पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (PSEB) के जाली सर्टिफिकेट से सरकारी नौकरी हासिल करने का मामला सामने आया है। नौकरी फॉरेस्ट विभाग में हासिल की गई थी। इसका खुलासा तब हुआ, जब सर्टिफिकेट जांच के लिए PSEB में पहुंचा था। जांच में पता चला कि ऐसा कोई भी विद्यार्थी उ
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सर्टिफिकेट के फर्जीवाड़े की कहानी को तीन प्वाइंटों में समझें —
- मुक्तसर साहिब से आया सर्टिफिकेट वन मंडल अधिकारी, मुक्तसर साहिब के दफ्तर से एक सर्टिफिकेट जांच के लिए भेजा गया था। यह चमकौर सिंह नाम के व्यक्ति के नाम पर था। सर्टिफिकेट 2010 का बना हुआ था और यह बठिंडा जिले का था।
- नाम और पता भी निकला अलग जब यह सर्टिफिकेट जांच के लिए पहुंचा तो इसकी वेरिफिकेशन शाखा में पड़ताल शुरू हुई। इस दौरान पता चला कि सर्टिफिकेट में जो रोल नंबर लिखा था, वह चमकौर सिंह नाम के व्यक्ति के नाम पर नहीं था। रिकॉर्ड में विद्यार्थी का नाम सुखदेव कुमार लिखा हुआ था।
- उम्र भी गलत, नौ साल का अंतर
- जांच में सामने आया कि चमकौर सिंह के सर्टिफिकेट पर जन्मतिथि/उम्र 25-5-77 लिखी हुई थी, जबकि रिकॉर्ड में सुखदेव का जन्मवर्ष 1986 दर्ज था। इससे स्पष्ट हो गया कि यह सर्टिफिकेट जाली है।
पीएसईबी की तरफ से विभाग को भेजी गई रिपोर्ट।
हर महीने दो हजार सर्टिफिकेट पहुंचते हैं
पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड से पढ़े लिखे लोग जिस भी विभाग में सरकारी नौकरी हासिल करते हैं, तो संबंधित विभाग उनके सर्टिफिकेट की वेरिफिकेशन करवाते है। इसी कड़ी में हर महीने करीब दो हजार सर्टिफिकेट पड़ताल के लिए PSEB में भेजे जाते हैं। इनमें कई लोगों के सर्टिफिकेट फर्जी पकड़े जाते हैं। अब तक कई रेलवे, पंजाब पुलिस, पासपोर्ट कार्यालय, भारतीय सेना, पंजाबी यूनिवर्सिटी समेत कई विभागों में फर्जी सर्टिफिकेटों से नौकरी हासिल करने के मामले सामने आ चुके हैं। PSEB केवल इन लोगों को अपने रिकॉर्ड में ब्लैकलिस्ट करता है। आगे की कार्रवाई संबंधित विभाग को करनी होती है।
