छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा ने बलौदाबाजार में आयोजित एक सेमिनार में कहा कि न्याय की नींव सत्य, समानता और निष्पक्षता पर आधारित है। उन्होंने ‘विधि के शासन: न्याय की आधारशिला’ विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में अपने व
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मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सिन्हा ने ‘विधि के शासन’ की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश में कानून सर्वोपरि है। उन्होंने जोर दिया कि हमारे लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति इसी में निहित है कि कोई भी व्यक्ति, संस्था या पद कानून से ऊपर नहीं है।
न्यायमूर्ति सिन्हा ने आगे कहा कि विधि का शासन यह सुनिश्चित करता है कि समाज के कमजोर वर्ग, महिलाएं, बच्चे, पीड़ित, विचाराधीन बंदी और प्रत्येक व्यक्ति को समान न्याय मिल सके।
चीफ जज ने वकीलों को न्याय प्रणाली का अहम स्तंभ बताया
उन्होंने अधिवक्ताओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि अधिवक्ता समुदाय न्याय प्रणाली का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ है। मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि न्याय की यात्रा प्रायः एक अधिवक्ता से ही प्रारंभ होती है, क्योंकि आम नागरिक सबसे पहले उन्हीं से न्याय की आशा लेकर मिलता है।
न्यायमूर्ति सिन्हा ने कहा कि अधिवक्ता केवल मुकदमों का प्रतिनिधित्व ही नहीं करते, बल्कि वे न्याय के वाहक, अधिकारों के रक्षक और संविधान के प्रहरी भी होते हैं।
मुख्य न्यायाधीश ने न्यायिक प्रक्रिया में प्रौद्योगिकी के बढ़ते महत्व पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि डिजिटल कोर्ट, ई-फाइलिंग और वर्चुअल सुनवाई की प्रणाली तेजी से विकसित हो रही है।
उन्होंने अधिवक्ताओं को इन तकनीकी बदलावों में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए कहा कि तकनीक न्याय की गति और पारदर्शिता को और अधिक सुदृढ़ कर सकती है। न्यायमूर्ति सिन्हा ने अधिवक्ताओं से नई तकनीकों को अपनाने और सीखने की क्षमता बढ़ाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ अधिवक्ता भूपेंद्र ठाकुर के स्वागत भाषण से शुरू हुआ और जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष मोहम्मद शारिक खान के धन्यवाद ज्ञापन के साथ समापन हुआ।
इस अवसर पर रजिस्ट्रार जनरल रजनीश श्रीवास्तव, पी.पी.एस. सुब्रमण्यम स्वामी सहित जिले के न्यायिक एवं प्रशासनिक अधिकारी, बड़ी संख्या में अधिवक्ता और मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
