10 नवंबर 2025…दिल्ली में लाल किला के पास आतंकी डॉ उमर ने हमले की साजिश को अंजाम दिया। कार में हुए ब्लास्ट में 13 लोगों की मौत हुई, जबकि 20 लोग घायल हुए। इस हमले के कनेक्शन में अब तक डॉ. मुजम्मिल, डॉ. आदिल और डॉ. शाहीन समेत 8 लोग गिरफ्तार किए गए हैं।
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हमले के 5 दिन बाद भी अब सवाल ये है कि आतंकी उमर कार में विस्फोटक लेकर कब और कैसे दिल्ली पहुंचा? दिल्ली में वो कहां-कहां गया? कार में इतना विस्फोटक होने के बाद क्या रास्ते में ब्लास्ट होने का खतरा नहीं था? आखिर उसने डेटोनेटर और फ्यूज को कब और कैसे कनेक्ट किया?
आतंकी उमर के सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल करने पर पता चला कि वो कार में विस्फोटक लेकर नूंह-मेवात रूट से हरियाणा से दिल्ली पहुंचा। फिर बदरपुर से होते हुए तुर्कमान गेट के पास आसफ अली रोड पर मौजूद दरगाह पहुंचा। यहां उसने नमाज पढ़ी और और लाल किला के पास सुनहरी बाग पार्किंग में 3 घंटे इंतजार किया। फिर ब्लास्ट की साजिश को अंजाम दिया।
सोर्स के मुताबिक, सुनहरी बाग पार्किंग में इंतजार करने के दौरान ही उसने ब्लास्ट देने के लिए डेटोनेटर और फ्यूज को विस्फोटक से कनेक्ट किया था। इस आतंकी हमले का पैटर्न कोई नया नहीं है। इससे पहले 2000 में दीनदार अंजुमन ग्रुप ने भी इसी पैटर्न पर सीरियल ब्लास्ट कराए थे।
दैनिक भास्कर ने आतंकी उमर के सीसीटीवी फुटेज खंगाले और आपस में इनके लिंक जोड़े। एक्सपर्ट और सोर्स से बात करके हमने ये भी समझने की कोशिश की कि उमर ने पूरे हमले को कैसे अंजाम दिया। साथ ही इसमें डॉक्टर मॉड्यूल के इस्तेमाल की वजह भी समझी। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
सीसीटीवी में कब-कहां नजर आया आतंकी उमर दिल्ली हमले को लेकर अब तक कई सीसीटीवी फुटेज सामने आए हैं। इसमें धमाके से 17 घंटे पहले के एक सीसीटीवी में रात करीब डेढ़ बजे आतंकी डॉ उमर और उसकी कार नूंह-मेवात रूट पर देखी गई। उस वक्त कार की रफ्तार तेज थी।
इसके बाद आतंकी उमर 10 नवंबर की सुबह करीब 8 बजे के दिल्ली बदरपुर बॉर्डर के सीसीटीवी फुटेज में नजर आया। ये फुटेज काफी साफ है। इसमें कार की पिछली सीट पर काले और सफेद रंग का एक बैग दिख रहा है। उमर ने खुद भी काले रंग का मास्क लगा रखा है।

ये तस्वीर 10 नवंबर रात रात करीब डेढ़ बजे की है, जब आतंकी डॉ उमर और उसकी कार नूंह-मेवात रूट पर देखी गई।

