इस कला के लोग गलत नजरिये से देखते हैं। जब सीख रहा था तब मेरी जान-पहचान के लोग अक्सर मजाक बनाते। कहते- इस डांस को तो औरतें, मर्दों को रिझाने के लिए करती हैं।’ ‘इसी तरह आज जब इस डांस के वीडियो इंस्टाग्राम पर डालता हूं, तो लोग मेरे शरीर पर कमेंट करते हैं। कहते हैं- ‘तुम पर ये डांस सूट नहीं करता।’ ‘तू बहुत मोटा, भद्दा लगता है।’
यह सब सुनते-सुनते एक समय ऐसा भी आया कि सोशल मीडिया पर वीडियो डालने में डर लगने लगा। कहीं भी परफॉर्म करने से पहले बहुत सोच-विचार करने लगा।
वह कहते हैं कि आज उन लोगों की सोसाइटी में रहता हूं, जिन्होंने मेरी तरह नफरत झेली। उनके साथ रहते हुए अब अकेला नहीं महसूस करता। लगता है हम सभी एक ही जंग लड़ रहे हैं। खुद को स्वीकारने की जंग। अब हम मिलकर बेली डांस की वर्कशॉप करते हैं।
अभिषेक मुस्कुराते हैं। कहते हैं- मैंने अपनी लड़ाई खुद लड़ी। अब मुझे डर नहीं लगता है। मैंने बेली डांस में इतनी मेहनत की है कि अब लोग मेरा डांस देखकर तालियां बजाते हैं। मैंने साथ में पढ़ाई भी जारी रखी। फाइनेंस में एमबीए किया और आज इंफोसिस कंपनी में फाइनेंशियल एडवाइजर हूं। साथ में यह डांस मेरा पैशन है। मैं इसे जिम्मेदारी से निभाता हूं।

पुणे के अभिषेक, जिन्होंने बेली डांस को अपना पैशन बनाया। एक बार गुरुग्राम में रात को 8 लड़कों ने इन्हें घेरकर पीटा और कपड़े फाड़ दिए। उन्होंने इनके साथ सेक्सुअल हैरेसमेंट किया। देश के चर्चित बेली डांसर अभिषेक ने साथ-साथ एमबीए की पढ़ाई भी की। वह डांसर होने के साथ-साथ इस समय इंफोसिस कंपनी में फाइनेंशियल एडवाइजर भी हैं।
कोलकाता के रहने वाले 23 साल के तुषार रॉय की कहानी भी राहुल की तरह है। वो कहते हैं कि बचपन से ही मुझे डांस करना पसंद था। मैं जिस सोसाइटी में पला-बढ़ा, वहां बच्चों को शुरुआत से ही डॉक्टर या इंजीनियर बनने का दबाव था, लेकिन मेरा मन सिर्फ डांस में लगता था। जब भी कोई नया गाना आता तो उस पर डांस करता था।
तुषार बताते हैं कि एक बार डांस रिहर्सल के दौरान उन्होंने बेली डांस के कुछ मूव करने की कोशिश की। वहां मौजूद कुछ लोगों ने मुझे रोक दिया। उन्होंने कहा कि यह डांस स्टेप तुम्हारे लिए नहीं, यह लड़कियों के लिए है। उनकी बातें बहुत बुरी लगीं और मेरे अंदर घर कर गईं, लेकिन बेली डांस के स्टेप्स को आजमाने लगा था।
तुषार बेली डांस में मन लगने का किस्सा बताते हैं। वह कहते हैं- ‘जब मैंने 10वीं पास की, तो उस समय अभिनेत्री रानी मुखर्जी का एक गाना आया था ‘अगा बाई’, जिसकी शुरुआत वो बेली डांस से करती हैं। उनके स्टेप्स को सीखने लगा। कुछ लोगों के उनके स्टेप को कॉपी करके दिखाया तो वे मुझे देखकर हैरान रह गए। उन्होंने कहा कि तुमने बहुत शानदार बेली डांस किया है। उस दिन मुझे पहली बार लगा कि मैं कुछ अलग कर सकता हूं। मुझे बहुत अटेंशन मिलने लगा और तब से मैंने अपना पूरा फोकस बेली डांस पर लगा दिया।
तुषार ने उसके बाद खुद को और बेहतर करने की ठानी। वह बताते हैं- मैंने टीचर ढूंढ़ा। उनसे ट्रेनिंग लेना शुरू किया और बेली डांस के सफर आगे बढ़ाता गया। अब तो यह मेरे लिए सिर्फ एक आर्ट नहीं, बल्कि मेरी जिंदगी बन गया है। जब भी मैं बेली डांस करता हूं, तो ऐसा लगता है जैसे मैं खुद को पा रहा हूं। अपनी एक अलग पहचान बनता पाता हूं।
‘मैं मानता हूं कि बेली डांसर बनने लिए औरत या मर्द मसला नहीं है, बस डांस के लिए जुनून होना चाहिए।’
तुषार बताते हैं कि लोगों ने मुझ पर गंदे कमेंट किए। मेरे कपड़ों पर कहते- ‘कुछ पहनने की जरूरत ही क्या है, सारे कपड़े उतार कर डांस कर।’ जब मैंने डांस के दौरान ब्रा पहननी शुरू की तो लोगों ने कहा- ‘लड़की क्यों नहीं बन जाते’, ‘सेक्स चेंज करवा लो’। ये सब सुनकर पहले बहुत तकलीफ होती थी।
वहीं, इस दौरान मेरे घर वाले हमेशा मेरे साथ खड़े रहे। यही मेरी सबसे बड़ी ताकत है।

कोलकाता के रहने वाले तुषार रॉय बेली डांसर हैं। वह बताते हैं कि जब डांस के दौरान उन्होंने ब्रा पहननी शुरू की तो लोगों ने कहा- लड़की क्यों नहीं बन जाते, सेक्स चेंज करवा लो। ये सब सुनकर उन्हें बहुत तकलीफ होती थी।
(नोट- बेली डांस मध्य-पूर्व एशिया का प्रमुख डांस है। यह अरब देशों का क्लासिकल डांस है। बॉलीवुड फिल्मों- ‘तीस मार खा’ में- ‘शीला की जवानी’, एक था टाइगर में- माशाअल्ला और दिलबर..दिलबर गाने पर अभिनेत्री व डांसर नोरा फतेही ने इस डांस को किया है।)
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