10 नवंबर की सुबह आतंकी उमर करीब 8 बजे के दिल्ली बदरपुर बॉर्डर पर नजर आया।
ये फुटेज देखने के बाद जांच टीम के सोर्सेज ने बताया कि तब तक कार में मौजूद विस्फोटक को डेटोनेटर और फ्यूज से कनेक्ट नहीं किया था। इसीलिए कार की रफ्तार तेज थी। इसके बाद दोपहर में उमर तुर्कमान गेट के पास आसफ अली रोड पर मौजूद दरगाह पहुंचा था। यहां उसने नमाज पढ़ी।
फिर दोपहर करीब 3.19 बजे वो कार लेकर लाल किला के पास सुनहरी बाग पार्किंग पहुंचा था। फिर शाम करीब 6:48 बजे तक यानी करीब साढ़े तीन घंटे यहीं रुका रहा। सोर्स के मुताबिक, इसी दौरान आतंकी उमर ने कार में ही विस्फोटक को डेटोनेटर और फ्यूज से जोड़ा। इसमें महज 3-4 मिनट ही लगते हैं। यानी उसने घटना को अंजाम देने के लिए जानबूझकर शाम होने का इंतजार किया।

आतंकी उमर इसमें तुर्कमान गेट के पास मस्जिद के आस-पास नजर आ रहा है।

10 नवंबर को दोपहर के वक्त आसफ अली रोड पर उमर की कार भी देखी गई।
पोटेशियम क्लोरेट और अमोनियम नाइट्रेट केमिकल से ब्लास्ट आखिर डेटोनेटर और फ्यूज को कैसे कनेक्ट किया। क्या ये विस्फोटक अमोनियम नाइट्रेट था या कुछ और था। इसे समझने के लिए हमने फोरेंसिक जांच से जुड़े कुछ सीनियर अफसरों से बात की। इसमें हमें घटनास्थल से पोटेशियम क्लोरेट जैसा केमिकल मिलने की बात कंफर्म हुई है। पूरा मामला समझने के लिए हमने दिल्ली में 2008 में हुए सीरियल ब्लास्ट की जांच से जुड़े दिल्ली के रिटायर्ड पुलिस अफसर कर्नल सिंह से बात की।
उन्होंने बताया,
पोटेशियम क्लोरेट और अमोनियम नाइट्रेट को मिलाकर काफी पावरफुल विस्फोटक तैयार होता है। इससे पहले 2005 में दिल्ली के सरोजनी नगर में हुए ब्लास्ट में भी आतंकियों ने इसी तरह के विस्फोटक का इस्तेमाल किया था।

हमने सवाल किया कि आतंकी उमर विस्फोटक कार में लेकर नूंह और फरीदाबाद से दिल्ली के लाल किला तक गया। क्या इस दौरान रास्ते में ब्लास्ट होने का खतरा नहीं था।
इस पर रिटायर्ड अधिकारी कहते हैं, ‘उसने डेटोनेटर और फ्यूज को विस्फोटक से कनेक्ट नहीं किया होगा इसलिए कोई खतरा नहीं हुआ। इस घटना में वैसे भी लिक्विड डेटोनेटर के इस्तेमाल की आशंका है। ये सब कुछ अलग-अलग से रेडीमेड मिल जाते हैं। फिर विस्फोटक को डेटोनेटर और फ्यूज के जरिए बैटरी पावर सप्लाई से कनेक्ट करने में महज 3-4 मिनट ही लगते हैं।‘
‘इसलिए अब तक यही आशंका जताई जा रहा है कि आतंकी उमर जब सुनहरी बाग पार्किंग में था, तभी उसने कार में विस्फोटक को लिक्विड डेटोनेटर और फ्यूज से कनेक्ट किया होगा।‘

लाल किला के पास सुनहरी बाग पार्किंग से उमर ब्लास्ट को अंजाम देने के लिए निकला था।
इसे विस्फोट कैसे किया गया होगा? इसके जवाब में कर्नल सिंह कहते हैं कि विस्फोट के लिए रिमोट और मैनुअल दोनों तरीके होते हैं। इस केस में मैनुअल ही कराने का आशंका ज्यादा है या फिर हड़बड़ी में भी ये अचानक ब्लास्ट हो सकता है। हालांकि एक बात साफ है कि आतंकी उमर बहुत बड़े धमाके की साजिश में था। इसीलिए इस ब्लास्ट की इंटेंसिटी इतनी ज्यादा थी।
कार की बैटरी से कनेक्ट किया गया विस्फोटक अब तक की जांच और सीसीटीवी फुटेज से साफ हुआ है कि 10 नवंबर की शाम करीब 6:48 बजे जब सुनहरी बाग पार्किंग से कार निकली तो उसका बोनट रस्सी से बंधा हुआ था। इसलिए आशंका ये भी है कि कार की बैटरी से ही डेटोनेटर और फ्यूज को कनेक्ट किया गया।
सोर्स के मुताबिक, असल में विस्फोटक को एक्टिवेट करने के लिए भी पावर सप्लाई की जरूरत होती है, जिससे विस्फोटक में आग लगाई जा सके। इसलिए कार की बैटरी से ही डेटोनेटर और फ्यूज से विस्फोटक को कनेक्ट किया गया। इसे तार के जरिए कनेक्ट करने की वजह से बोनट दो से ढाई इंच तक खुला रह गया था। इसे ही कवर करने के लिए आतंकी उमर ने बोनट को रस्सी से बांध दिया था।

आतंकी उमर जब सुनहरी बाग पार्किंग से लाल किला के पास ब्लास्ट के लिए निकला, तब कार का बोनट रस्सी से बंधा हुआ था।
केमिकल को पेट्रोल या CNG से मिलाकर बनाया हाई एक्सप्लोसिव बम देश में कई बम धमाकों की जांच से जुड़े रहे एक अन्य सीनियर पुलिस अफसर ने बताया कि धमाके के बाद जिस तरह लोगों के चीथड़े उड़े। घटना के तीन दिन बाद मौके से करीब 300-400 मीटर दूर एक छत से लाश के टुकड़े मिले हैं। धमाके में कई लोगों की शॉक वेव की वजह से सुनने की क्षमता चली गई या बॉडी में इंटर्नल इंजरी हुई। उससे एक बात साफ है कि बम की इंटेंसिटी बहुत ज्यादा थी।
सीसीटीवी में विस्फोटक कार की पिछली सीट पर दिख रहा था। कार भी पेट्रोल या CNG वाली थी। सोर्स के मुताबिक, अगर 5 किलो अमोनियम नाइट्रेट और पोटेशियम क्लोरेट के मिक्सर को बैटरी के जरिए लिक्विड डेटोनेटर और फ्यूज से कनेक्ट करके ब्लास्ट किया जाए तो ये पेट्रोल और CNG के साथ मिलकर धमाकेदार अग्नि बम बन जाता है। यही दिल्ली वाले मामले में भी हुआ। इसलिए धमाका काफी तेज हुआ था।
ऐसे धमाकों में कई बार डेटोनेटर नहीं मिलता है। क्योंकि हाई इंटेंसिटी के चलते वो घटनास्थल से काफी दूर चला जाता है।

10 नवंबर को दिल्ली में लाल किला के पास कार बम ब्लास्ट की तस्वीर।
दिल्ली ब्लास्ट दीनदार अंजुमन नेटवर्क से कैसे मिलता-जुलता असल में साल 2000 में मई और जुलाई के बीच आंध्रप्रदेश के ताडेपल्लीगुडेम, वानपर्थी और कर्नाटक के हुबली और गोवा के वास्को में बम धमाके हुए। ये सभी धमाके चर्च के आस-पास हुए लेकिन इन्हें अंजाम देने वालों का कोई खास सुराग नहीं मिला था। इसके बाद जुलाई में ही बेंगलुरु में टारगेट से पहले ही अचानक एक कार में धमाका हो गया। उस धमाके से जांच एजेंसियों को लीड मिली थी।
इस बारे में दिल्ली स्पेशल सेल में सीनियर अधिकारी रह चुके कर्नल सिंह बताते हैं, ’10 नवंबर को दिल्ली ब्लास्ट का पैटर्न काफी हद तक 2000 में हुए दीनदार अंजुमन नेटवर्क के सीरियल ब्लास्ट जैसा दिख रहा है। जिस तरह 3 महीने के अंदर कर्नाटक, आंध्रप्रदेश और गोवा में कई ब्लास्ट हुए लेकिन सुराग नहीं मिल रहा था। फिर जुलाई में बेंगलुरु में अचानक एक्सिडेंटली एक कार में ब्लास्ट हो गया। उस ब्लास्ट में भी अमोनियम नाइट्रेट का इस्तेमाल हुआ था।’
‘इसकी जांच करते हुए दीनदार अंजुमन नेटवर्क का पता चला था। इस ग्रुप को बाद में भारत सरकार ने बैन कर दिया था। अभी जिस तरह से कारों में बम प्लांट करके अलग-अलग जगहों पर धमाके करने की साजिश की खबरें आ रही हैं। उससे आशंका है कि आतंकी नेटवर्क फिर उसी पैटर्न का इस्तेमाल कर रहा था। हालांकि इसकी पुष्टि जांच रिपोर्ट से ही हो सकेगी।’

पढ़े-लिखे लोगों को ब्रेनवॉश कर बना रहे ‘व्हाइट कॉलर टेररिस्ट’ दिल्ली ब्लास्ट मामले में डॉक्टरों के ही ज्यादातर लिंक क्यों सामने आ रहे हैं। इसे लेकर रिटायर्ड IPS अफसर कर्नल सिंह बताते हैं, ‘मैं सिर्फ डॉक्टर की बात नहीं अच्छे पढ़े-लिखे और कम पढ़े लिखे लोगों से तुलना कर बात करूंगा। असल में साल 2000 से पहले इंडियन मुजाहिद्दीन में काफी पढ़े-लिखे आतंकी थे। इनमें से कई दिल्ली की जामिया यूनिवर्सिटी से पास आउट थे।‘
‘जब पहले जिहादी नेटवर्क ब्रेनवॉश करके युवाओं को आतंकी बनाते थे तो उसमें लंबा वक्त लगता था। पहले उन्हें किसी धार्मिक जगह जैसे मदरसे पर बुलाया जाता है। फिर बातचीत के दौरान उनका ब्रेनवॉश किया जाता है। हालांकि ये तरीके 2004 से पहले ज्यादा अपनाए जाते थे।‘

हमने पूछा कि आखिर वो क्या तरीके हैं, जिससे पढ़े-लिखे डॉक्टर जैसे लोग भी ब्रेनवॉश के बाद फिदायीन हमले के लिए तैयार हो जाते हैं। इसे समझाते हुए रिटायर्ड अधिकारी कहते हैं कि मैंने आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिद्दीन के ब्रेनवॉश करने वाले एक आतंकी से पूछताछ की थी। उसने जो पूरा प्रॉसेस बताया, उसे हम तीन स्टेप में समझ सकते हैं।
‘पहले ये लोग ऐसे लोगों से संपर्क करते हैं, जो पढ़-लिखकर बड़े पदों पर तो पहुंच जाते हैं लेकिन धार्मिक कार्यों में थोड़ा पीछे हो जाते हैं। पहले उनसे धार्मिक एंगल पर सामान्य बातचीत की जाती है कि जैसे- क्या आपको नमाज पढ़नी आती है। क्या आप वजू कर लेते हैं। अगर वे इस पर ध्यान देते हैं और नमाज या धार्मिक कामकाज में रुचि दिखाने लगते हैं तो इससे तय हो जाता है कि वो कट्टरपंथियों की बातें गंभीरता से ले रहे हैं।‘
इसके बाद उसे दूसरा टास्क दिया जाता है। इसमें उसे धर्म से जुड़े फोटो और वीडियो दिखाए जाते हैं। इनमें ज्यादातर फोटो और वीडियो फेक होते हैं, जिसमें उसे धर्म खतरे में बताकर भड़काया जाता है।

‘तीसरे स्टेप में उन्हें जिहाद के बारे में बताया जाता है और इसके फायदे गिनाए जाते हैं, जैसे- जिहाद करना हज करने से भी ज्यादा बड़ा है, मौत के बाद जन्नत नसीब होगी, पावर मिलेगी। इस तरह उनका ब्रेनवॉश क किया जाता है।‘
वे आगे बताते हैं, ‘जब वो मेंटली दूसरे के कंट्रोल में आ जाता है। तब उसे आखिरी ट्रेनिंग दी जाती है। कई बार ये ट्रेनिंग ऑनलाइन या फिर फिजिकली किसी दूसरे देश में बुलाकर दी जाती है। इसके बाद उसे टेरर एक्टिविटीज से जोड़ दिया जाता है।‘

डॉक्टरों का दुबई और लंदन नेटवर्क, जांच में जुटी एजेंसियां फरीदाबाद डॉक्टर टेरर मॉड्यूल में सबसे पहले गिरफ्तार हुए डॉ. आदिल के भाई के दुबई में होने की आशंका है। इससे पहले मुंबई में हुए 26/11 हमले के आरोपी डेविड हेडली के भी लंदन और दुबई में रुककर साजिश रचने के सबूत मिल चुके हैं। ऐसे में जांच एजेंसियों को शक है कि भारत में आतंकियों के नेटवर्क को विदेश से मदद मिल रही है। बीच-बीच में फंडिंग और ट्रेनिंग के लिए दूसरे देशों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
दैनिक भास्कर को सूत्रों के जरिए डॉ. शाहीन की एक फोटो मिली है। ये फोटो पुलिस ने 3 नवंबर को फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी में वीजा वेरिफिकेशन के लिए ली थी। आशंका जताई जा रही है कि जब पकड़े जाने का शक हुआ तो डॉ. शाहीन विदेश भागने की फिराक में थी। ये भी पता चला है कि डॉ. शाहीन दुबई या लंदन भागने की तैयारी में थी।

कश्मीर में पहले भी डॉक्टर और सरकारी कर्मियों के आतंकियों से लिंक मिले फरीदाबाद डॉक्टर टेरर मॉड्यूल में ज्यादातर कश्मीर से आए संदिग्ध आतंकी डॉक्टर ही शामिल हैं। इसे लेकर हमने जम्मू कश्मीर के पूर्व DGP के. राजेंद्र कुमार से बात की। वे कहते हैं, ‘ऐसा नहीं है कि पहली बार किसी टेरर अटैक में डॉक्टरों की भूमिका सामने आई हैं। जम्मू कश्मीर में पिछले कुछ सालों में कई सरकारी कर्मचारी टेरर लिंक में बर्खास्त किए जा चुके हैं।‘

‘इस केस में अब तक शोपियां के मौलवी इरफान के कट्टरपंथी बनाने की बात आई है। इसलिए धर्म के आधार पर इन्हें कट्टरपंथ से जोड़कर आतंक की राह पर ले जाया रहा है।‘
वो आगे कहते हैं कि पहले भी कुछ लोकल फिदायीन अटैक में शामिल रहे हैं। अब अगर दिल्ली तक देश के ही फिदायीन अटैक की साजिश रच रहे हैं, तो ये बेहद खतरनाक हो सकता है। इसके लिए जांच एजेंसियों को ज्यादा अलर्ट रहने की जरूरत है।‘ ………………..
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दिल्ली ब्लास्ट-कौन है डॉक्टरों का ब्रेनवॉश करने वाला मौलवी इरफान

दिल्ली में लाल किले के पास कार में हुए ब्लास्ट के तार पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर तक पहुंच रहे हैं। भारत में आतंकी हमलों के लिए 3-4 महीनों से साजिश रची जा रही थी। इसके पीछे आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा शामिल थे। खुफिया एजेंसियों को इसके संकेत PoK में आतंकियों के इंटरसेप्ट कम्युनिकेशन से मिले हैं। पढ़िए पूरी खबर…
